
ट्रंप की ईरान को आखिरी चेतावनी: समझौता करो वरना 10 दिन में होगा अंजाम
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर। मिडिल ईस्ट में अमेरिका का भारी सैन्य जमावड़ा, 2 विमान वाहक पोत तैनात। ट्रंप ने दी 10 दिन की चेतावनी। क्या इस वीकेंड होगा हमला?
Iran USA Tension : मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसे एक "सार्थक" समझौता (Meaningful Deal) करना ही होगा, वरना अमेरिका सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप ने धमकी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका को इस मामले को "आगे तक ले जाना पड़ सकता है" और अगले 10 दिनों के भीतर दुनिया को इसका परिणाम पता चल जाएगा। "बोर्ड ऑफ पीस" की उद्घाटन बैठक के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि सार्थक समझौता नहीं हुआ, तो "बुरी चीजें" होंगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ओमान की मध्यस्थता में चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत के बावजूद जमीन पर तनाव चरम पर है।
क्या इस हफ्ते के अंत में होगा ईरान पर हमला?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। CNN और CBS की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना इस हफ्ते के अंत तक स्ट्राइक (Strike) लॉन्च करने के लिए तैयार हो सकती है। व्हाइट हाउस को सैन्य तैयारियों की ब्रीफिंग दी जा चुकी है, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी इस विकल्प पर अंतिम मुहर लगाने को लेकर विचार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को ऐसे सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग दी गई है जिनका उद्देश्य "अधिकतम नुकसान" पहुंचाना है। इसमें ईरानी राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाकर सरकार को उखाड़ फेंकने तक की योजना शामिल हो सकती है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका की अभूतपूर्व सैन्य घेराबंदी
अमेरिका ने ईरान के चारों ओर सैन्य शक्तियों का एक विशाल किला खड़ा कर दिया है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 13 युद्धपोत तैनात हैं, जिनमें 'USS अब्राहम लिंकन' विमान वाहक पोत, नौ विध्वंसक (Destroyers) और तीन तटीय लड़ाकू जहाज शामिल हैं। इसके अलावा, दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक पोत 'USS जेराल्ड आर. फोर्ड' भी तीन विध्वंसक जहाजों के साथ मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। यह बहुत दुर्लभ है कि एक साथ दो अमेरिकी विमान वाहक पोत इस क्षेत्र में तैनात हों। साथ ही, F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर जेट्स, F-15 और F-16 विमानों का एक बड़ा बेड़ा भी क्षेत्र में पहुंच चुका है।
ईरान का रुख: "हम झुकेंगे नहीं"
अमेरिकी दबाव और सैन्य जमावड़े के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन वह अमेरिकी मांगों के आगे घुटने भी नहीं टेकेगा। पेजेशकियान ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका अपनी इच्छा थोपने और ईरान को अपमानित करने की कोशिश करेगा, तो क्या उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए? ईरान का यह बयान साफ करता है कि राजनयिक बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो रहे हैं और दोनों देश टकराव की स्थिति में आमने-सामने खड़े हैं।
चागोस द्वीप समूह और डिएगो गार्सिया का रणनीतिक महत्व
ट्रंप ने ब्रिटेन को भी चेतावनी दी है कि वह हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता न छोड़े। ट्रंप का मानना है कि डिएगो गार्सिया एयरबेस ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित हमले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि यदि ईरान समझौता नहीं करता है, तो इस खतरनाक शासन के हमले को जड़ से मिटाने के लिए इस रणनीतिक अड्डे की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर, अगले 10 दिन न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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