वक्फ संशोधन बिल के पास होने के बाद BJD में भी मचा घमासान
सूत्रों का कहना है कि इस विषय को लेकर बीजेडी में आंतरिक कलह सामने आया है. राज्य सभा के सांसद सस्मित पात्रा द्वारा वक्फ विधेयक समर्थन पर घमासान मच गया है.;
Dispute Arise Inside BJD Over Waqf Bill : वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कई राजनितिक दलों में खलबली का माहौल है। वजह है पार्टी द्वारा या फिर उसके कुछ सदस्यों द्वारा बिल का समर्थन करना। अब आलम ये है कि अलग अलग राजनितिक दलों में इस मुद्दे पर असंतोष की सूचनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी ही सूचना बीजू जनता दल ( BJD ) को लेकर सामने आई है।
बीजू जनता दल (बीजेडी) इन दिनों आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का समर्थन किए जाने के बाद पार्टी में उथल-पुथल मच गई है। यह घटना 2024 के राज्य चुनावों में बीजेडी की हार के बाद पहली बड़ी अंतर-पार्टी चुनौती के रूप में उभरी है।
पार्टी नेताओं की नाराज़गी और अनुशासन की मांग
पूर्व मंत्री प्रताप जेना ने पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखकर पात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। जेना के अनुसार, यह पार्टी लाइन के खिलाफ है और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इस बीच, बीजेडी के उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा ने विधेयक को "विवादास्पद मुद्दा" बताया और कहा कि सांसदों को अपनी अंतरात्मा के अनुसार मतदान करने की छूट दी गई थी।
विधेयक और इसके राजनीतिक प्रभाव
वक्फ संशोधन विधेयक, 2025, 1995 के वक्फ अधिनियम में बदलाव करके संपत्तियों के प्रबंधन और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग को बेहतर बनाने का प्रयास करता है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में बेहद कम अंतर से पारित हुआ।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बीजेडी पर बीजेपी के दबाव में झुकने का आरोप लगाते हुए कहा, "अगर बीजेडी ने समर्थन न दिया होता, तो विपक्ष की ताकत और ज्यादा होती।"
बीजेडी के भीतर मतभेद हुए उजागर
सांसद सस्मित पात्रा ने विधेयक के पक्ष में मतदान की पुष्टि करते हुए कहा, "पार्टी ने कहा था कि सांसद अपनी अंतरात्मा के अनुसार निर्णय लें... मैंने समर्थन किया।"
बीजेडी सूत्रों के अनुसार:
4 सांसदों ने विधेयक का विरोध किया,
2 ने समर्थन किया,
और 1 ने मतदान से दूरी बनाई।
वरिष्ठ विधायक बद्री नारायण पात्रा ने बड़ा आरोप लगाया कि पार्टी अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से विधेयक का विरोध करने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि नवीन पटनायक ने मुज़ीबुल्ला ख़ान को व्यक्तिगत रूप से दो बार, एक इफ्तार पार्टी में और एक बार फोन पर, इसके खिलाफ वोट डालने को कहा था।
शशि भूषण बेहेरा और भूपिंदर सिंह जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी पार्टी की स्थिति को लेकर भ्रम और चिंता जताई।
पार्टी नेतृत्व से नाराज़गी और मुलाकात
विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं ने नवीन पटनायक से मुलाकात कर पार्टी में व्हिप की कमी और अनुशासनहीनता को लेकर नाराज़गी जताई। आचार्य ने स्पष्ट किया कि बीजेडी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है और एनडीए तथा INDIA गठबंधन, दोनों से दूरी बनाए रखती है।
विपक्ष और भाजपा की प्रतिक्रियाएंबीजेडी में आंतरिक कलह: सस्मित पात्रा के वक्फ विधेयक समर्थन पर घमासान
ओपीसीसी प्रमुख भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि बीजेडी और बीजेपी के बीच एक गुप्त समझौता हुआ है और इशारा किया कि नवीन पटनायक और वी. के. पांडियन के नेतृत्व वाला गुट जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकता है।
वहीं, भाजपा नेता बाबू सिंह ने इस विवाद को "आंतरिक असहमति" करार दिया, जबकि ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
ज्ञात रहे कि राष्ट्रिय लोकदल में भी इस बात पर असंतोष मचा हुआ है और RLD के एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता ने पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीँ बिहार में जेडीयू में भी कुछ ऐसा ही हाल है।