US में अपमान यूरोप में सम्मान, जेलेंस्की मुद्दे पर क्या NATO बिखरेगा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की संग ट्रंप- वैंस के व्यवहार की यूरोपीय देश आलोचना कर रहे हैं। सवाल यहां ये कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध कोई और रूप लेने जा रहा है।;
Zelensky News: इसे कहते हैं समय का फेर। तीन साल से चल रहे रूस-यूक्रेन यु्द्ध में अमेरिका पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है, हालांकि इसके संकेत पहले ही मिल चुके थे। ओवल ऑफिस में मिनरल डील के सिलसिले में जेलेंस्की, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और वाइस प्रेसीडेंट जे डी वैंस (JD Vance) बैठे हुए थे। बातचीत सामान्य तरह से शुरू हुई। लेकिन मामला तब खराब हो गया जब तीखी बहस होने लगी। जेलेंस्की के साथ इस व्यवहार पर यूरोपीय देशों ने आपत्ति जताई। इस समय जेलेंस्की यूरोपीय देशों के प्रमुखों से मिल रहे हैं। मुलाकात के क्रम में उन्होंने ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर से यूद्ध में सहयोग देने के लिए धन्यवाद किया। कीर स्टार्मर ने कहा कि आप का बहुत बहुत स्वागत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके यूक्रेनी समकक्ष वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच विवाद पर बोलते हुए, यूरोपीय संघ के आयुक्त एंड्रियस कुबिलियस (Andrius Kubilius) ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना की और कहा कि एक ऐसे देश के राष्ट्रपति के साथ व्यवहार करने का यह अस्वीकार्य तरीका है जो अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुबिलियस, जो रक्षा उद्योग और अंतरिक्ष के लिए यूरोपीय आयुक्त हैं, ने यह भी कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी और यूरोपीय आयोग देश के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है।लिथुआनिया के पूर्व प्रधानमंत्री कुबिलियस ने कहा, "यह किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति का स्वागत करने का एक पूरी तरह से समझने में मुश्किल और अस्वीकार्य तरीका था, जो अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
- कीर स्टार्मर ने जेलेंस्की से कहा कि पूरा ब्रिटेन उनके साथ है
- ब्रिटेन ने यूक्रेन को 2.6 बिलियन डॉलर का लोन भी दिया
अमेरिका पर भड़का है यूरोपीय आयोग
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित कई यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। जेलेंस्की और यूक्रेन को संदेश दिया है कि वे अकेले नहीं खड़े होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम की रणनीति अभी भी हमारे लिए स्पष्ट नहीं है। आयुक्त ने कहा कि म्यूनिख सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ को अजीब संदेश मिलने लगे थे, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कई बिंदुओं पर संघ की आलोचना की थी। इस बात पर जोर देते हुए कि यूरोपीय संघ में हर कोई यूक्रेन में शांति के लिए खड़ा है, उन्होंने आगे कहा, "यूक्रेनी वास्तव में शांति के हकदार हैं और वे ही शांति की सबसे प्रबल इच्छा रखते हैं। लेकिन न्यायपूर्ण शांति केवल शक्ति के माध्यम से शांति के सूत्र के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।
क्या है नाटो
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) में कुल 12 सदस्य हैं। बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका। इस संगठन का मकसद सदस्य देशों को बाहरी हमले की सूरत में सुरक्षा प्रदान करना था। जिस वक्त इस संगठन की स्थापना की गई दुनिया दो धड़ों में मुख्य तौर पर बंटी हुई थी।
रूस के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए यूरोप के देश और अमेरिका इस संकल्पना के साथ आए। उतार-चढ़ाव के बीच यह संगठन काम करता रहा। लेकिन जब इस तरह की जानकारी रूस को मिली कि यूक्रेन, नाटो का सदस्य देश होना चाहता है तो तस्वीर खराब हुई। ट्रंप से पहले का प्रशासन यानी बाइडेन प्रशासन यूक्रेन के साथ पूरी तरह से खड़ा रहा। लेकिन ट्रंप का नजरिया शुरू से अलग था। ट्रंप सत्ता में हैं और उनकी कोशिश है कि रूस-यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच शांति स्थापित हो। हालांकि वो युद्ध के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार भी मानते हैं। लेकिन यूरोपीय देश खुलकर जेलेंस्की के साथ खड़े हैं, ऐसे में नाटो के भविष्य पर भी संकट उठ खड़ा हुआ है।