चुनाव आयोग ने वोटर सूची संशोधन की समयसीमा बढ़ाई, संसद में टकराव तय
विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) की डेडलाइन 14 फरवरी तक बढ़ी; बंगाल में 18.7 लाख मृत वोटर मिले, 35 लाख हटाए जाने का अनुमान BLOs पर बढ़ा दबाव।
By : The Federal
Update: 2025-11-30 08:03 GMT
SIR : विशेष मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने आज बड़ा फैसला लेते हुए इसकी अंतिम तिथि एक सप्ताह बढ़ाकर 14 फरवरी कर दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू हो रहा है और SIR को लेकर सरकार व विपक्ष के बीच जोरदार टकराव की आशंका है।
ड्राफ्ट सूची जारी करने की तारीख बढ़ी
चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मतदाता गणना (enumeration) की अवधि अब 11 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। पहले यह 4 दिसंबर तक थी।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 9 दिसंबर की जगह अब 16 दिसंबर को जारी होगी।
अंतिम मतदाता सूची अब 7 फरवरी की जगह 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।
आयोग ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर भारी दबाव और फील्ड वेरिफिकेशन के बड़े पैमाने के कारण यह विस्तार आवश्यक हुआ।
विपक्ष की अपील SIR को फिर से तय किया जाए
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस और कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस सप्ताह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से दिल्ली में मुलाकात की और SIR को पुनर्निर्धारित करने की मांग की।
विपक्ष का कहना है कि BLOs को बेहद कम समय में घर-घर जाकर विशाल डाटा वेरिफिकेशन करने का आदेश दिया गया है, जिसकी वजह से उन पर असामान्य मानसिक दबाव है।
पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से BLOs की आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। बंगाल में चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं, ऐसे में यह चिंता और बढ़ गई है।
बंगाल में 18.70 लाख मृत मतदाता मिले
चुनाव आयोग के मुताबिक, केवल पश्चिम बंगाल में ही 29 नवंबर की शाम तक 18.70 लाख मृत मतदाताओं की पहचान हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने अब मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों का अनुमान बढ़ाकर लगभग 35 लाख कर दिया है। इसमें शामिल हैं:
18.70 लाख मृत मतदाता
डुप्लीकेट वोटर
अनट्रेसेबल मतदाता
ऐसे वोटर जो स्थायी रूप से अन्य राज्यों में चले गए हैं
सियासी टकराव के संकेत
SIR प्रक्रिया को लेकर बंगाल और अन्य राज्यों में पहले ही विवाद खड़ा हो चुका है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में और अव्यवस्थित तरीके से की जा रही है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनावों के लिए मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है।
संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू हो रहा है और माना जा रहा है कि SIR का मुद्दा सत्र के पहले ही सप्ताह में हंगामे का कारण बन सकता है।