
ईरान मुद्दे पर आमने-सामने अमेरिका-चीन, होर्मुज़ नाकाबंदी से बढ़ा तनाव
होर्मुज़ स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी से चीन-अमेरिका में तनाव बढ़ गया है। चीन ने हस्तक्षेप से बचने और क्षेत्र में सीजफायर की मांग की।
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच चीन और अमेरिका आमने-सामने नजर आ रहे हैं। चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट पर नाकाबंदी न करे और चीन-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों में हस्तक्षेप से बचे।
चीन की सख्त चेतावनी
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी के समय ही प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के ईरान के साथ महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट चीन के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चीन के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट का महत्व
होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, और चीन के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद अधिक है।चीन को लगभग 40% तेल इसी मार्ग से मिलता है। करीब 30% LNG जरूरतें भी इसी रास्ते से पूरी होती हैं। इसी कारण चीन इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने के लिए संघर्ष विराम (ceasefire) पर जोर दे रहा है।
पेट्रोडॉलर बनाम युआन की बहस
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह नाकाबंदी केवल सैन्य कदम नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति भी हो सकती है।उनके अनुसार, इसका लक्ष्य चीनी युआन को सीमित करना हो सकता है, जिसका उपयोग कुछ जहाज़ इस क्षेत्र में व्यापार के लिए कर रहे हैं।यह कदम दशकों पुरानी पेट्रोडॉलर व्यवस्था को चुनौती देने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के प्रयासों से जुड़ा माना जा रहा है।
चीन का सीजफायर समर्थन
चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर संघर्ष विराम का समर्थन किया है। प्रवक्ता गुओ जियाकुन के अनुसार, होर्मुज़ स्ट्रेट में बाधा का मूल कारण ईरान से जुड़ा संघर्ष है, और इसका समाधान केवल जल्द से जल्द युद्धविराम और तनाव खत्म करने में है।चीन ने यह भी संकेत दिया है कि वह मिडिल-ईस्ट में शांति बहाल करने में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
ट्रंप का नाकाबंदी ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए ईरानी बंदरगाहों तक समुद्री पहुंच को अवरुद्ध करेगी।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी। इसे सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि, गैर-ईरानी गंतव्यों के लिए सामान्य पारगमन को बाधित नहीं किया जाएगा
ईरान मुद्दे पर अमेरिका बनाम चीन
ईरान से जुड़े संघर्ष को लेकर चीन और अमेरिका के बीच गहरे मतभेद हैं।चीन ने ईरान पर इज़रायल-अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है।चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इसे संप्रभुता के खिलाफ बताया। वहीं, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि चीन ईरान के साथ ऐसे संबंध बढ़ाता है जो अमेरिकी हितों के खिलाफ हों, तो इससे गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
बढ़ता व्यापार और सैन्य तनाव
Donald Trump ने चीन को यह भी चेतावनी दी है कि अगर वह ईरान को हथियार सप्लाई करता है, तो उस पर 50% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।हालांकि, चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताया है। होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर यह टकराव केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बनता जा रहा है।एक ओर अमेरिका की सैन्य और आर्थिक रणनीति है, तो दूसरी ओर चीन अपने ऊर्जा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय है। इस बीच, संघर्ष विराम की मांगें भी तेज हो रही हैं, लेकिन वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ती दूरी इस संकट को और जटिल बना रही है।

