ईरान में फंसा अमेरिकी एयरमैन कैसे लौटा? जानें कदम-दर-कदम कहानी
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ईरान में फंसे अमेरिकी सैनिक का संघर्ष और बचाव (फाइल फोटो)

ईरान में फंसा अमेरिकी एयरमैन कैसे लौटा? जानें कदम-दर-कदम कहानी

ईरान के अंदर से एक विशेष अभियान टास्क फोर्स द्वारा अमेरिकी एयरमैन को कैसे बचाया गया, यह घटनाक्रम किसी 'टॉप गन' फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। पूरी बात यहां जानें


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ईरान के दुर्गम इलाकों के बीच से एक अमेरिकी एयरमैन को सुरक्षित निकालने का हालिया अभियान किसी हॉलीवुड की 'टॉप गन' फिल्म के रोमांचक दृश्य से कम नहीं रहा। यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब 3 अप्रैल को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के आसमान में अमेरिका का एक दो इंजनों वाला F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया गया। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होते ही अमेरिकी रिकवरी टीमों ने फुर्ती दिखाते हुए मुख्य पायलट को तो तुरंत बचा लिया, लेकिन विमान के पिछले हिस्से में तैनात हथियार प्रणाली अधिकारी (WSO) लापता हो गया। वह कर्नल रैंक का अधिकारी ईरानी पहाड़ियों के ऊबड़-खाबड़ परिदृश्य में कहीं ओझल हो गया और दुश्मन की सीमा के भीतर एक 'भूत' की तरह अपनी जान बचाने की जद्दोजहद करने लगा।


दुनिया का सबसे कठिन बचाव अभियान

अगले 48 घंटों तक यह बचाव अभियान पूरी दुनिया के लिए एक सस्पेंस थ्रिलर बन गया। इस बीच, ईरानी सरकार ने इस खोज को एक टेलीविजन तमाशे में बदल दिया और अमेरिकी अधिकारी की गिरफ्तारी में मदद करने वाली किसी भी जानकारी के लिए 60,000 डॉलर के इनाम की घोषणा कर दी। ईरान ने स्थानीय नागरिकों से भी इस खोज अभियान में शामिल होने की अपील की ताकि एक बेशकीमती सैन्य संपत्ति को कब्जे में लिया जा सके। दूसरी ओर, वह अमेरिकी कर्नल अकेले ही इलाके और समय के खिलाफ युद्ध लड़ रहा था। वह पहले एक पहाड़ी दरार में छिपा और फिर ईरानी गश्ती दलों से बचने के लिए एक 7,000 फुट ऊंची पहाड़ी कगार पर चढ़ गया। महज एक हैंडगन और अपनी कड़ी ट्रेनिंग के भरोसे वह 24 घंटे से भी अधिक समय तक अपनी सेना की पहुंच से भी दूर रहा।


रहस्यमयी संदेश जिससे हिला व्हाइट हाउस

इस कठिन परीक्षा के दौरान अधिकारी ने अपने संचार उपकरण का उपयोग किया, लेकिन उसके द्वारा भेजे गए एक संदेश ने अमेरिकी खुफिया तंत्र में खलबली मचा दी। यह कोई मानक डिस्ट्रेस कोड या लोकेशन नहीं थी, बल्कि अधिकारी ने रेडियो पर कहा, "पावर बी टू गॉड" (ईश्वर की जय हो)। इस असामान्य संदेश ने वाशिंगटन के उच्च अधिकारियों को चिंता में डाल दिया। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं कर्नल को पकड़ तो नहीं लिया गया है और ईरानी सेना उसे बंदूक की नोक पर 'फर्जी संकेत' भेजने के लिए मजबूर कर रही है। बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि यह संदेश सुनकर उन्हें लगा था कि जैसे कोई मुस्लिम बोल रहा हो, लेकिन बाद में कर्नल के करीबियों ने स्पष्ट किया कि वह एक बेहद धार्मिक व्यक्ति थे, इसलिए मदद के लिए ईश्वर को पुकारना उनके स्वभाव के अनुकूल था।


सीआईए की तकनीक और नेवी सील का प्रहार

जैसे ही सीआईए ने अपनी अद्वितीय क्षमताओं के जरिए पहाड़ों में छिपे एयरमैन की सटीक लोकेशन का पता लगाया, व्हाइट हाउस को तुरंत सूचित किया गया। शनिवार की घनी रात के अंधेरे में नेवी सील टीम 6 के करीब 200 विशेष सैनिकों को ईरानी पहाड़ों के बीच उतारा गया। इन पेशेवरों ने बेहद खामोशी और सटीकता के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। दो दिनों की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बावजूद, टीम ने कर्नल को सुरक्षित हासिल किया और बिना किसी हताहत के वहां से निकल गए। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस मिशन की सराहना करते हुए इसे सैन्य इतिहास की एक दुर्लभ घटना बताया जहाँ दो पायलटों को दुश्मन के इलाके के इतने भीतर से अलग-अलग ऑपरेशनों में बचाया गया।


ट्रेनिंग की जीत और ईरान का खंडन

अधिकारी की इस सुरक्षित वापसी के पीछे उसके विशेष SERE (उत्तरजीविता, बचाव, प्रतिरोध और पलायन) प्रशिक्षण की बड़ी भूमिका रही, जो पायलटों को दुश्मन के इलाके में पकड़े जाने से बचने और विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने के गुर सिखाता है। हालांकि, जहां वाशिंगटन इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मना रहा है, वहीं ईरान ने इस पूरी कहानी को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने इसे 'कोरी कल्पना' और 'धोखाधड़ी' करार देते हुए दावा किया कि अमेरिकी ऑपरेशन को उनकी सेना ने पूरी तरह विफल कर दिया था। जोलफाघरी ने राष्ट्रपति ट्रम्प पर खाली बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत ईरान की सशस्त्र बलों की श्रेष्ठता को साबित करती है।

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