वेनेजुएला-अमेरिका : जिगरी दोस्त से जानी दुश्मन तक की इनसाइड स्टोरी
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वेनेजुएला-अमेरिका : जिगरी दोस्त से जानी दुश्मन तक की इनसाइड स्टोरी

जानें कैसे अमेरिका का जिगरी दोस्त वेनेजुएला उसका जानी दुश्मन बना? निक्सन पर हमला, शावेज की बगावत और ट्रंप के 'डेल्टा फोर्स' ऑपरेशन की पूरी दास्तान।


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Venezuela Vs USA : आज जो वेनेजुएला अमेरिका की आंखों में खटक रहा है, कभी उसी देश की गलियों में अमेरिकी कंपनियों की तूती बोलती थी। यह कहानी तेल, ताकत और धोखे की है, जो निक्सन पर हुए हमले से शुरू होकर मादुरो की गिरफ्तारी पर खत्म हुई। अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों का इतिहास किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसा है, जहाँ कभी दोनों 'जय-वीरू' की तरह साथ थे, और आज एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं।


1. जब तेल के बदले बिकता था ईमान
शीत युद्ध (Cold War) के दौर में जब दुनिया सोवियत संघ और अमेरिका के बीच बंटी थी, तब वेनेजुएला अमेरिका का सबसे 'खास मोहरा' था। अमेरिका को अपनी गाड़ियों और फैक्ट्रियों के लिए तेल चाहिए था, और वेनेजुएला के पास तेल का अगाध भंडार। उस दौर में वॉशिंगटन और कराकस के बीच ऐसी 'सेटिंग' थी कि अमेरिकी कंपनियां वहां के कुओं से मोटा मुनाफा कूट रही थीं और बदले में अमेरिका वहां के नेताओं को सत्ता में बने रहने के लिए घातक हथियार सप्लाई कर रहा था।

2. निक्सन पर हमला और वो 'खूनी' मंजर
रिश्तों में पहली बड़ी दरार 1958 में दिखी। तत्कालीन अमेरिकी उप-राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन जब कराकस पहुंचे, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा। वेनेजुएला के लोग इस बात से आगबबूला थे कि अमेरिका उनके देश के तानाशाहों को पनाह देता है। निक्सन के काफिले पर पत्थरों और पाइपों से हमला हुआ। निक्सन को लगा कि आज उनका 'काम तमाम' हो जाएगा, लेकिन किस्मत से वो बच निकले। इस घटना ने अमेरिका को डरा दिया और उसने वेनेजुएला को खुश करने के लिए हथियारों की ऐसी सेल लगाई कि उसे दक्षिण अमेरिका का 'हथियारों का गोदाम' बना दिया।

3. F-16 का दौर और लोकतंत्र का ढोंग
1980 के दशक तक दोस्ती परवान चढ़ती रही। रोनाल्ड रीगन के दौर में अमेरिका ने वेनेजुएला को 24 अत्याधुनिक F-16 लड़ाकू विमान बेचे। यह उस समय की सबसे बड़ी आर्म्स डील थी। अमेरिका वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन और भ्रष्टाचार पर अपनी आंखें मूंदे रहा, क्योंकि उसे सिर्फ 'सस्ते तेल' और 'कम्युनिस्टों की हार' से मतलब था। लेकिन कहते हैं न कि जब घर के अंदर असंतोष पनपता है, तो बाहर की दीवारें काम नहीं आतीं।

4. ह्यूगो शावेज: वो नेता जिसने 'अंकल सैम' की नींद उड़ाई
1998 में सत्ता की बागडोर ह्यूगो शावेज के हाथ आई और यहीं से खेल पलट गया। शावेज ने नारा दिया—"जनता का तेल, जनता के लिए।" उन्होंने विदेशी कंपनियों के मुनाफे पर कैंची चला दी। 2002 में शावेज के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश हुई, जिसका आरोप उन्होंने सीधे व्हाइट हाउस पर मढ़ा। 2006 में यूएन की स्टेज से उन्होंने जॉर्ज बुश को 'शैतान' (Devil) कहकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।

5. मादुरो की जिद और ट्रंप का 'फाइनल स्ट्राइक'
शावेज के बाद निकोलस मादुरो ने इस दुश्मनी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। मादुरो ने रूस और चीन से हाथ मिला लिया, जो अमेरिका को बर्दाश्त नहीं था। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में 'आर-पार' की लड़ाई ठानी। मादुरो पर 'नार्को-टेररिज्म' (नशे का कारोबार और आतंकवाद) के आरोप लगाकर उन्हें दुनिया भर में अलग-थलग कर दिया गया। और अंततः 2 जनवरी की उस काली रात को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने ऑपरेशन को अंजाम देकर मादुरो की 'बादशाहत' का अंत कर दिया।


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