500% टैरिफ की धमकी… भारत की रफ्तार से घबराए ट्रंप, अब अगला कदम क्या?
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500% टैरिफ की धमकी… भारत की रफ्तार से घबराए ट्रंप, अब अगला कदम क्या?

Trump tariff: रूस-यूक्रेन युद्ध ट्रंप के लिए एक बहाना हो सकता है। असल मुद्दे भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, BRICS का बढ़ता प्रभाव और डॉलर की वैश्विक पकड़ कमजोर होने का डर है।


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Donald Trump India Tariff: सोचिए… एक तरफ पूरी दुनिया मंदी, जंग और महंगाई से जूझ रही है। वहीं,दूसरी तरफ एक देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था रॉकेट की तरह ऊपर जा रही है। अब इसी देश को 500% टैक्स की धमकी मिलती है। धमकी देने वाला देश है अमेरिका और उसका बहाना रूस से तेल खरीदना है। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या ट्रंप सच में रूस से नाराज हैं या फिर उन्हें भारत की बढ़ती ताकत से डर है? क्योंकि जब भारत 7.4% की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, तब ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति हिलने लगी है।

हाल ही में ट्रंप ने ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025’ नाम के एक कानून को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत उन देशों पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाया जा सकता है, जो रूस से तेल, गैस या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं। इस बिल की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भारत और चीन जैसे देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। यानी अगर भारत से कोई सामान अमेरिका जाता है तो उस पर उसकी कीमत से पांच गुना तक टैक्स लगाया जा सकता है।

ट्रंप की सैंक्शन नीति

ट्रंप शुरू से ही ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चलते रहे हैं। 2025 में सत्ता में लौटने के बाद उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को अपनी विदेश नीति का केंद्र बना लिया। यह नया कानून अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के साथ मिलकर तैयार किया है। उनका कहना है कि जो देश सस्ता रूसी तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। इसलिए ऐसे देशों को सजा मिलनी चाहिए। इस सूची में खासतौर पर भारत, चीन और ब्राजील को निशाना बनाया गया है, क्योंकि ये देश रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। कानून के मुताबिक, अगर रूस यूक्रेन से शांति वार्ता से इनकार करता है या दोबारा हमला करता है तो अमेरिका उन देशों पर 500% तक टैरिफ लगा सकता है, जो रूस से व्यापार कर रहे हैं।

भारत पर पहले से दबाव

यह पहली बार नहीं है, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाया हो। अगस्त 2025 में ही ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, जिससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50% तक पहुंच गया। ट्रंप का कहना था कि भारत रूस से तेल खरीदकर गलत कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत ने यह व्यापार पूरी तरह नहीं रोका तो टैरिफ और बढ़ाए जाएंगे। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कहा है कि पीएम मोदी ने कभी रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा नहीं किया। भारत ने जरूरत के हिसाब से तेल खरीद कम जरूर की है। अमेरिकी सीनेटर ग्राहम ने यह भी बताया कि भारत ने 25% टैरिफ में राहत मांगी थी। इन सब बातों से साफ है कि ट्रंप की नीति सिर्फ रूस को अलग-थलग करने की नहीं, बल्कि दुनिया के व्यापार को अपने पक्ष में मोड़ने की भी है।

रूस सिर्फ बहाना

यहां एक बड़ा विरोधाभास सामने आता है। भारत पर रूस से तेल खरीदने का दबाव डाला जा रहा है, लेकिन अमेरिका खुद आज भी रूस से यूरेनियम खरीदता है। अमेरिकी कंपनियां रूस से उर्वरक, पैलेडियम और रसायन लेती हैं। यही सवाल एक भारतीय पत्रकार ने ट्रंप से प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा भी था। ट्रंप ने इस पर सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि अमेरिका और यूरोप खुद रूस से व्यापार करते हैं, लेकिन भारत को ही निशाना बनाते हैं—यह दोहरा रवैया है।

भारत की तेज ग्रोथ, असली चिंता?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 7% तक की बढ़त की संभावना है। यह ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का असर है। यही वजह है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर भारत बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं। महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है। ऐसे में भारत का तेजी से आगे बढ़ना ट्रंप को खटक सकता है।

भारत की ग्रोथ से बौखलाए ट्रंप?

ट्रंप पहले भी भारत को ‘टैरिफ किंग’ कह चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि भारत अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैक्स लगाता है। अब रूस से तेल खरीद को बहाना बनाकर भारत पर 500% टैरिफ की धमकी दे रहा है। जबकि भारत पहले ही तेल खरीद कम कर चुका है। तो सवाल उठता है कि फिर इतनी सख्ती क्यों? कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत होना, एफडीआई, शेयर बाजार और निर्यात में तेजी, यही बातें ट्रंप को परेशान कर रही हैं।

BRICS और डॉलर

ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ भारत नहीं, बल्कि BRICS समूह है। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसके साथ ही नए सदस्य ईरान, UAE, इंडोनेशिया भी हैं। यह समूह दुनिया की 37% से ज्यादा GDP और 46% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। BRICS देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। यही बात ट्रंप को सबसे ज्यादा चुभती है। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि जो देश डॉलर को कमजोर करेगा, उसे अमेरिकी बाजार से बाहर कर देंगे। 500% टैरिफ की धमकी इसी बौखलाहट का नतीजा मानी जा रही है।

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