आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में दोबारा जांच की मांग, राज्य सरकार की भूमिका पर उठे सवाल

अगर दोबारा जांच का आदेश दिया जाता है तो इससे विरोध को नई गति मिल सकती है, जो प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने के आरोपों के बीच शांत हो गया है.;

Update: 2025-03-24 15:54 GMT

पिछले अगस्त में आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बलात्कार और हत्या का शिकार हुई पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता ने पश्चिम बंगाल सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि राज्य सरकार मामले की गहराई में जाने के प्रति गंभीर नहीं है. क्योंकि राज्य के वकील ने इस मामले की नई जांच पर सवाल उठाया है, जो ट्रायल के बाद की जाएगी.

यह मामला तब चर्चा में आया, जब आरोप लगाए गए कि राज्य सरकार ने उन डॉक्टरों के खिलाफ एक अभियान चलाया, जो महीनों तक अपने साथी डॉक्टर के लिए न्याय की मांग कर रहे थे. अब, कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले में दोबारा जांच की मांग करने वाले माता-पिता की याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है.

राज्य सरकार के रुख पर सवाल

माता-पिता ने राज्य सरकार के रुख पर स्पष्टता की कमी को लेकर आपत्ति जताई है. डॉक्टर के पिता ने मीडिया से कहा कि राज्य सरकार का रुख पहले दिन से ही अस्पष्ट रहा है. एक ओर यह कह रही है कि उसे नई जांच पर कोई आपत्ति नहीं है. वहीं, दूसरी ओर कानूनी मुद्दों का हवाला देकर जांच को रोकने की कोशिश की जा रही है.

स्पष्टीकरण की मांग

कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस तिर्थांकर घोष ने सीबीआई से सवाल किया कि क्या उसने इस बात पर विचार किया है कि क्या बलात्कार और हत्या में एक से अधिक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या सीबीआई की जांच बलात्कार और हत्या से संबंधित थी या फिर सूबत नष्ट करने के आरोपों पर केंद्रित थी. अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में, 28 मार्च को, जांच डायरी प्रस्तुत करे और पुनः जांच की स्थिति पर जानकारी दे.

ट्रायल कोर्ट का निर्णय

इस साल जनवरी में, ट्रायल कोर्ट ने प्रमुख आरोपी संजय रॉय को बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया और उसे जीवनभर की सजा सुनाई. रॉय, जो एक पुलिस स्वयंसेवक था, को 9 अगस्त के बाद गिरफ्तार किया गया था और सीबीआई ने उसे एकमात्र आरोपी के रूप में नामित किया था. उसके दोषी ठहराए जाने के बाद राज्य सरकार ने राहत की सांस ली थी. हालांकि, पीड़िता के माता-पिता और कई डॉक्टर यह मानने को तैयार नहीं थे कि यह अपराध एक अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया था. उनका आरोप था कि यह एक संस्थागत हत्या थी, जिसका उद्देश्य जूनियर डॉक्टर को एक फर्जी दवा रैकेट का पर्दाफाश करने से रोकना था.

माता-पिता ने उठाए सवाल

पीड़िता के माता-पिता ने अदालत में कुल 54 सवाल उठाए हैं, जिन्हें वे जवाब चाहते हैं. ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी टिप्पणी की थी कि सीबीआई बलात्कार और हत्या के पीछे का उद्देश्य साबित करने में नाकाम रही. हालांकि, उसने घटना को पूर्व-निर्धारित माना था.

राज्य सरकार के लिए मुश्किलें

अगर अदालत ने पुनः जांच का आदेश दिया तो यह राज्य सरकार के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है, खासकर यह आरोप लगाए जाने के बाद कि राज्य सरकार उन डॉक्टरों को टारगेट कर रही है, जो आंदोलन के दौरान अग्रिम पंक्ति में थे.

राज्य का प्रतिशोध

कम से कम दो जूनियर डॉक्टर और चार सीनियर डॉक्टरों को राज्य सरकार के प्रतिशोध का सामना करना पड़ रहा है, जो कथित रूप से इस त्रासदी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों में अग्रिम पंक्ति में थे. पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने चार सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने काउंसिल के कामकाज में रुकावट डाली. इन डॉक्टरों में डॉ. मनास गुमता, डॉ. उत्पल बनर्जी, डॉ. सुबर्णा गोस्वामी और डॉ. रंजन भट्टाचार्य शामिल हैं.

सीनियर डॉक्टर का ट्रांसफर

डॉ. गोस्वामी को हाल ही में पूर्व बर्धमान जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से पदावनत कर दार्जिलिंग टीबी अस्पताल के अधीक्षक के रूप में ट्रांसफर कर दिया गया. यह उनका आठवां ट्रांसफर है, जो वर्तमान टीएमसी सरकार के तहत किया गया है. डॉ. गोस्वामी ने आरोप लगाया कि यह ट्रांसफर उनके आरजी कर अस्पताल के विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी से जुड़ा है.

जूनियर डॉक्टरों की जांच और पुलिस कार्यवाही

आरजी कर अस्पताल के कई जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों, जिनमें अस्फाकुल्ला नइया और किंजल नंदा शामिल हैं, को भी काउंसिल द्वारा जांच का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही, नइया के घर पर पुलिस ने छापा मारा था. आरजी कर अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. तपस प्रमाणिक को "प्रश्न पत्र लीक" के आरोप में चार्ज किया गया है. यह मामला अब न केवल डॉक्टरों के लिए, बल्कि राज्य सरकार के खिलाफ न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है.

Tags:    

Similar News