नेपाल में बेकाबू हो गया राजशाही समर्थक आंदोलन, सेना के हवाले काठमांडू

काठमांडू में शुक्रवार को हिंसक झड़पें के बाद लगा कर्फ्यू हालांकि शनिवार सुबह हटा लिया गया है। लेकिन राजशाही और लोकतंत्र के समर्थकों के बीच तनाव बना हुआ है।;

Update: 2025-03-29 08:46 GMT

नेपाल का समाज 17 साल के बाद एक बार फिर से करवट ले रहा है। नेपाल में राजशाही की वापसी की समर्थक और लोकतंत्र को बनाए रखने वाली ताकतें खुलकर आमने-सामने आ गई हैं। शुक्रवार को तो ये टकराव बहुत हिंसक हो गया।

इस हिंसा में दो लोग मारे गए जबकि सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा के बाद शुक्रवार को राजधानी काठमांडू के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया था। सेना को मैदान में उतारा गया है। हालांकि शनिवार सुबह कर्फ्यू हटा दिया गया, लेकिन तनाव के हालात बने हुए हैं।

कैसे भड़की हिंसा?

शुक्रवार को काठमांडू के कुछ हिस्सों में तब तनाव बढ़ गया जब राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। उन्होंने एक राजनीतिक दल के दफ्तर पर हमला किया।इस दौरान कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और राजधानी के तिनकुने क्षेत्र में दुकानों में लूटपाट की गई।

बेकाबू हुई भीड़

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शन के दौरान 14 इमारतों में आग लगा दी गई और नौ इमारतों में तोड़फोड़ की गई। नौ सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और छह निजी वाहनों में तोड़फोड़ की गई।

इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई झड़प में एक टीवी कैमरामैन समेत दो लोगों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को हुई हिंसक वारदातों में कुल 53 पुलिसकर्मी, सशस्त्र पुलिस बल के 22 जवान और 35 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।

हालात बेकाबू होने लगे तो इमरजेंसी में सेना को बुलाया गया। शुक्रवार से ही काठमांडू में सेना को तैनात कर दिया गया है। काठमांडू में कर्फ्यू शनिवार सुबह 7 बजे हटा लिया गया।

100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि पुलिस ने हिंसा में शामिल 105 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी राजशाही की बहाली और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब विरोध प्रदर्शन के संयोजक दुर्गा प्रसाई ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़कर बुलेटप्रूफ वाहन से बानेश्वर की ओर बढ़ने की कोशिश की। बानेश्वर में नेपाल का संसद भवन स्थित है।

हिंसक भीड़ के हमले

शुक्रवार का राजधानी काठमांडू में अराजकता का सा आलम रहा। प्रदर्शनकारियों ने तिनकुने इलाके में कांतिपुर टेलीविजन भवन और 'अन्नपूर्णा मीडिया हाउस' पर भी हमला किया।

राजशाही की बहाली की मांग क्यों?

नेपाल में 2008 में संसद द्वारा 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर दिया गया था और देश को धर्मनिरपेक्ष, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया था। हालांकि, तब से राजशाही समर्थक इसके पुनर्स्थापन की मांग कर रहे हैं।

पूर्व नरेश की भूमिका

नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह ने 19 फरवरी को लोकतंत्र दिवस पर एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें अपने समर्थकों से राजशाही की वापसी के लिए समर्थन की अपील की थी।

जिसके बाद राजशाही समर्थकों का आंदोलन तेज हो गया। नौ मार्च को भी समर्थकों ने पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के पक्ष में एक रैली निकाली थी, जब अलग-अलग धार्मिक स्थलों का दौरा करके काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे।

राजशाही के समर्थकों की दलील है कि गणतंत्र व्यवस्था ने नेपाल की दुर्गति कर दी है। लेकिन लोकतंत्र समर्थक पार्टियों राजशाही की वापसी का विरोध कर रही हैं।nepal-kathmandu-clashes-pro-monarchy-protesters-arrested-deadly-violence-

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