
दूसरे दिन भी जारी है महामंथन, क्या थमेगी मिडल ईस्ट की जंग?
14 घंटे का मैराथन संवाद और दस्तावेजों का आदान-प्रदान शनिवार को शुरू हुई बातचीत का पहला दौर बेहद तनावपूर्ण और लंबा रहा, जो लगभग 14 घंटों तक चला...
पश्चिम एशिया में दशकों से चले आ रहे तनाव और हालिया युद्ध के बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस समय दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक धुरी बन गई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चल रही उच्चस्तरीय वार्ता का आज, रविवार को दूसरा दिन है। कूटनीतिक गलियारों में इस बैठक को 'सफलता की आखिरी उम्मीद' के तौर पर देखा जा रहा है।
14 घंटे का मैराथन संवाद और दस्तावेजों का आदान-प्रदान
शनिवार को शुरू हुई बातचीत का पहला दौर बेहद तनावपूर्ण और लंबा रहा, जो लगभग 14 घंटों तक चला। पाकिस्तान की मेजबानी में हुई इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कई कड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। सूत्र बताते हैं कि आमने-सामने की बैठक समाप्त होने के बाद, प्रतिनिधिमंडलों ने एक-दूसरे को लिखित दस्तावेज (Written Documents) सौंपे हैं।
ईरान की सरकार ने रविवार सुबह 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा की कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में चली यह चर्चा अब अगले चरण में पहुंच गई है। फिलहाल दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें इन दस्तावेजों और विशेषज्ञ मसौदों की जांच कर रही हैं। मतभेदों के बावजूद, दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर टिके रहने के लिए सहमत हुए हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण और विवादित मुद्दा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Hormuz Strait) बना हुआ है।
ईरान का रुख: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इस जलमार्ग को 'प्रबंधित' करने का अधिकार रखती है। ईरानी टीवी के अनुसार, IRGC ने धमकी दी है कि यदि कोई भी अमेरिकी सैन्य जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करता है, तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।
अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा संदेश दिया है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस जलमार्ग को हर हाल में खुला रखेगा। यह तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने समुद्री माइंस हटाने के लिए वहां युद्धपोत भेजे।
इसके अलावा, बैठक का मुख्य फोकस 8 अप्रैल को हुए सीजफायर को मजबूत करना और लेबनान में जारी हिंसा को पूरी तरह समाप्त करना है।
आमने-सामने की टक्कर: दिग्गज प्रतिनिधिमंडल
इस बातचीत की गंभीरता को इसमें शामिल चेहरों से समझा जा सकता है...
अमेरिकी डेलीगेशन: इसकी कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हाथों में है। उनके साथ ट्रंप के बेहद करीबी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं, जो मिडल ईस्ट की राजनीति के पुराने खिलाड़ी माने जाते हैं।
ईरानी डेलीगेशन: नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद हैं, जो ईरान की विदेश नीति के मुख्य रणनीतिकार हैं।
नेतन्याहू का बड़ा दावा और कड़ा रुख
वार्ता के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक विस्फोटक बयान देकर हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियानों ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को 'कुचल' दिया है। नेतन्याहू ने शनिवार को कहा:
"हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां ईरान के पास अब एक भी चालू संवर्धन सुविधा (Enrichment Facility) नहीं बची है।"
नेतन्याहू ने 'X' पर यह भी साफ कर दिया कि उनका देश ईरान के शासन और उसके प्रॉक्सी संगठनों (हमास, हिजबुल्लाह आदि) के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन पर भी ईरान को पनाह देने के गंभीर आरोप लगाए। इसी बीच, पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नेतन्याहू ने पिछले तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर ईरान पर हमले का दबाव बनाया था, लेकिन सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप ही इसके लिए तैयार हुए।
वैश्विक जगत की प्रतिक्रियाएं
इस्लामाबाद में हो रही इस हलचल पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं...
संयुक्त राष्ट्र (UN): महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे 'कूटनीतिक अवसर' बताया है और दोनों पक्षों से सद्भावना के साथ समझौते की अपील की है।
फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर इस मौके का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा के लिए यह वार्ता निर्णायक साबित होनी चाहिए।
पाकिस्तान: मेजबान देश की ओर से बिलावल भुट्टो जरदारी ने इसे दुनिया के लिए 'अनिवार्य' बताते हुए कहा कि अब 'प्लान-बी' की कोई गुंजाइश नहीं है। शांति ही एकमात्र विकल्प है।
आज रविवार को विशेषज्ञ स्तर की वार्ता जारी है, जिसमें तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। अगर आज की चर्चा सकारात्मक रहती है, तो यह वार्ता कल सोमवार को भी जारी रह सकती है। दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या इस्लामाबाद से शांति का कोई आधिकारिक श्वेत पत्र जारी होगा या नहीं।

