इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता अटकी, तेहरान ने लेबनान युद्धविराम की रखी शर्त
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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले बढ़ाए गए सुरक्षा इंतज़ामों के बीच सुरक्षाकर्मी एक बैरिकेड पर यात्रियों की जांच करते हुए। फोटो: PTI

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता अटकी, तेहरान ने लेबनान युद्धविराम की रखी शर्त

तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान युद्धविराम से जुड़े अपने वादों को पूरा नहीं करता और इज़राइल हमले बंद नहीं करता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। इससे पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली इस कूटनीतिक बैठक पर संशय गहरा गया है।


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पाकिस्तान की मेजबानी में इस्लामाबाद में होने वाली बहुप्रतीक्षित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही मुश्किलों में फंस गई है। शुक्रवार (18 अप्रैल) को प्रस्तावित इस बैठक से पहले तेहरान ने उन दावों को खारिज कर दिया है कि उसका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी पहुंच चुका है। साथ ही उसने साफ किया है कि जब तक इज़राइल लेबनान पर हमले बंद नहीं करता, तब तक वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।

शुरुआत से पहले ही अनिश्चितता

ईरान की फर्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने वार्ता को तब तक के लिए स्थगित कर दिया है जब तक अमेरिका लेबनान में युद्धविराम से जुड़े अपने वादों को स्वीकार नहीं करता।

रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया,“कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा यह दावा कि ईरानी वार्ता प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है, पूरी तरह गलत है।”

आगे कहा गया,“जब तक अमेरिका लेबनान युद्धविराम के संबंध में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता और इज़राइल हमले बंद नहीं करता, तब तक वार्ता स्थगित रहेगी।”

प्रतिनिधिमंडल को लेकर असमंजस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि ईरानी संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। गालिबाफ ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर भी रह चुके हैं।

हालांकि, अमेरिका ने बैठक में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर भी होंगे।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका

इस बीच, पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किए जाने से वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। अमेरिका और ईरान दोनों के साथ पाकिस्तान के संबंध उसे मध्यस्थ की भूमिका निभाने में मदद कर रहे हैं।

बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच सामने आया है। 28 फरवरी को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इज़राइल के हमलों में मौत हो गई थी।

इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों और इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।

इसके बाद ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के शामिल होने से संघर्ष और बढ़ गया, जिसके चलते इज़राइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए।

नाज़ुक विराम और अनिश्चित भविष्य

तेजी से बढ़ते इस संघर्ष ने तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत पैदा कर दी है, जिसके चलते पाकिस्तान जैसे देश स्थिति को काबू में रखने के लिए आगे आए हैं।

हालांकि फिलहाल युद्धविराम से सीधे सैन्य टकराव पर रोक लगी है, लेकिन इसकी स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी संभव होगी जब अमेरिका अपने वादों को पूरा करेगा और लेबनान की स्थिति में सुधार होगा।

इस समय अमेरिका बातचीत आगे बढ़ाने को तैयार दिख रहा है, लेकिन ईरान की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता अभी भी असमंजस में है और इसकी दिशा स्पष्ट नहीं है।

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