
इस्लामाबाद वार्ता फेल! ट्रंप ने होर्मुज को घेरा, ईरान को दी धमकी
ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम पर झुकने से इनकार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज की नाकेबंदी का आदेश दिया है। जेडी वेंस की शांति वार्ता बिना नतीजे के खत्म हुई।
USA Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई 20 घंटे लंबी ऐतिहासिक मैराथन वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार करने के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। ट्रंप ने इसे 'वैश्विक उगाही' (World Extortion) करार दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसेना तत्काल प्रभाव से इस रणनीतिक जलमार्ग में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले हर जहाज को रोकेगी। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने किसी भी जहाज पर हमला किया, तो उसे 'नर्क' (Blown to Hell) भेज दिया जाएगा।
परमाणु मुद्दे पर अड़ा ईरान, जेडी वेंस लौटे खाली हाथ
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची से हुई। 1979 के बाद यह दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय बैठक थी। ट्रंप के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन ईरान अपने परमाणु हथियारों की जिद छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। ट्रंप ने कहा कि परमाणु शक्ति ऐसे 'अस्थिर और अप्रत्याशित' लोगों के हाथ में नहीं दी जा सकती। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देगी।
होर्मुज में समुद्री बारूद और नौसैनिक टकराव
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। ईरान का दावा है कि उसने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में समुद्री बारूद (Mines) बिछाए हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही असुरक्षित हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान की अधिकांश नौसेना और माइन-ड्रॉपर्स पहले ही अमेरिकी हमलों में तबाह हो चुके हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 11 अप्रैल को गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी ने इस क्षेत्र में माइन्स साफ करने के लिए प्रवेश किया था। वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' का दावा है कि उनकी मिसाइलों ने अमेरिकी जहाजों को लॉक कर दिया था, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा।
वैश्विक ऊर्जा संकट और अर्थव्यवस्था पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का 20% हिस्सा गुजरता है। ट्रंप द्वारा की गई इस नाकेबंदी और 'अवैध टोल' वसूलने वाले जहाजों को रोकने के आदेश से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी हड़कंप मच गया है। ट्रंप ने कहा कि जो भी जहाज ईरान को टोल देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। यदि यह नाकेबंदी लंबी चलती है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सेना 'लॉक्ड एंड लोडेड' है और यदि आवश्यकता पड़ी, तो ईरान का जो कुछ भी हिस्सा बचा है, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
पाकिस्तान की भूमिका और ट्रंप का दावा
इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। ट्रंप ने इन दोनों नेताओं की प्रशंसा की और एक चौंकाने वाला दावा भी किया। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने उन्हें भारत के साथ एक भयानक युद्ध को रोकने और 3 से 5 करोड़ लोगों की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया है। फिलहाल, अमेरिका ने अन्य देशों को भी इस नाकेबंदी में शामिल होने का आह्वान किया है। दुनिया अब इस बात से डरी हुई है कि यह नौसैनिक गतिरोध कहीं सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध में तब्दील न हो जाए।

