ईरान युद्ध पर घर में घिरे डोनाल्ड ट्रंप, डेमोक्रेट्स बोले— नहीं दिख रहा अंत
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ईरान युद्ध पर घर में घिरे डोनाल्ड ट्रंप, डेमोक्रेट्स बोले— नहीं दिख रहा अंत

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद तेज है। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन से युद्ध की रणनीति और उद्देश्य स्पष्ट करने के लिए सीनेट में सार्वजनिक सुनवाई की मांग की है।


अमेरिका में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इस युद्ध पर सार्वजनिक सुनवाई की मांग की है। यह मांग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से कई गोपनीय ब्रीफिंग मिलने के बाद उठाई गई है। सांसदों का कहना है कि व्हाइट हाउस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि अमेरिका इस युद्ध में क्यों शामिल हुआ, इसके रणनीतिक लक्ष्य क्या हैं और यह संघर्ष कितने समय तक चल सकता है।

फिलहाल सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का मामूली बहुमत है, जिसके कारण वही यह तय करती है कि सदन में किन मुद्दों पर चर्चा होगी। ऐसे में डेमोक्रेट्स की मांग के बावजूद इस विषय पर औपचारिक बहस होना आसान नहीं माना जा रहा।

गोपनीय ब्रीफिंग के बाद बढ़ी नाराजगी

हाल ही में हुई बंद कमरे की ब्रीफिंग के बाद कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन ने युद्ध की स्पष्ट रणनीति, समयसीमा या अंतिम लक्ष्य के बारे में ठोस जानकारी नहीं दी।कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि दो घंटे की गोपनीय ब्रीफिंग के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि युद्ध की रणनीति पूरी तरह अस्पष्ट है। उनके मुताबिक यदि राष्ट्रपति संविधान के अनुसार कांग्रेस से इस युद्ध की अनुमति मांगते, तो संभव है कि उन्हें मंजूरी नहीं मिलती, क्योंकि अमेरिकी जनता चाहती कि उनके प्रतिनिधि इसके खिलाफ वोट दें। इस बीच ट्रंप ने यह संभावना भी खारिज नहीं की है कि भविष्य में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को भी ईरान भेजा जा सकता है।

युद्ध पर कांग्रेस को दी जा रही जानकारी

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस के सदस्यों को युद्ध की स्थिति और प्रगति के बारे में गोपनीय जानकारी दी है।चूंकि ये बैठकें गोपनीय थीं, इसलिए सांसद सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकते।

डेमोक्रेट्स की मुख्य चिंताएं

कई डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस युद्ध का अंतिम लक्ष्य क्या है। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि प्रशासन की ओर से दिए जा रहे बयान परस्पर विरोधाभासी हैं। उनके अनुसार कभी कहा जाता है कि युद्ध लगभग खत्म होने वाला है और कभी कहा जाता है कि यह अभी शुरू ही हुआ है।

इसी सप्ताह छह डेमोक्रेटिक सांसदों ने दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की जांच की मांग की है। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में कम से कम 170 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर बच्चे थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस हमले में अमेरिकी बल शामिल हो सकते हैं।

युद्ध की लागत पर सवाल

मैसाचुसेट्स से सीनेटर एलिज़ाबेथ वॉरेन ने युद्ध की भारी लागत को लेकर चिंता जताई।उन्होंने कहा कि जहां लाखों अमेरिकियों के स्वास्थ्य बीमा के लिए पर्याप्त धन नहीं है, वहीं ईरान पर बमबारी के लिए हर दिन लगभग एक अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास बजट के जरिए ऐसे सैन्य अभियानों को रोकने की शक्ति है।

जमीनी सैनिक भेजने की आशंका

कुछ सांसदों को चिंता है कि यह संघर्ष आगे बढ़ते हुए जमीनी युद्ध का रूप ले सकता है। सीनेटर ब्लूमेंथल ने कहा कि हालात ऐसे बन रहे हैं कि संभावित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अमेरिकी सैनिकों को ईरान की जमीन पर तैनात किया जा सकता है। उनके अनुसार अमेरिकी जनता को युद्ध की लागत, सैनिकों के जोखिम और संघर्ष के और बढ़ने की संभावना के बारे में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।

रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन

कांग्रेस के दोनों सदनों में मामूली बहुमत रखने वाली रिपब्लिकन पार्टी के अधिकांश नेताओं ने ट्रंप के ईरान अभियान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करने के लिए जरूरी है।हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष और फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मस्त ने ट्रंप की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने तेहरान से उत्पन्न “तत्काल खतरे” के खिलाफ अमेरिका की रक्षा के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया है।

रिपब्लिकन खेमे में भी उठे सवाल

कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी चिंता जताई है।साउथ कैरोलिना की सांसद नैंसी मेस ने कहा कि वह अपने राज्य के युवाओं को ईरान के साथ युद्ध में भेजना नहीं चाहतीं। वहीं केंटकी से रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन रोज़ युद्ध के लिए नए कारण पेश कर रहा है।उन्होंने कहा कि युद्ध हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए, पहला कदम नहीं।

क्यों अहम है यह बहस?

यह विवाद अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस को फिर से सामने ले आया है।अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है। हालांकि आधुनिक दौर में कई राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात स्थिति का हवाला देकर कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के बिना ही सैन्य कार्रवाई शुरू करते रहे हैं।

कानून के मुताबिक राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना 60 दिनों तक सैन्य बल तैनात कर सकते हैं। इसके बाद यदि कांग्रेस मंजूरी नहीं देती, तो अगले 30 दिनों के भीतर सैनिकों को वापस बुलाना पड़ता है।

संवैधानिक विवाद और कानूनी सवाल

कई कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध कांग्रेस की निगरानी और नियंत्रण की जरूरत को उजागर करता है।हैमलाइन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड शुल्ट्ज़ के अनुसार 1970 के दशक में बनाए गए वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत राष्ट्रपति को सीमित अधिकार दिए गए थे। उनके मुताबिक बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के सैन्य कार्रवाई करना संविधान के दायरे से बाहर भी माना जा सकता है।

ट्रंप प्रशासन का पक्ष

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि 28 फरवरी के हमले तत्काल खतरे के जवाब में किए गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति अक्सर इसी तर्क के आधार पर कांग्रेस की पूर्व मंजूरी के बिना सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते रहे हैं।हालांकि युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कहा था कि उन्हें अमेरिका या मध्य पूर्व में उसकी सैन्य सुविधाओं पर ईरान के किसी तत्काल खतरे के ठोस सबूत नहीं मिले थे। ऐसे में अमेरिका में यह बहस लगातार तेज हो रही है कि क्या ईरान के खिलाफ यह युद्ध सही ठहराया जा सकता है और क्या कांग्रेस को इस पर अधिक नियंत्रण रखना चाहिए।

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