ईरान युद्ध पर अमेरिका-इज़राइल में मतभेद? ट्रंप को ‘एग्जिट’ सलाह
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ईरान युद्ध पर अमेरिका-इज़राइल में मतभेद? ट्रंप को ‘एग्जिट’ सलाह

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इज़राइल की रणनीति में मतभेद उभर रहे हैं। इजराइली मीडिया के मुताबिक ट्रंप को जीत घोषित कर बाहर निकलने की सलाह दी गई है।


ईरान के साथ जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अब अमेरिका और इज़राइल की रणनीति को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। इज़राइली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकारों ने उन्हें सुझाव दिया है कि वे ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत की बात करना शुरू करें, ताकि संघर्ष से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता बनाया जा सके।

हालांकि यह सुझाव इज़राइल को शायद ही पसंद आए, क्योंकि वहां के कई अधिकारी मानते हैं कि ईरान पर दबाव और सैन्य कार्रवाई को और अधिक तेज करने की जरूरत है। यही कारण है कि इस युद्ध को लेकर अमेरिका और इज़राइल के बीच रणनीतिक मतभेद धीरे-धीरे सामने आते दिखाई दे रहे हैं।

इज़राइल चाहता है और सख्त कार्रवाई

इज़राइली सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिष्ठान लंबे समय से ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं। इज़राइल का आरोप है कि ईरान न केवल परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि क्षेत्र में उसके विरोधी समूहों को भी समर्थन देता है। इसी वजह से इज़राइल के कई नेता यह मानते हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का मौका मिलने पर उसे पूरी ताकत से अंजाम दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर अभी दबाव कम किया गया, तो ईरान दोबारा अपनी ताकत बढ़ा सकता है।

ट्रंप को ‘विजय’ घोषित करने की सलाह

इज़राइली मीडिया में आई खबरों के अनुसार, ट्रंप के कुछ सलाहकारों का मानना है कि युद्ध को लंबा खींचना अमेरिका के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए उन्हें सुझाव दिया गया है कि वे सार्वजनिक रूप से यह कहना शुरू करें कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर लिया है।

ऐसा करने से अमेरिका को युद्ध से धीरे-धीरे बाहर निकलने का रास्ता मिल सकता है। कूटनीतिक भाषा में इसे “एग्जिट नैरेटिव” तैयार करना कहा जाता है—यानी ऐसा माहौल बनाना कि पीछे हटना भी जीत जैसा लगे। लेकिन यह रणनीति इज़राइल के लिए असहज हो सकती है, क्योंकि वहां के कई नीति निर्माता अभी युद्ध को खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं।

कुशनर और विटकॉफ का दौरा रद्द

इन संभावित मतभेदों की एक झलक उस समय भी देखने को मिली, जब जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ का प्रस्तावित दौरा अचानक रद्द कर दिया गया। दौरे के रद्द होने के पीछे कोई आधिकारिक या सार्वजनिक कारण नहीं बताया गया। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल के बीच युद्ध को लेकर रणनीतिक मतभेद इस फैसले की एक वजह हो सकते हैं।

कुशनर, जो पहले भी मध्य पूर्व की कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, और विटकॉफ की यात्रा से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को मजबूत किया जाएगा। लेकिन उनका दौरा रद्द होना यह संकेत देता है कि पर्दे के पीछे कुछ असहमति जरूर चल रही है।

नेतन्याहू का लंबा इंतज़ार

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति की तलाश में थे जो ईरान के खिलाफ कठोर रुख अपनाने को तैयार हो।दशकों से नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। कई बार उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इज़राइल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इसी वजह से माना जाता है कि नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से ट्रंप से अलग रुख अपनाने से बचेंगे। दोनों देशों के रिश्ते बेहद करीबी हैं और इज़राइल अमेरिकी समर्थन पर काफी हद तक निर्भर भी करता है।

बंद दरवाजों के पीछे तेज लॉबिंग

हालांकि सार्वजनिक मंचों पर मतभेद कम दिखाई देते हैं, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार बंद दरवाजों के पीछे दोनों पक्षों के बीच काफी लॉबिंग और बातचीत चल रही है। इज़राइल चाहता है कि अमेरिका युद्ध में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाए और ईरान पर दबाव बनाए रखे। वहीं अमेरिका के भीतर यह चिंता भी है कि लंबा युद्ध आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

शुरू से अलग रहे दोनों देशों के लक्ष्य

विश्लेषकों का कहना है कि इस युद्ध में अमेरिका और इज़राइल के रणनीतिक लक्ष्य शुरू से ही पूरी तरह समान नहीं थे।इज़राइल का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करना है। दूसरी ओर अमेरिका के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और अपने व्यापक रणनीतिक हितों की रक्षा करना है। इसी वजह से दोनों देशों की रणनीति में अंतर दिखना स्वाभाविक माना जा रहा है।

इज़राइली मीडिया में उलझन

इज़राइल के कई मीडिया संस्थानों ने ट्रंप के हालिया बयानों को उलझन भरा बताया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के बयान कभी कठोर और आक्रामक लगते हैं, तो कभी वे पीछे हटने के संकेत देते दिखाई देते हैं।कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ट्रंप के सलाहकारों ने उन्हें बताया है कि युद्ध उस तरह आगे नहीं बढ़ रहा जैसा शुरुआती अनुमान था।

जल्दी जीत की उम्मीद पूरी नहीं हुई

अमेरिकी प्रशासन को शुरुआत में उम्मीद थी कि ईरान पर सैन्य और राजनीतिक दबाव डालकर उसे जल्दी झुकाया जा सकेगा। लेकिन हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं बदले। ईरान ने भी कड़ा प्रतिरोध दिखाया है और क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। इससे युद्ध लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है। यही वजह है कि अब अमेरिकी रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आगे की राह क्या होनी चाहिए।

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