
शांति वार्ता विफल होने से पहले ही धमका रहे थे ट्रंप, दे डाली ऐसी धमकी
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल किसी समझौते पर पहुंचे बिना ही पाकिस्तान से विदा हो गए हैं। इस विफलता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए...
अमेरिका और ईरान के मध्य शांति वार्ता के विफल होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी करने की चेतावनी दी है। यदि यह कदम उठाया जाता है तो ईरान के तेल राजस्व और उसकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ना निश्चित है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बेनतीजा स्तर पर जाकर खत्म हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल किसी समझौते पर पहुंचे बिना ही पाकिस्तान से विदा हो गए हैं। इस विफलता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के समुद्री रास्तों को घेरने का दावा किया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर एक समाचार लेख साझा किया, जिसमें संकेत दिया गया है कि बातचीत नाकाम होने के बाद अब ट्रंप के पास ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी का विकल्प है। यह लेख वार्ता का परिणाम आने से पहले का है, जिसमें लिखा गया था कि यदि ईरान अंतिम प्रस्ताव ठुकराता है तो ट्रंप के पास कई रणनीतियां तैयार हैं। यानी अंदर खाने ट्रंप जानते थे कि यह वार्ता सफल होने की संभावन नगण्य है! ट्रंप ने पहले भी ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने की चेतावनी दी थी और अब वे वेनेजुएला की तर्ज पर ईरान की आर्थिक घेराबंदी कर सकते हैं।
वेनेजुएला में ट्रंप द्वारा की गई नौसैनिक नाकेबंदी सफल रही थी और अब वही योजना ईरान पर लागू की जा सकती है। इससे ईरान के तेल निर्यात का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा, जिससे चीन और भारत जैसे आयातक देशों पर भी दबाव बढ़ेगा। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वेनेजुएला की नाकेबंदी करने वाला युद्धपोत 'यूएसएस गेराल्ड फोर्ड' मरम्मत के बाद वर्तमान में फारस की खाड़ी में तैनात है और 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' के साथ जुड़ चुका है।
'अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज पर नियंत्रण अब आसान'
लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण करना काफी सरल होगा। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 24 घंटों में वहां एक रूसी टैंकर सहित लगभग 10 जहाजों की आवाजाही हुई है। ग्रांट ने कहा कि यदि ईरान अड़ियल बना रहता है तो अमेरिकी नौसेना निगरानी बढ़ा देगी और खार्ग द्वीप या ओमान के संकरे रास्तों से गुजरने के लिए अमेरिकी अनुमति लेनी होगी।
वहीं, सेवानिवृत्त जनरल जैक कीन ने सुझाव दिया है कि जंग दोबारा शुरू होने पर अमेरिकी सेना ईरान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले 'खर्ग द्वीप' पर कब्जा कर सकती है या उसे नष्ट कर सकती है। जनरल कीन ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' में लिखा कि यदि खार्ग के बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण होता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल पर पकड़ मजबूत होगी। उनके अनुसार, यह अंतिम दबाव ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को जब्त करने और उनके परमाणु संवर्धन केंद्रों को समाप्त करने में सहायक होगा।

