टैरिफ कम करने का यूएस से वादा नहीं, क्या यूं ही बोल रहे डोनाल्ड ट्रंप?
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टैरिफ कम करने का यूएस से वादा नहीं, क्या यूं ही बोल रहे डोनाल्ड ट्रंप?

भारत सरकार ने संसदीय समिति को जानकारी दी है कि टैरिफ के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप से किसी तरह का वादा नहीं किया गया है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में सामान्य धारणा है कि वो कभी कुछ भी बोल सकते हैं। वो अपनी बात से पलट जाते हैं। कहने का अर्थ ये कि मौसम की तरह उनके बयान बदलते रहते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के दो दिन बाद, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने टैरिफ को 'बहुत कम' करने पर सहमति जताई है, सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अमेरिका से कोई प्रतिबद्धता नहीं बनाई गई है।सरकार ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा बार-बार उठाए जा रहे इस मुद्दे को हल करने के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है।

भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर कर रहे हैं बातचीत

विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए वाणिज्य सचिव सुनील बार्थवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका एक दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर काम कर रहे हैं, जो केवल तत्काल टैरिफ समायोजन पर केंद्रित न होकर द्विपक्षीय व्यापार को लाभ पहुंचाने वाला होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है, जबकि चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों पर ट्रंप प्रशासन ने पहले ही टैरिफ प्रतिबंध लगाए हैं।

क्या भारत ट्रंप के 'प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ' से बच सकता है?

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा और TMC की सागरिका घोष सहित कुछ विपक्षी सांसदों ने प्रतिस्पर्धात्मक (reciprocal) टैरिफ को लेकर वाणिज्य सचिव से सवाल किए। ट्रंप ने 2 अप्रैल से उन देशों पर उच्च टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिनके आयात शुल्क ज्यादा हैं।सूत्रों के अनुसार, बार्थवाल ने पैनल को बताया कि भारत फिलहाल इस खतरे से बच सकता है, क्योंकि अब तक ट्रंप प्रशासन ने कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया है।

व्यापार वार्ता भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है: वाणिज्य सचिव

वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि अमेरिका से व्यापार वार्ता भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।कुछ सरकारी अधिकारी मानते हैं कि चीन पर उच्च टैरिफ लागू होने से भारत को कई उद्योगों में अवसर मिल सकते हैं।भारत-अमेरिका के संभावित द्विपक्षीय समझौते से भारतीय वस्त्र (टेक्सटाइल) और चमड़ा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।पिछले हफ्ते, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि ट्रंप की टैरिफ और विदेश नीति से भारत को अवसर मिल सकते हैं।

संसदीय पैनल में चीन मुद्दे पर भी हुई चर्चा

संसदीय समिति, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहे हैं, ने वाणिज्य सचिव और विदेश सचिव विक्रम मिश्री को भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और चीन से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देने के लिए बुलाया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम मिश्री ने पैनल को भारत-चीन सीमा पर निर्माण गतिविधियों पर सरकारी रुख स्पष्ट किया।उन्होंने बताया कि भारत और चीन लगातार संपर्क में हैं और इस मुद्दे पर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।सदस्यों ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे बांध को लेकर भी सवाल किए। इस पर मिश्री ने बताया कि भारत और चीन के बीच इस विषय पर कोई समझौता नहीं है, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच जल समझौता मौजूद है।

उन्होंने कहा किचीन भारत के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करना चाहता है।इसमें सीधे उड़ानों की बहाली, वीजा जारी करना और पत्रकारों की तैनाती शामिल है।हालांकि, भारतीय अधिकारी चीनी आगंतुकों और पत्रकारों को अनुमति देने को लेकर सतर्क हैं।भारत सरकार ने संसदीय पैनल को स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका से टैरिफ कम करने का कोई वादा नहीं किया गया है।

भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहा है और ट्रंप प्रशासन के किसी भी कदम के बाद ही प्रतिक्रिया देगा।साथ ही, भारत-चीन संबंधों को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया जा रहा है, जिसमें व्यापार और कूटनीति के पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

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