
ट्रंप बनाम पोप लियो XIV: वॉशिंगटन और वेटिकन के बीच कितनी बार हुआ है टकराव?
अमेरिका के पहले स्वदेशी पोप और ट्रंप के बीच जुबानी जंग तेज; राष्ट्रपति ने बताया 'कमजोर', पोप बोले- मुझे वर्तमान प्रशासन का कोई डर नहीं।
White House Vs Vatican City : दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली केंद्रों व्हाइट हाउस और वेटिकन सिटी के बीच संबंध अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब एक नया 'दुश्मन' खोज लिया है और इस बार उनके निशाने पर कोई राजनेता नहीं, बल्कि कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप हैं। पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने के लिए पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता की विफलता और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की ओर से की गई समुद्री नाकेबंदी के बीच यह टकराव पैदा हुआ है। दरअसल, पहले अमेरिकी मूल के पोप ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष की कड़ी निंदा की थी, जिसके बाद ट्रंप ने उन पर सीधा हमला बोल दिया है।
ईरान और वियतनाम पर टिप्पणी से भड़के ट्रंप
इस पूरे विवाद की जड़ में पोप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ट्रंप द्वारा ईरान की "पूरी सभ्यता" को नष्ट करने की धमकी को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया था। शनिवार को सेंट पीटर्स बेसिलिका में प्रार्थना के दौरान पोप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "सत्ता के प्रदर्शन और युद्धों को अब बंद होना चाहिए।" पोप की यह टिप्पणी उसी दिन आई जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हुई थी। गौरतलब है कि वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस खुद एक कैथोलिक हैं।
ट्रंप ने इस आलोचना का जवाब अपने चिर-परिचित अंदाज में 'ट्रुथ सोशल' पर दिया। उन्होंने पोप को 'अपराध पर नरम' और 'विदेशी नीति के लिए भयानक' करार दिया। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि वह अमेरिकी हैं, शायद इसीलिए पोप बन पाए और उन्होंने इसके लिए खुद श्रेय लेने की कोशिश भी की। राष्ट्रपति ने पोप को 'राजनेता' न बनने और 'कॉमन सेंस' इस्तेमाल करने की सलाह दी, साथ ही उन पर कट्टर वामपंथियों को खुश करने का आरोप लगाया।
वेटिकन और व्हाइट हाउस: दोस्ती और दुश्मनी का इतिहास
अमेरिका और वेटिकन सिटी के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध शुरू होने में एक सदी से अधिक का समय लगा था। इतिहास में ऐसे कई मौके आए जब दोनों के बीच तालमेल दिखा और कई बार टकराव भी। रोनाल्ड रीगन और पोप जॉन पॉल द्वितीय के बीच साम्यवाद के विरोध को लेकर गहरी मित्रता थी। वहीं, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और जॉन पॉल द्वितीय के बीच 2003 के इराक युद्ध को लेकर गहरे मतभेद थे, जिसे वेटिकन ने 'अन्यायपूर्ण' करार दिया था।
मौजूदा विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका की 20 प्रतिशत आबादी कैथोलिक है। बराक ओबामा और पोप फ्रांसिस ने 2014 में क्यूबा के साथ संबंधों को सुधारने में गुप्त रूप से बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन ट्रंप के मामले में स्थिति अलग है। ट्रंप का टकराव वर्तमान पोप के पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस से भी रहा है, जिन्होंने ट्रंप की आप्रवासन नीतियों के कारण उन्हें "ईसाई नहीं" तक कह दिया था।
पोप का पलटवार: 'मैं ट्रंप प्रशासन से नहीं डरता'
ट्रंप की तीखी टिप्पणियों और अपमानजनक लहजे के बावजूद पोप ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। ईरान युद्ध के साथ-साथ पोप ने जनवरी में वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के साथ हुए घटनाक्रम में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की भी निंदा की थी। ट्रंप के ताज़ा हमले के बाद रविवार को पोप ने दृढ़ता से कहा, "मुझे वर्तमान ट्रंप प्रशासन का कोई डर नहीं है।"
यह पहली बार है जब एक अमेरिकी राष्ट्रपति और पोप इस तरह सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे की आलोचना कर रहे हैं। यह स्थिति केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और कूटनीतिक रूप से भी वैश्विक स्तर पर बड़ी उथल-पुथल मचा सकती है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव और वेटिकन की शांति की अपील के बीच, वाशिंगटन और रोम के बीच की यह खाई अब और चौड़ी होती दिख रही है।
Next Story

