इस सर्दी में फ्लू से बचाएंगे ये उपाय, CDC ने जारी की रिपोर्ट
अमेरिका के CDC की ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस बार फ्लू सीज़न देर से शुरू होने के बावजूद तेजी से बढ़ रहा है। अस्पतालों में भीड़ उतनी है, जितनी फरवरी में होती है।
मौसम बदलते ही अचानक हमारे आसपास फ्लू, बुखार, खांसी और वायरल से संक्रमित मरीजों की बाढ़ आने लगती है। पर इस बार डॉक्टर्स की बेचैनी कुछ अधिक है। वजह सिर्फ बढ़ते मरीज नहीं हैं बल्कि फ्लू वायरस का बदला हुआ रूप, अस्पतालों में बढ़ते एडमिशन और वो आंकड़े हैं, जो दुनियाभर के हेल्थ एजेंसियों को चिंतित कर रहे हैं...
अमेरिका के CDC (Centers for Disease Control and Prevention) की हाल की रिपोर्ट बताती है कि इस बार फ्लू सीज़न देर से शुरू होने के बावजूद तेजी से बढ़ रहा है। अस्पतालों में भीड़ उतनी है, जितनी फरवरी में होती है। जबकि कैलेंडर में अभी नवंबर ही बीता है। यानी आगे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इन्फ्लुएंजा-A
इन्फ्लुएंजा-A इस सीज़न में सबसे आक्रामक रूप में देखने को मिल रहा है और इसमें भी सबटाइप H1N1 और H3N2 सबसे अधिक केस बढ़ा रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि “यह वही वायरस है, जिसे हम जानते थे। लेकिन इसकी गति और फैलाव पहले जैसा नहीं रहा।”
फ्लू अभी सिर्फ बुज़ुर्ग या छोटे बच्चों तक सीमित नहीं रहा। 20 से 40 की उम्र के स्वस्थ दिखाई देने वाले लोग भी तेज़ बुखार, नेगेटिव रिपोर्ट के बाद भी वापस पॉज़िटिव होना, सांस में दिक्कत, थकान और सीने में दर्द जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस बदले पैटर्न पर University of Michigan School of Public Health की हालिया स्टडी स्पष्ट करती है कि पोस्ट-पैंडेमिक इम्यूनिटी गैप (यानी कोविड के दौरान संक्रमण का कम सामना होने से शरीर की इम्यून ट्रेनिंग कम होना) अब फ्लू के प्रति कमजोरी पैदा कर रही है।
यही कारण है कि डॉक्टर्स ने इस बार इसे साधारण वायरल मानकर अनदेखा न करने की चेतावनी दी है। कई अस्पतालों में बच्चों के ICU पहले ही भरे हुए हैं, खासकर फ्लू-कारण निमोनिया और सांस में तकलीफ के केसों से। Texas Children’s Hospital ने रिपोर्ट किया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बाल रोगियों में फ्लू हॉस्पिटलाइजेशन 40% ज्यादा है।
ये लक्षण हैं खतरनाक
थकान, तेज बुखार, गले में दर्द, बदन टूटना ये सब सामान्य हैं। लेकिन जो लक्षण इस बार ख़तरनाक माने जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं...
सीने में दर्द बढ़ना
सांस का फूलना
अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरना
भ्रम होना
तेज़ उलटियां
और 48 घंटे से अधिक तेज बुखार।
इसी बीच अच्छी खबर भी है कि फ्लू वैक्सीन इस बार काफी प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस बारे में CDC के शुरुआती डेटा बताते हैं कि इस सीज़न की वैक्सीन 70% से अधिक मामलों में अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम कर रही है। यानी खतरा बढ़ा है, लेकिन बचाव भी मजबूत है, बस लापरवाही महंगी पड़ सकती है।
फ्लू को हल्के में ना लें
अमेरिकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि “फ्लू को हल्के में लेने का मतलब ICU के दरवाज़े पर पहुंच जाना भी हो सकता है।” यह वाक्य डराने के लिए नहीं, तैयार करने के लिए है।
दुनिया के मेडिकल मॉडल यह दिखाते हैं कि दिसंबर के अंत से जनवरी के बीच फ्लू चरम पर पहुंचेगा। यानी असली लड़ाई अभी बाकी है। जो बच्चे, गर्भवती महिलाएं, दिल और फेफड़ों के मरीज, डायबिटीज के रोगी और बुज़ुर्ग हैं, उन्हें सबसे ज्यादा सावधानी की आवश्यकता है।
सच्चाई यह है कि वायरस हमसे तेज है। लेकिन हम उससे ज्यादा बुद्धिमान हो सकते हैं। कोई जादुई इलाज नहीं, लेकिन वैक्सीन, आराम, इम्युनिटी-बूस्टिंग पोषण और संक्रमण से बचाव की सावधानियों के साथ परिणाम काफी सकारात्मक हो सकते हैं। आखिर अपनी सुरक्षा हमारा दायित्व है, वायरस की नहीं।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।