UAE ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, एयरपोर्ट डील की रद्द
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UAE ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, एयरपोर्ट डील की रद्द

भारत दौरे के तुरंत बाद अबु धाबी ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट चलाने का इरादा छोड़ा। पाकिस्तान को लगा बड़ा आर्थिक झटका। जानें क्या है वजह।


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UAE India Relations : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान हाल ही में भारत आए थे। उनकी इस सरप्राइज विजिट का असर अब दिखाई देने लगा है। इस यात्रा ने दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। इसका सीधा और गहरा झटका पाकिस्तान को लगा है। भारत के तीन घंटे के दौरे के तुरंत बाद UAE ने बड़ा फैसला लिया है। अबु धाबी ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चलाने की अपनी योजना रद्द कर दी है। इस समझौते पर अगस्त 2025 से बातचीत चल रही थी। यह खबर पाकिस्तान के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। एक तरफ भारत और UAE के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने पुराने दोस्तों का भरोसा खो रहा है। यह घटनाक्रम कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।



पाकिस्तान के हाथ से निकली बड़ी डील
पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने इस खबर की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ खींच लिए हैं। अबु धाबी ने इस परियोजना में रुचि खो दी है। वे संचालन को आउटसोर्स करने के लिए कोई स्थानीय भागीदार भी नहीं खोज पाए। इसलिए यह योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया ने इसे किसी राजनीतिक कारण से नहीं जोड़ा है। लेकिन इसका समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह फैसला तब आया है जब UAE के राष्ट्रपति भारत दौरा करके लौटे हैं।

सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ती दूरी
यह फैसला ऐसे समय आया है जब खाड़ी देशों में तनाव है। कभी सबसे करीबी दोस्त रहे UAE और सऊदी अरब के बीच दरार बढ़ रही है। रियाद और अबु धाबी यमन में प्रतिद्वंद्वी समूहों का समर्थन कर रहे हैं। इनके बीच सार्वजनिक टकराव भी देखने को मिल रहा है। इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान अब सऊदी अरब और तुर्की के साथ जा रहा है। वे मिलकर एक "इस्लामिक नाटो" बनाना चाहते हैं। इस्लामाबाद ने रियाद के साथ रक्षा समझौता भी किया है।

भारत बना UAE का नया रक्षा भागीदार
समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब पाकिस्तान की सैन्य जानकारी पर भरोसा कर रहा है। वहीं, UAE ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते किए हैं। भारत और UAE के बीच रिश्ते अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। यह रिश्ता अब रणनीतिक और रक्षा सहयोग की ओर बढ़ रहा है। पाकिस्तान के लिए यह चिंता का विषय है। उसका पुराना सहयोगी अब भारत के करीब जा रहा है।

पाकिस्तान पर से उठा भरोसा
करीब 4 दशक पहले UAE पाकिस्तान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। हजारों पाकिस्तानी वहां काम करते थे और पैसे भेजते थे। दोनों देशों ने रक्षा और ऊर्जा में भी सहयोग किया था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। सुरक्षा चिंताओं और लाइसेंस विवादों ने रिश्तों को खराब किया है। पाकिस्तान का पुराना बुनियादी ढांचा भी एक बड़ी समस्या है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, खराब शासन से पाकिस्तान को भारी नुकसान हो रहा है। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण सरकारी कंपनियां डूब रही हैं। पिछले साल इस्लामाबाद ने अपनी एयरलाइन PIA का निजीकरण किया था।

अफगानिस्तान का अनुभव भी नहीं आया काम
UAE के पास मुश्किल जगहों पर एयरपोर्ट चलाने का अनुभव है। उन्होंने अफगानिस्तान में भी एयरपोर्ट का प्रबंधन संभाला है। इसके बावजूद, इस्लामाबाद एयरपोर्ट से पीछे हटना बड़ी बात है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान पर उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह पाकिस्तान की गिरती साख का प्रमाण है। निवेशक अब वहां पैसा लगाने से डर रहे हैं।

भारत को मिला बड़ा तोहफा
इसके विपरीत, भारत के साथ UAE की दोस्ती नई ऊंचाई पर है। दिल्ली दौरे के बाद UAE ने बड़ा सद्भावना संकेत दिया है। राष्ट्रपति ने 900 भारतीय कैदियों को रिहा करने की मंजूरी दी है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति नाहयान ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की है। दोनों ने माना कि यह साझेदारी अब परिपक्व हो चुकी है। यह अब एक महत्वाकांक्षी चरण में प्रवेश कर रही है।

रक्षा सहयोग का नया खाका तैयार
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान भविष्य का खाका है। यह एक दीर्घकालिक भू-राजनीतिक गठबंधन की ओर इशारा करता है। सबसे बड़ा राजनीतिक परिणाम रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर फैसला है। यात्रा के दौरान एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर किए गए। यह रक्षा सहयोग पर एक रूपरेखा समझौते का रास्ता साफ करेगा। यानी आने वाले दिनों में भारत और UAE रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। यह पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी हार है।


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