काराकास धमाके और अमेरिकी दबाव, क्या मादुरो टिक पाएंगे?
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काराकास धमाके और अमेरिकी दबाव, क्या मादुरो टिक पाएंगे?

काराकास में धमाके और अमेरिकी दबाव के बीच वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के सामने बड़ी चुनौती है। यहां उनकी सैन्य मिलिशिया की ताकत के बारे में बताएंगे।


वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने राजधानी काराकास (Caracas Explosion) में धनाकों के बाद इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। मादुरो ने इसे अमेरिका की गैरकानूनी कार्रवाई बताया है। इन सबके बीच कोलंबिया के राष्ट्रपति ने सीधे सीधे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए ट्वीट किया कि दुनिया देखो क्या हो रहा है। यही ओएएस और यूएन से दखल देने की मांग की। सवाल यह है कि अगर अमेरिका ने हमला किया हो तो क्या मादुरो, ट्रंप के सामने टिक पाएंगे।

बता दें कि अमेरिका (America) पिछले कई महीनों से कैरिबियन क्षेत्र में अपनी सेना तैनात कर रहा था। इस इलाके में USS गेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी ने संकेत दे दिए थे कि अमेरिका किसी भी समय वेनेजुएला पर हमला कर सकता है। इसके अलावा अमेरिका ने इस क्षेत्र में लगभग 15,000 सैनिक और एक दर्जन से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें क्रूजर, हमलावर जहाज, एयर और मिसाइल डिफेंस कमांड शिप, एम्फीबियस असॉल्ट जहाज और एक हमलावर पनडुब्बी शामिल हैं। प्यूर्टो रिको में 10 F-35 फाइटर जेट भी तैनात किए गए हैं। जबकि वेनेजुएला के पास सोवियत संघ के समय के पुराने हथियार हैं। ऐसे हथियारों के साथ भी अमेरिका के मुकाबले में टिकना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। सवाल उठता है कि अमेरिका के दबाव और धमकियों के बावजूद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो घुटने टेकेंगे या नहीं।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मादुरो से सत्ता छोड़ने की समझदारी अपनाने की चेतावनी दी थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि उनके मिलिट्री जमावड़े का मकसद मादुरो को हटाना है या नहीं। ट्रंप ने 22 दिसंबर को पत्रकारों से कहा कि मादुरो के लिए सत्ता छोड़ना “समझदारी” होगी, लेकिन अंतिम निर्णय मादुरो पर ही निर्भर है।

वेनेजुएला की पारंपरिक सेना और सोवियत हथियार

वेनेजुएला की पारंपरिक सेना बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेज (FANB) पिछले दो दशकों में लैटिन अमेरिका की एक क्षेत्रीय सैन्य शक्ति के रूप में उभरी है। इसके विकास में पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने सत्ता में आने के बाद तेल से होने वाली भारी कमाई को सेना के आधुनिकीकरण में झोंक दिया और रूस से हथियारों की खरीद बढ़ाई। आज भी FANB के पास Su-30 फाइटर जेट, T-72 टैंक, S-300 एयर डिफेंस सिस्टम और कलाश्निकोव राइफलें मौजूद हैं। ये हथियार कागज पर उन्हें लैटिन अमेरिका की कई सेनाओं से मजबूत बनाते हैं।

FANB की सबसे बड़ी कमजोरी मानव संसाधन की कमी है। पिछले एक दशक से चले आर्थिक संकट, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, गिरता तेल उत्पादन और अमेरिकी प्रतिबंधों ने सेना की रीढ़ तोड़ दी है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 79 लाख वेनेजुएला के लोग देश छोड़ चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। इसका मतलब है कि सेना के पास पर्याप्त सैनिक नहीं हैं।

सैन्य ताकत और संरचना

वर्तमान में FANB में लगभग 123,000 सक्रिय सैनिक हैं। इनमें से थलसेना सबसे बड़ी है, नौसेना में 25 500, वायु सेना में 11 500 और नेशनल गार्ड में 23 000 सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 8,000 रिजर्व सैनिक भी उपलब्ध हैं। मादुरो की बड़ी ताकत उनकी मिलिशिया है, हालांकि इसकी संख्या पर विवाद है। मादुरो कभी इसे 45 लाख तो कभी 80 लाख से अधिक बताते हैं। रक्षा विशेषज्ञ इन आंकड़ों को राजनीतिक बयानबाजी मानते हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, मिलिशिया की वास्तविक संख्या लगभग 220000 है।

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