शांति वार्ता फेल, कैसा रहेगा बाजार का हाल, कितना उछलेंगी तेल की कीमतें
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प्रतीकात्मक चित्र

शांति वार्ता फेल, कैसा रहेगा बाजार का हाल, कितना उछलेंगी तेल की कीमतें

बीते सप्ताह सीजफायर की उम्मीदों के दम पर शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक रही थी। पिछले पांच कारोबारी दिनों में बीएसई (BSE) का सेंसेक्स करीब 4,745 अंक और...


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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा खत्म होने का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिख रहा है। दो हफ्तों के सीजफायर के बाद बाजार में जो राहत दिखी थी, वह अब फिर से खौफ में बदल सकती है। सोमवार को जब शेयर बाजार खुलेंगे तो निवेशकों की नजरें मध्य पूर्व के इस नए कूटनीतिक गतिरोध पर टिकी होंगी।

शेयर बाजार के लिए 'रेड सिग्नल'

बीते सप्ताह सीजफायर की उम्मीदों के दम पर शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक रही थी। पिछले पांच कारोबारी दिनों में बीएसई (BSE) का सेंसेक्स करीब 4,745 अंक और एनएसई (NSE) का निफ्टी 1,450 अंक चढ़ा था। शुक्रवार को सेंसेक्स 77,550 और निफ्टी 24,050 के स्तर पर बंद हुए थे। लेकिन वार्ता विफल होने के बाद अब सोमवार को बाजार में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

कच्चे तेल में फिर लग सकती है 'आग'

वार्ता टूटने का सबसे बड़ा और तात्कालिक असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ सकता है।

वर्तमान स्थिति: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 95.20 डॉलर, WTI क्रूड 96.57 डॉलर और मर्बन क्रूड 98.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के न खुलने और तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर के पार जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया भर में तेल-गैस संकट गहरा जाएगा और महंगाई का जोखिम बढ़ जाएगा।

ट्रंप की रणनीति और जेडी वेंस की चेतावनी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत विफल होने के बाद इसे ईरान के लिए 'बुरी खबर' करार दिया है। वेंस ने साफ लहजे में कहा, "चाहे कुछ भी हो, जीत हमारी ही है।" अब पूरी दुनिया की नजरें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर हैं। ट्रंप ने पहले ही ईरान को हथियारों की सप्लाई करने वाले देशों पर 'टैरिफ अटैक' की धमकी दी है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उनका रुख बेहद सख्त बना हुआ है।

21 घंटे की चर्चा और बढ़ता गतिरोध

21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बाद ईरान ने भी अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका उनकी शर्तें मानने को तैयार नहीं है। महीनों के युद्ध और फिर दो हफ्तों के सीजफायर के बाद बनी इस 'नाजुक शांति' के टूटने से अब वैश्विक कूटनीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गई है।


ईरान का सख्त रुख: "जो जंग से नहीं मिला, वो बातचीत से चाहते हैं"

घाना में स्थित ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति साफ की है। दूतावास ने दावा किया कि तेहरान ने अमेरिका की मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने वॉशिंगटन पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका असल में बातचीत से पीछे हटने के लिए "बहाने ढूंढ रहा है"। पोस्ट में आगे कहा गया कि अमेरिका टेबल पर ऐसी रियायतें हासिल करना चाहता है, जिन्हें वह "जंग के मैदान में हासिल करने में नाकाम रहा"।

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