अमेरिकी टॉरपीडो से डूबा ईरानी जहाज, भारतीय नौसेना का रेस्क्यू ऑपरेशन
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अमेरिकी टॉरपीडो से डूबा ईरानी जहाज, भारतीय नौसेना का रेस्क्यू ऑपरेशन

हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले से ईरानी युद्धपोत 'डेना' डूब गया है। भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना 130 नाविकों को बचाने के लिए साझा अभियान चला रही हैं।


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India On Iran's Ship Attack By USA: हिंद महासागर में जारी भारी तनाव के बीच भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी जांबाजी और मानवीय धर्म का परिचय दिया है। 4 मार्च की तड़के, अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो हमले में ईरानी नौसेना का युद्धपोत 'IRIS Dena' समुद्र में डूब गया। श्रीलंका के गॉल (Galle) तट से करीब 20 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए इस विनाशकारी हमले के बाद भारतीय नौसेना ने तत्काल 'खोज और बचाव अभियान' (Search and Rescue) शुरू कर दिया है। 130 नाविकों की जान बचाने के लिए भारतीय नौसेना के टोही विमान और युद्धपोत दिन-रात एक कर रहे हैं।


बिना चेतावनी अमेरिकी टॉरपीडो से हमला
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के अनुसार, IRIS Dena विशाखापत्तनम में एक सैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद वापस ईरान लौट रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के युद्धपोत पर हमला किया गया। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे 'क्वाइट डेथ' (शांत मौत) करार दिया। हेगसेथ के अनुसार, यह हमला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का हिस्सा है, जो अब मध्य पूर्व की सीमाओं को पार कर वैश्विक स्तर पर फैल चुका है।

भारतीय नौसेना का 'ऑपरेशन मानवता'
भारतीय नौसेना ने संकट की सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के अपने संसाधनों को सक्रिय किया। 4 मार्च की सुबह 10 बजे एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान तैनात किया गया, जो पहले से जारी श्रीलंकाई अभियान को सहयोग दे रहा है। इसके अलावा, एक दूसरा विमान एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट्स (जीवन रक्षक नौकाओं) के साथ स्टैंडबाय पर रखा गया है। ट्रेनिंग शिप INS तरंगिणी और सर्वे वेसल INS इक्षक वर्तमान में लापता कर्मियों की तलाश में जुटे हैं। भारतीय नौसेना श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है।

श्रीलंका की तटस्थता और क्षेत्रीय चिंता
यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट से महज एक घंटे की दूरी पर हुआ है। श्रीलंका ने इस संघर्ष में पूरी तरह तटस्थ रहने का रुख अपनाया है और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की है। गौरतलब है कि ईरान श्रीलंका की चाय का एक बड़ा खरीदार है, जो देश का मुख्य निर्यात है। इस हमले के बाद हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक शिपिंग और बीमा दरों पर असर पड़ सकता है।

ईरान की चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि IRIS Dena "भारतीय नौसेना का अतिथि" था। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की मिसाल कायम करने के लिए "कड़वा पछतावा" होगा। 130 नाविकों के जीवन पर आए इस संकट ने खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ दक्षिण एशियाई देशों के बीच भी कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। ईरान इसे एक अवैध हमला मान रहा है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है।

युद्ध का फैलता दायरा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में इस स्तर की सैन्य कार्रवाई यह दर्शाती है कि अमेरिका अब ईरान की घेराबंदी उसके घरेलू जलक्षेत्र से बाहर भी कर रहा है। गॉल के पास हुए इस विस्फोट की गूंज ने दक्षिण एशिया की समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। फिलहाल बचाव दल लापता नाविकों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन मलबे और समुद्र की गहराई को देखते हुए हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


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