
जंग में रोज़ाना 891 मिलियन डॉलर फूंक रहा है अमेरिका, कई छोटे देशों की GDP से ज्यादा खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को संभवतः अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त बजट स्वीकृति मांगनी पड़ सकती है, जैसा कि इराक और अफगानिस्तान युद्ध के समय जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने किया था।
ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका हर दिन लगभग 891 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। युद्ध के सिर्फ पहले एक हफ्ते में ही कुल खर्च लगभग 6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रकम आगे चलकर दसियों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इस युद्ध के आर्थिक झटके सिर्फ अमेरिका या पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाल रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि युद्ध के पहले हफ्ते में लगभग 6 अरब डॉलर खर्च हुए। रिपोर्ट के मुताबिक अब रिपब्लिकन नेताओं को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही कांग्रेस से अतिरिक्त फंडिंग की मांग करेगा।
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक Centre for Strategic and International Studies (CSIS) के विश्लेषण के अनुसार, पेंटागन द्वारा बताए गए सैन्य अभियानों और तैनात संसाधनों के आधार पर अमेरिका का दैनिक खर्च 891.4 मिलियन डॉलर बैठता है।
थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन को संभवतः अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त बजट स्वीकृति मांगनी पड़ सकती है, जैसा कि 2000 के दशक में इराक और अफगानिस्तान युद्ध के समय जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने किया था।
CSIS के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि युद्ध के लिए अतिरिक्त फंडिंग की मांग राजनीतिक विरोध का बड़ा मुद्दा बन सकती है।
छोटे देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा खर्च
अमेरिका ने केवल एक सप्ताह में इतना पैसा खर्च कर दिया है, जितना कई छोटे देशों की कुल जीडीपी से भी अधिक है। तुलना के तौर पर: 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन भारत के पूरे साल के अंतरिक्ष बजट से भी ज्यादा है।
पहले हफ्ते के कुल खर्च में से लगभग 4 अरब डॉलर हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च हुए। इसमें मुख्य रूप से इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जिनका उपयोग ईरान की मिसाइलों को मार गिराने के लिए किया गया।
यह खर्च पिछले साल हुए ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” से भी बहुत ज्यादा है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी के Costs of War प्रोजेक्ट के अनुसार जून 2025 में हुए उस हमले की लागत 2.04 से 2.26 अरब डॉलर के बीच थी।
CSIS के मुताबिक वर्तमान युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में ही लगभग तीन गुना अधिक खर्च हो चुका था।
रोज़ का खर्च कैसे हो रहा है
CSIS के अनुसार, ईरान जंग में अमेरिका का रोज़ाना के खर्च का अनुमान कुछ इस प्रकार है:
हवाई अभियान: लगभग 30 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
नौसैनिक अभियान: लगभग 15 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
जमीनी अभियान: लगभग 1.6 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 से ज्यादा हो चुकी है। इसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनों युद्धपोत, और कई बमवर्षक व हमलावर विमान शामिल हैं।
अन्य देशों की तुलना में कितना बड़ा खर्च
यह खर्च कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहद बड़ा है। हर दिन का खर्च भारत के पूरे अंतरिक्ष बजट के बराबर हर दो दिन में हो जाता है।
पाकिस्तान के पूरे रक्षा बजट के बराबर 10 दिन में। नेपाल की पूरी वार्षिक जीडीपी के बराबर दो महीने से भी कम समय में।
2026 में NASA का बजट 24.4 अरब डॉलर है। यानी अगर युद्ध इसी गति से चलता रहा तो एक महीने से भी कम समय में अमेरिकी सेना पूरे नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के बराबर खर्च कर देगी।
कुल खर्च कितना हो सकता है
युद्ध कितने समय तक चलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इसकी अवधि दो सप्ताह से लेकर छह सप्ताह तक बताई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: “हम अभी तो बस शुरुआत कर रहे हैं।”
वहीं ईरान का कहना है कि वह महीनों तक युद्ध जारी रख सकता है और उसने अभी तक अपनी उच्च तकनीक वाली हथियार प्रणाली का इस्तेमाल भी शुरू नहीं किया है।
पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ केंट स्मेटर्स के अनुसार: यदि युद्ध दो महीने चलता है, तो सैन्य खर्च 40 से 95 अरब डॉलर तक हो सकता है।
व्यापक आर्थिक प्रभाव 210 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
हालांकि उनका तर्क है कि यदि ईरान को परमाणु हथियार मिल जाते हैं तो उससे होने वाला नुकसान खरबों डॉलर का हो सकता है। वहीं नेशनल प्रायोरिटीज प्रोजेक्ट की विश्लेषक लिंडसे कोशगारियन ने कहा कि युद्ध का खर्च अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इराक युद्ध की कुल लागत लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी।
पेंटागन ने अभी तक कुल संभावित खर्च का कोई आधिकारिक अनुमान नहीं दिया है।
अपने ही पुराने बयानों में घिरे ट्रंप
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। हालांकि डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रंप के पुराने बयानों को याद दिला रहे हैं।
2012 में ट्रंप ने कहा था कि ईरान से युद्ध शुरू करना अमेरिकी जीवन को बेकार में खतरे में डालना होगा। 2017 में उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर दिए, जबकि उस पैसे से देश को दो बार पुनर्निर्मित किया जा सकता था।
डेमोक्रेट नेता पीट अगुइलार ने कहा कि ट्रंप एक और युद्ध के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, जबकि देश के भीतर स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों में कटौती की जा रही है।
इसके बावजूद ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लंबे पोस्ट करते हुए दावा कर रहे हैं कि वह ईरान को आर्थिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत बना देंगे। उन्होंने अपने मशहूर नारे की तर्ज पर नया नारा दिया - Make Iran Great अगेन.

