प्यार का मौसम आया, इस दीवाली दिये ही नहीं दिल भी जलेंगे

सैयारा' की सफलता के बाद परम सुंदरी, गुस्ताख इश्क, एक दीवाने की दीवानियत, लव एंड वार समेत कई प्रेम कहानियां रिलीज होने की कतार में हैं. माना जा रहा है कि प्रेम कहानियों का दौर लौटा है. क्या है हकीकत, इसकी पड़ताल कर रही है.;

Update: 2025-08-30 09:33 GMT
Diwali 2025, Diwali love story

हम बने तुम बने एक दूजे के लिए... आइ डॉट नो... फिल्म एक दूजे के लिए के इस गाने में प्रेमी-प्रेमिका अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं, जिनकी पारिवारिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अलग है, लेकिन दिल के तार जुड़े हैं. प्यार की खातिर हद से गुजरने वाले युवा जोड़े की कहानियां हिंदी सिनेमा का अहम हिस्सा रही हैं, बीते दिनों प्रदर्शित 'सैयारा' की सफलता ने रोमांटिक फिल्मों के दौर को ताजा किया है, जो एक्शन, बायोपिक और सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियों में कहीं दब गया था. सिनेमाघरों में आज प्रदर्शित हो रही फिल्म 'परम सुंदरी' के बाद 'गुस्ताख इश्क', 'एक दीवाने की दीवानियत', 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी', 'लव एंड वार' समेत कई रोमांस आधारित कहानियां रिलीज की कतार में हैं.

प्रेम कहानियां बनाती हैं स्टार

रोमांटिक कहानियों की अहमियत को रेखांकित करते हुए ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन कहते हैं कि पिछले करीब 15 साल से फिल्मों का ट्रैक बदला है. दक्षिण भारतीय या कोरियन फिल्मों की रीमेक, सत्य घटनाओं पर आधारित कहानियां या बायोपिक बन रही थीं, लेकिन लवस्टोरी कम आ रही थीं. आज के जितने भी सुपरस्टार हैं, चाहे शाहरुख खान, आमिर खान या सलमान खान हों, वे सब रोमांटिक कहानियों की वजह से ही सुपरस्टार बने हैं. एक्शन हीरो अक्षय कुमार और अजय देवगन के करियर का भी अहम हिस्सा रोमांस रहा है. संजय दत्त और सनी देओल हों या रणवीर सिंह उनकी पहली फिल्म भी लवस्टोरी थी. सैयारा ने दिखाया कि रोमांस तो चाहिए.

प्रेम कहानियों की वापसी को लेकर करण जौहर कहते हैं कि इस प्रकार की फिल्मों की कमी महसूस हो रही थी. मुझे याद है कि 8 या 9 साल का था, तब मैंने कुमार गौरव और विजेयता पंडित अभिनीत फिल्म 'लब को 18 बार सिनेमाघर में दे उसका संगीत मेरे वाकमैन रहता था. प्रेम कहानियां नए के साथ आती थीं. उनके दर्शकों को ज्यादा जानकारी थी, पर वे किशोरों के थे. उन पर आपका क्रशा उनका पोस्टर दीवारों पर थ. 'सनम तेरी कसम' र पर भी खूब देखी. वो इंटेंस प्रेम कहानी थी. हमें लगता है कि ये पीढ़ी टेंडर डेटिंग ऐप वाली है.

यह पीढ़ी इंटेंस लवर भी है. कोरियन ड्रामा की लोकप्रियता इस बात का संकेत कि हर कोई प्रेम कहानी देखना चाहता है. रोमांस को करण जौहर बालीवुड कहानियों के लिए परफेक्ट मानते हैं. करण का कहना है कि बालीवुड निर्माताओं को अपनी जाड़ों की ओर लौटना चाहिए और वह बनाना चाहिए जिसमें वह बेस्ट हैं यानी रोमांटिक ड्रामा. इसके साथ ही करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम पर प्रशंसकों को खुशखबरी दी कि वर्ष 2026 में बतौर निर्देशक वह वापसी कर सकते है. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि बतौर निर्देशक उनकी अगली फिल्म रोमांटिक जानर की हो सकती है.

दौर कभी गया ही नहीं था

अलग-अलग पीढ़ी के प्यार को 'मेट्रो इन दिनों' में दशनि वाले निर्देशक अनुराग बासु कहते हैं कि मुझे तो नहीं लगता कि दौर कभी गया था. बीच में थोड़ा गैप आ गया था. ये महज संयोग है कि प्रेम कहानी एक के बाद एक रिलीज हो रही हैं. बतौर निर्देशक हम वही फिल्में बनाना चाहते हैं जो बतौर दर्शक हम स्वयं भी देखना चाहते हैं. बाकी लवस्टोरी का चार्म कभी जाएगा नहीं. ये सिनेमा का मूल तत्व है. हर फिल्म में भले ही इसका प्रतिशत कम हो, लेकिन रहता जरूर है. ये हमेशा से होता आया है कि जब एक फिल्म हिट हो जाती है तो हम वैसी फिल्में बनाना शुरू कर देते हैं, लेकिन जब तक फिल्में बाहर आती हैं वो ट्रेंड बदल जाता है.

इस दीवाली दीये ही नहीं दिल भी जलेंगे

आमतौर पर त्योहारों पर बड़े सितारों की बड़ी फिल्में प्रदर्शित होती है. दर्शक भी छुट्टी के मूह में होते हैं, ऐसे में फिल्मों को बड़ी ओपनिंग की उम्मीद रहती है. पिछली बार त्योहारों पर एक्शन फिल्मी का बोलबाला रहाणा, पर इस बार माहौल बदला हुआ है. अब एक्शन नहीं, बल्कि रोमास का जादू चलेगा. दशहरे पर रिलीज होगी वरुण धवन और जान्हवी कपूर अभिनीत सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी तो वहीं दीपावली पर हर्षवर्धन राणे और सोनम बावेजा की रोमांटिक फिल्म एक दीवाने की दीवानियत रिलीज होगी. मेकर्स ने फिल्म का पोस्टर जारी करते हुए लिखा कि इस दीवाली दीये ही नहीं दिल भी जलेंगे. मोहब्बत से टकराएगी नफरत.

कार्तिक आर्यन और श्रीलीला को लेकर अनाम प्रेम कहानी बना रहे अनुराग कहते हैं कि मुझ पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है. हमारी कोशिश अच्छी फिल्म बनाने की है. फिलहाल हम रिलीज डेट तो सोच भी नहीं रहे हैं. वो निर्माता भूषण कुमार तय करेंगे. वहीं अतुल इस बात को स्वीकारते हैं कि आज की पीढ़ी का रोमांस 40 साल पहले वाली पीढ़ी जैसरा नहीं है. पहले प्यार का मतलब एक झलक, ब्लैंक काल पर लड़कों की आवाज सुनकर दिल को तसल्ली मिलना होता था. वर्तमान पोदो काफी व्यावहारिक है. उनके प्यार में दोस्तों की झलक भी होती है. हालांकि प्यार हमेशा प्यार ही रहेगा. रोमांटिक फिल्मों के लिए बेहतरीन संगीत भी चाहिए होगा. उसके बिना रोमांस का पूरा रस नहीं मिल पाएगा.

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