'50 से भी कम हथियारों से खत्म हुआ संघर्ष': ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना का बयान, पाकिस्तान ऐसे आया घुटनों पर

वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने कहा कि कुछ लक्ष्यों को इस बार नष्ट किया गया जो 1971 के युद्ध में भी बच गए थे।;

Update: 2025-08-30 13:48 GMT
वायुसेना ने कहा कि 9-10 मई की रात जब बड़ा हमला हुआ, तब हमने तय किया कि अब सही संदेश देना ज़रूरी है। हमने पूरे फ्रंट पर प्रहार किए।

वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर 50 से भी कम हथियार दागे जाने के बाद पाकिस्तान को 10 मई की दोपहर तक संघर्षविराम की अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एनडीटीवी डिफेंस समिट के दौरान ऑपरेशन सिंदूर को याद करते हुए तिवारी ने बताया कि पाकिस्तान द्वारा 9 और 10 मई की रात को किए गए हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में पूर्ण वर्चस्व हासिल कर लिया।

उन्होंने कहा,“मुझे कहना होगा कि यह हमारे लिए एक अहम सबक था कि 50 से कम हथियारों से हम संपूर्ण वर्चस्व हासिल कर पाए। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।” तिवारी, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई थी, ने बताया कि इस मिशन में कुछ पाकिस्तानी ठिकाने ऐसे थे जिन्हें 1971 के युद्ध में भी नहीं निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा, “हमने हर हथियार का सही इस्तेमाल किया और यह हमारे योजनाकारों तथा मिशन को अंजाम देने वालों की क्षमता का प्रमाण है।”

भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी, जब पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। इसके बाद चार दिन तक तीखी झड़पें हुईं और अंततः 10 मई को सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनी। एयर मार्शल तिवारी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम को विस्तार से समझाया और 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया के ग्राफिक विवरण भी साझा किए।

उन्होंने कहा कि भारत का इरादा स्थिति को और भड़काने का नहीं था। “हमने 7 मई की सुबह जब आतंक ढांचे को निशाना बनाया तो हमें पाकिस्तानी प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, लेकिन हमने संयम रखा और केवल सैन्य ठिकानों पर हमला किया। लेकिन 9-10 मई की रात जब बड़ा हमला हुआ, तब हमने तय किया कि अब सही संदेश देना ज़रूरी है। हमने पूरे फ्रंट पर प्रहार किए।”

तिवारी ने कहा कि कुछ लक्ष्यों को इस बार नष्ट किया गया जो 1971 के युद्ध में भी बच गए थे। “यही उस स्तर और क्षमता को दर्शाता है, जितना नुकसान हमने उन्हें पहुंचाया। हमने सिर्फ सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया और हमारा उद्देश्य उनकी क्षमता को खत्म करना और सही संदेश देना था।”

उन्होंने स्वीकार किया कि लंबी दूरी से दुश्मन ठिकानों पर प्रहार करना जोखिमभरा होता है क्योंकि इससे सह-नुकसान (Collateral Damage) की संभावना बढ़ती है। “लेकिन हमारे योजनाकारों और मिशन को अंजाम देने वालों के प्रयासों से हर निशाना सटीक साधा गया और कोई सह-नुकसान नहीं हुआ। यह आसान काम नहीं है। लंबी दूरी से हथियार सही निशाने तक पहुंचे, इसके पीछे सिर्फ पायलट नहीं बल्कि ज़मीन पर काम करने वाले अनेक लोग जिम्मेदार होते हैं।”

आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया था कि उसका इरादा स्थिति को भड़काने का नहीं है और हमले सिर्फ आतंकी अड्डों पर किए गए हैं। लेकिन जब पाकिस्तान ने सैन्य जवाबी कार्रवाई की शुरुआत की, तो भारत ने भी कड़े प्रहारों से जवाब दिया।

Tags:    

Similar News