
इन 3 शर्तों पर अटकी बात और खटाई में पड़ी शांति वार्ता, जेडी वेंस रवाना
जिन 3 मुख्य बातों पर अमेरिका-ईरान शांति वार्ता अपने सकारात्मक परिणाम पर नहीं पहुंच सकी, वे क्या हैं, यहां जानें...
इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही 15 घंटे की मैराथन बैठक बिना किसी समझौते के टूट गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस विफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि ईरान ने अमेरिका की 'रेड लाइन्स' और शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। बैठक बेनतीजा रहने के बाद वेंस और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन के लिए रवाना हो गया गए...
वे 3 बड़ी शर्तें जिन पर फंसा पेंच
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के विफल होने के पीछे अमेरिका की तीन प्रमुख शर्तें थीं, जिन्हें ईरान ने स्वीकार नहीं किया। ये ३ शर्तें इस प्रकार हैं...
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: अमेरिका की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त ईरान के यूरेनियम संवर्धन और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नियंत्रित करने की थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait): अमेरिका चाहता था कि इस जलमार्ग में शिपिंग और जहाजों की आवाजाही वैसी ही बहाल हो, जैसी 28 फरवरी से पहले की स्थिति में थी।
हिजबुल्लाह और इजरायल: अमेरिका ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के सैन्य अभियान को जारी रखने या उस पर ईरान के हस्तक्षेप को रोकने की शर्त रखी थी।
"हमने अपनी रेड लाइन्स साफ कर दी थीं": जेडी वेंस
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे किन बातों पर समझौता कर सकते हैं और किन पर नहीं। वेंस ने कहा, "हमने अपनी शर्तें जितनी स्पष्ट हो सकती थीं, उतनी बता दी थीं। लेकिन ईरान ने उन्हें नहीं मानने का फैसला किया। इसलिए अब हम वापस जा रहे हैं।"
ईरान का पलटवार: "अमेरिका ने आखिरी वक्त पर बढ़ाई मांगें"
दूसरी ओर ईरान ने इस विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार...
बातचीत एक ऐसे स्तर पर पहुंच गई थी, जहां दोनों पक्ष एक साझा फ्रेमवर्क (Shared Framework) के लिए दस्तावेजों (Text) का आदान-प्रदान कर रहे थे। ईरानी पक्ष का आरोप है कि ठीक इसी चरण में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने बार-बार अपनी मांगें बढ़ा दीं और नई शर्तें जोड़ दीं, जिससे पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई।
इसी सप्ताह की शुरुआत में हुए युद्धविराम के बाद यह पहली बड़ी उम्मीद थी, जो अब खत्म होती नजर आ रही है। जेडी वेंस की पाकिस्तान से रवानगी के बाद अब मिडल ईस्ट में एक बार फिर अनिश्चितता और तनाव बढ़ने की आशंका है।

