CPI(M) का 24वां पार्टी कांग्रेस: हिंदुत्व, कॉर्पोरेट व साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष की नई दिशा
मुख्य एजेंडे में पार्टी को मजबूत करने, कामकाजी जनता के बीच प्रभाव को गहरा करने और व्यापक भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने पर चर्चा शामिल है।;
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का 24वां पार्टी कांग्रेस 2 अप्रैल को तमिलनाडु के मदुरै में शुरू हुआ। कांग्रेस ने हिंदुत्व ताकतों, कॉर्पोरेट प्रभुत्व और साम्राज्यवाद के खिलाफ एक सशक्त राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। इस अवसर पर देशभर से प्रतिनिधि और विभिन्न वामपंथी दलों के नेता उपस्थित हुए।
भाजपा और आरएसएस की आलोचना
पार्टी कांग्रेस की शुरुआत पोलित ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात के उद्घाटन भाषण से हुई। करात ने भाजपा और उसके वैचारिक पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों में हिंदुत्व ताकतों का अभूतपूर्व सशक्तीकरण हुआ है, जो अब कॉर्पोरेट प्रवृत्तियों के साथ घुलमिल गया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र को अब सत्ता तक पहुंच पहले से कहीं अधिक मिल चुकी है, जिससे श्रमिक अधिकारों का नुकसान, सार्वजनिक कंपनियों का निजीकरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं का कमजोर होना शुरू हो गया है। CPI(M) और वामपंथी आंदोलन को कॉर्पोरेट सशक्तिकरण के खिलाफ संघर्ष को प्राथमिकता देनी चाहिए। क्योंकि यह केवल भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि उन नीतियों के खिलाफ है जो कुछ लोगों के हितों को बढ़ावा देती हैं जबकि लाखों लोगों को परेशानी में डालती हैं।
समाजवादी विकास मॉडल पर जोर
करात ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अमेरिकी साम्राज्यवाद के बढ़ते प्रभाव की आलोचना की और वैश्विक स्तर पर चल रहे साम्राज्यवादी विरोधी आंदोलनों के समर्थन का आह्वान किया। उन्होंने CPI(M) के समाजवादी विकास मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि यह मॉडल ही दुनिया भर में संघर्षरत लोगों के लिए एक उचित विकल्प प्रस्तुत करता है।
वामपंथी एकता पर जोर
कांग्रेस की अध्यक्षता त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने की, जिन्होंने कहा कि साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों का एकजुट होना आवश्यक है। माणिक सरकार ने मदुरै को वामपंथी आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व की ओर इशारा करते हुए कहा, "यह शहर श्रमिक आंदोलनों और प्रगति की लड़ाइयों का गढ़ रहा है और अब यह समय है जब हम देश के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों का सामना करने के लिए यहां एकजुट हों।
कांग्रेस के मुख्य एजेंडे पर चर्चा
माणिक सरकार ने कांग्रेस के प्रमुख एजेंडे की जानकारी दी, जिसमें पार्टी की राजनीतिक और संगठनात्मक ताकत को मजबूत करना, श्रमिकों, किसानों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के संघर्षों को आगे बढ़ाना, और भाजपा-विरोधी गठबंधन का विस्तार करना शामिल था। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि CPI(M) को सिर्फ विपक्ष की आवाज बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे एक viable वामपंथी और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में उभरना होगा।
वक्फ बिल पर विवाद
इस कांग्रेस के दौरान वक्फ बिल पर भी चर्चा हुई, जिस पर संसद में तीव्र बहस हो रही है। CPI(M) के सांसदों ने इस बिल के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। क्योंकि उनका मानना है कि यह बिल अल्पसंख्यकों के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है। पार्टी के पोलितब्यूरो सदस्य एमवी गोविंदन ने कहा, "वक्फ बिल पूरी तरह असंवैधानिक है और इसे हर कीमत पर विरोध किया जाएगा।
भागीदारी
कांग्रेस में राज्यस्तरीय नेताओं, ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों और जमीनी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की। चर्चाओं में भाजपा-आरएसएस के एजेंडे का मुकाबला करने और भविष्य में संघर्षों के लिए रणनीतियां तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। पार्टी कांग्रेस के दौरान पार्टी के प्रदर्शन का मूल्यांकन, चुनावी रणनीतियों पर चर्चा और नीति विकल्पों की योजना बनाई जाएगी।
एकजुटता का आह्वान
कांग्रेस में अन्य वामपंथी दलों के नेताओं ने भी भाग लिया, जिनमें CPI के महासचिव डी राजा, CPI(ML) मुक्ति के नेता दीपंकर भट्टाचार्य और RSP के महासचिव मनोज भट्टाचार्य शामिल थे। डी राजा ने कहा, "वामपंथी आंदोलन ही वह ताकत है जो साम्प्रदायिकता, नवउदारवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ लगातार खड़ा रहा है। हमें जनता के बीच अपनी पकड़ को और गहरा करना होगा।
धर्मनिरपेक्ष भारत
कांग्रेस के समापन पर माणिक सरकार ने पार्टी के मिशन का सार प्रस्तुत करते हुए कहा, "इस कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि हिंदुत्व तानाशाही, कॉर्पोरेट लालच और सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। हमारा लक्ष्य एक समान, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत बनाना है।