
'हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करके फेंक दिया',अमेरिका पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा बयान
ख्वाजा आसिफ की यह टिप्पणी उस समय आई जब संसद ने इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में इमामबर्गाह कसर-ए-खदीजतुल कुबरा पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।
पाकिस्तान को आखिरकार यह अहसास हो गया है कि अमेरिका ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की अपने देश की संसद में दी गई ताज़ा स्पीच तो यही कहानी कह रही है। अमेरिका के साथ अपने देश के पुराने गठबंधनों पर तीखी टिप्पणी करते हुए नेशनल असेंबली में आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद को अफगानिस्तान में अमेरिकी हितों की पूर्ति के बाद “टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया गया।”
इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए घातक आत्मघाती हमले के बाद आतंकवाद पर बहस के दौरान बोलते हुए आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार महाशक्तियों के युद्धों में शामिल होता रहा, जो उसके अपने नहीं थे।
पाकिस्तान ने माना-अफगान युद्धों में अमेरिका समर्थित जिहाद एक गलती
आसिफ ने सांसदों से कहा,“हमने दो युद्धों में हिस्सा लिया जो अफगानिस्तान की जमीन पर लड़े गए।” 1979 में सोवियत हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वह “काबुल की सरकार के निमंत्रण पर” हुआ था और इसे सीधा आक्रमण बताने का नैरेटिव अमेरिका ने गढ़ा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इन संघर्षों में इस्लाम और धर्म के नाम पर उतरा, लेकिन हकीकत में दो पूर्व सैन्य तानाशाहों ने वैधता और एक वैश्विक शक्ति का समर्थन पाने के लिए ऐसा किया।
उन्होंने कहा, “ये हमारे युद्ध नहीं थे; ये महाशक्तियों के युद्ध थे।” उन्होंने जोड़ा कि पाकिस्तान और उसकी जमीन का इस्तेमाल कर उसे “टॉयलेट पेपर की तरह” फेंक दिया गया। आसिफ ने पाकिस्तान में आतंकवाद को अतीत में तानाशाहों द्वारा की गई गलतियों का प्रतिघात बताया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इतिहास से सीखने में विफल रहा है और अल्पकालिक हितों के लिए कभी अमेरिका, कभी रूस और कभी इंग्लैंड की ओर रुख करता रहा है। आसिफ ने कहा,“अपने हितों के लिए हम कभी वॉशिंगटन, कभी मॉस्को और कभी ब्रिटेन की तरफ मुड़ जाते हैं। हमने यहां मजबूत फ्रेंचाइज़ बना ली हैं, जो 30 या 40 साल पहले नहीं थीं।”
उन्होंने वर्ष 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के इस्लामाबाद के संक्षिप्त दौरे को याद करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि संबंध कितने लेन-देन आधारित हो गए थे। भारत की लंबी यात्रा के अंत में क्लिंटन का यह दौरा केवल कुछ घंटों का था। तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के साथ उनकी बातचीत में लोकतंत्र, परमाणु अप्रसार और उग्रवाद जैसे मुद्दों पर अमेरिकी दबाव स्पष्ट था।
आसिफ की यह टिप्पणी उस समय आई जब संसद ने इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में इमामबर्गाह कसर-ए-खदीजतुल कुबरा पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। शुक्रवार की नमाज के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने 31 लोगों की हत्या कर दी और 169 को घायल कर दिया। इस्लामिक स्टेट समूह ने हमले की जिम्मेदारी ली। राजधानी भर में हजारों लोगों ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया, जहां शोक संतप्त परिवारों ने जवाबदेही की मांग की।
घायल हुए लोगों में शामिल एक व्यक्ति की बहन बुशरा रहमानी ने कहा, “जो कल हुआ, उसने हमें बेहद गुस्से में और गहराई से आहत कर दिया है।”
मंत्री ने राजनीतिक एकता की अपील करते हुए कहा कि आतंकवाद की निंदा जैसे मुद्दे पर भी सर्वसम्मति का अभाव दुखद है। उन्होंने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि हमारी एक राष्ट्रीय पहचान हो, जिस पर किसी को असहमति न हो।” उन्होंने राजनीतिक कारणों से पीड़ितों के अंतिम संस्कार में शामिल न होने वालों की आलोचना की।

