
वेनेजुएला का तेल और ट्रंप का सपना: अरबों डॉलर की दौलत, भारत-जापान की GDP भी पड़ जाए फीकी
अमेरिका की वेनेजुएला में दिलचस्पी सिर्फ तेल के लिए है। आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बीच वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार अमेरिका के लिए आकर्षक है, लेकिन इसे पूरी तरह हासिल करना आसान नहीं।
Venezuela: दुनिया के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में से एक वेनेजुएला का तेल, जो अरबों डॉलर का खजाना है और अमेरिका की निगाहें उस पर जमी हुई हैं। लोकतंत्र और मानवाधिकार की बातें सिर्फ बहाना हैं। क्योंकि असली खेल तो कच्चे तेल के लिए है। एक तरफ गरीबी और राजनीतिक उथल-पुथल, दूसरी तरफ ट्रिलियन डॉलर का खजाना और बीच में अमेरिका का लालच। यह केवल दुनिया की शक्ति का नया समीकरण है।
अमेरिका की वेनेजुएला में दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय यह साफ देखा गया कि वेनेजुएला उनके लिए लोकतंत्र या मानवाधिकार से ज्यादा तेल का सवाल रहा है। वेनेजुएला लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। महंगाई चरम पर है। साल 2018 में महंगाई दर 63,000 फीसदी तक पहुंच गई थी। वहीं, 2025 में यह करीब 500% दर्ज की गई। देश की मुद्रा लगातार गिर रही है और आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। आर्थिक संकट के साथ-साथ राजनीतिक अस्थिरता भी गहरी हो गई है। जब कोई देश आर्थिक रूप से कमजोर होता है तो राजनीति पर इसका असर साफ दिखाई देता है।
अमेरिका का असली मकसद
अमेरिका के मानवाधिकार या लोकतंत्र की बातें अक्सर तेल के लिए ढाल होती हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है – लगभग 303 अरब बैरल। अगर इसे सही तरीके से बाजार तक पहुंचाया जाए तो देश की किस्मत बदल सकती है। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वेनेजुएला का तेल गलत हाथों में है। उनके लिए मादुरो सरकार एक बाधा थी, जिसे हटाकर अमेरिका अपनी पसंद की सत्ता देखना चाहता था। इसके पीछे वेनेजुएला का तेल अमेरिकी कंपनियों और हितों के लिए सुरक्षित करना, रूस और ओपेक के खिलाफ अमेरिका के पास ऊर्जा का हथियार तैयार करना व वैश्विक तेल कीमतों और डॉलर की ताकत को कंट्रोल करना मकसद था।
वेनेजुएला के तेल की कीमत
303 अरब बैरल तेल की कीमत अगर $40 प्रति बैरल मानी जाए तो कुल रकम 12.12 ट्रिलियन डॉलर होती है। यह आंकड़ा भारत की कुल GDP से तीन गुना और पाकिस्तान की GDP से लगभग 30 गुना अधिक है। अगर $30 प्रति बैरल से देखें तो भी कीमत 9.1 ट्रिलियन डॉलर आती है। इसलिए वेनेजुएला केवल संकटग्रस्त देश नहीं, बल्कि संभावित ऊर्जा महाशक्ति माना जाता है।
असली चुनौतियां
हालांकि तेल का भंडार विशाल है, इसे निकालना और बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं है। इसकी वजह वेनेजुएला का ज्यादातर तेल हेवी और एक्स्ट्रा-हेवी क्रूड है, जिसकी उत्पादन लागत सामान्य तेल से ज्यादा है। तेल निकालने, रिफाइनरी और पाइपलाइन सिस्टम को फिर से चलाने में अरबों डॉलर और कई साल लगते हैं। इसलिए कागज पर बड़ी कीमत होने के बावजूद वास्तविक आर्थिक फायदा धीरे-धीरे ही मिलेता।

