लारिजानी मर्डर से पार्स गैस फील्ड अटैक तक, क्या है अमेरिका-इज़राइल गेम ?
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लारिजानी मर्डर से पार्स गैस फील्ड अटैक तक, क्या है अमेरिका-इज़राइल गेम ?

ईरान पर हमलों के बीच इजरायल के फैसलों और ट्रंप की प्रतिक्रिया ने US-इजरायल रिश्तों पर सवाल खड़े किए, क्या यह मतभेद है या रणनीतिक खेल?


अमेरिका और इजरायल की दोस्ती दुनिया की सबसे पुरानी और मजबूत साझेदारियों में गिनी जाती है। जब भी इजरायल पर कोई संकट आया, अमेरिका हर बार उसके साथ खड़ा रहा चाहे सत्ता में रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट। हाल ही में भी दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर हमले किए। जून 2025 में और फिर 28 फरवरी 2026 को। यानी साफ है कि दोनों एक साथ मोर्चे पर हैं। लेकिन पिछले तीन हफ्तों में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इस रिश्ते को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

इजरायल के फैसले, अमेरिका की नाराज़गी?

इन घटनाओं में सबसे बड़ी थी ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की हत्या। लारीजानी ईरान के नेशनल सिक्योरिटी चीफ थे और उन गिने-चुने नेताओं में शामिल थे जो बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने के पक्ष में थे। उनकी हत्या का मतलब है डिप्लोमैटिक रास्तों का एक बड़ा दरवाजा बंद हो जाना।

साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला

दूसरी बड़ी घटना थी ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड में आग लगना। यह सिर्फ एक गैस फील्ड नहीं, बल्कि ईरान की ऊर्जा रीढ़ है,यहीं से देश की बिजली और आम लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस हमले की जानकारी मिली, तो वे हैरान रह गए। लेकिन इसके बावजूद इजरायल ने हमला किया। इसका सीधा असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ा।

ईरान का जवाब: सटीक और आक्रामक

इजरायल के इन हमलों के बाद ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने कड़ा जवाब दिया। UAE, कतर और सऊदी अरब में पांच जगहों को निशाना बनाया गया।हमले इतने सटीक बताए गए कि उन्हें “पिन से गुब्बारे फोड़ने” जैसा कहा गया—यानी ईरान ने साफ संदेश दिया कि उसकी सैन्य क्षमता अभी भी बरकरार है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया: अनजान या रणनीति?

इस पूरे मामले पर डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी चौंकाने वाली रही। उन्होंने कहा, “मुझे कुछ पता नहीं था, इजरायल ने बिना बताए यह किया।” यहां तक कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर नेतन्याहू को फटकार भी लगाई।हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स यह भी कहती हैं कि ट्रंप को पहले से जानकारी थी। ऐसे में सवाल उठता है—क्या यह नाराज़गी असली थी या सिर्फ दिखावा?

‘गुड कॉप-बैड कॉप’ गेम?

यहीं से एक दिलचस्प थ्योरी सामने आती है—“गुड कॉप, बैड कॉप” रणनीति। जैसा फिल्मों में होता है—एक सख्त पुलिस वाला (बैड कॉप) दबाव बनाता है, जबकि दूसरा नरम (गुड कॉप) सहानुभूति दिखाता है। यहां इजरायल “बैड कॉप” की भूमिका में है—हमले कर रहा है, बातचीत के रास्ते बंद कर रहा है। वहीं ट्रंप “गुड कॉप” बनकर सामने आते हैं—जो कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं था।यह पहली बार नहीं हैऐसा पहले भी हो चुका है। अक्टूबर 2025 में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाया, लेकिन गलती से पांच निर्दोष लोग मारे गए।तब भी ट्रंप ने अनभिज्ञता जताई और बाद में व्हाइट हाउस में एक प्रतीकात्मक माफी का नाटक हुआ—जहां नेतन्याहू ने कतर के प्रधानमंत्री से माफी मांगी। मामला वहीं शांत हो गया।

असली खेल क्या है?

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए तीनों देशों के मकसद समझना जरूरी है:

ईरान: किसी भी तरह अपनी सुरक्षा और अस्तित्व बनाए रखना

अमेरिका: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना

इजरायल: ईरान को इतना कमजोर करना कि वह भविष्य में खतरा न बन सके—चाहे उसकी सेना हो, मिसाइलें हों या सरकार

इजरायल की रणनीति साफ दिखती है। वह नहीं चाहता कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो। इसके लिए वह लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जो बातचीत के रास्ते बंद करें और तनाव को बढ़ाएं। ऊपर से देखने पर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद नजर आ सकते हैं, लेकिन गहराई में यह एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है।

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