जानें क्यों फूड डिलिवरी स्टार्टअप्स पर भड़के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, क्या बोले चीन पर

पीयूष गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स पर हमला बोलते हुए कहा, हमारे पास है फूड डिलिवरी, बेटिंग और स्पोर्ट्स ऐप्स है जबकि चीन AI और EV पर काम कर रहा है.;

Update: 2025-04-04 08:33 GMT
Piyush Goyal At Startup Mahakumbh

Piyush Goyal On Startups: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा, हमारे यहां स्टार्टअप्स फूड डिलीवरी ऐप्स बनाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं और सस्ता लेबर फोर्स तैयार कर रही हैं जिससे अमीर घर से निकले बगैर आराम से घर में ही भोजन कर सकें जबकि चीन के स्टार्टअप्स इसकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस कर रहे हैं.

पीयूष गोयल ने स्टार्टअप्स से किया सवाल

स्टार्टअप महाकुंभ को संबोधित करते हुए, पीयूष गोयल ने सवाल किया कि क्या देश कम वेतन वाली गिग नौकरियों को अपनाकर टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को दूर नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "क्या हम आइसक्रीम बनाएंगे या चिप्स? क्या हम सिर्फ रिटेल के लिए बने हैं?" उन्होंने कहा, "क्या हम सिर्फ डिलीवरी बॉय और गर्ल्स बनकर संतुष्ट हो जाएंगे? क्या यही भारत का भविष्य है? यह स्टार्टअप कल्चर नहीं, बल्कि सिर्फ एंटरप्रेन्योरशिप है." उन्होंने स्टार्टअप्स से सार्थक इनोवेशन पर ध्यान देने को कहा है.

कम वेतन वाली गिग नौकरियों में लग रहे युवा

चीन के डीप-टेक फोकस की ओर इशारा करते हुए पीयूष गोयल ने कहा, "आज भारतीय स्टार्टअप क्या कर रहे हैं? हम फूड डिलीवरी ऐप्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां बेरोजगार युवा कम वेतन वाली गिग नौकरियों में लग रहे हैं ताकि अमीर लोग बिना बाहर निकले खाना मंगवा सकें." उन्होंने भारत में डीप-टेक स्टार्टअप्स की संख्या के कम होने पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, "स्टार्टअप्स को सिर्फ शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट नहीं, बल्कि देश के भविष्य की तैयारी करनी चाहिए." गोयल ने यह भी अफसोस जताया कि कई होनहार भारतीय स्टार्टअप विदेशी कंपनियों को मामूली रकम पर बेचा जा रहा है. उन्होंने कहा, "यह सुनकर निराशा होती है कि एक युवा स्टार्टअप की बेहतरीन आइडिया को महज 25-50 लाख रुपये में किसी विदेशी कंपनी को बेच दिया जाता है."

लोकल चैंपियंस है बढ़ावा देने की जरूरत

हालांकि पीयूष गोयल के इस बयान की आलोचना भी हो रही है. ज़ेप्टो के सीईओ आदित पलीचा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि सरकार को लोकल चैंपियंस" को बढ़ावा देने की जरूरत है, न कि ऐसे स्टार्टअप्स को हतोत्साहित करने की जो तकनीकी क्रांति लाने की कोशिश कर रहे हैं. आदित पलीचा ने कहा, भारतीय उपभोक्ता इंटरनेट स्टार्टअप्स की आलोचना करना आसान है. अमेरिका और चीन की गहरी तकनीकी श्रेष्ठता से तुलना करना आसान है, लेकिन जमीनी हकीकत को समझना भी जरूरी है. उन्होंने ज़ेप्टो का उदाहरण देते हुए बताया, "आज लगभग 1.5 लाख लोग ज़ेप्टो के जरिए अपनी आजीविका कमा रहे हैं. एक ऐसी कंपनी जो 3.5 साल पहले अस्तित्व में भी नहीं थी." 

उन्होंने कहा ज़ेप्टो हर साल सरकार को ₹1,000 करोड़ से ज्यादा टैक्स देती है. भारत में $1 बिलियन से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लेकर आई है. ताज़े फलों और सब्ज़ियों की सप्लाई चेन को संगठित करने में सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है. उन्होंने जोर देते हुए कहा, "अगर यह भारतीय इनोवेशन का चमत्कार नहीं है, तो फिर क्या है?" पलीचा ने यह भी सवाल उठाया कि भारत के पास अभी तक गूगल, ओपनएआई या चीन जैसी कंपनियों के बड़े पैमाने पर एआई मॉडल क्यों नहीं हैं। उनके अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत ने अब तक मजबूत इंटरनेट कंपनियां खड़ी नहीं की है.

भारतीय स्टार्टअप्स को "छोटा दिखाने" पर भड़के मोहनदास पई

मोदी सरकार के समर्थक माने जाने वाले इंफोसिस के पूर्व अधिकारी मोहनदास पई ने भारतीय स्टार्टअप्स को "छोटा दिखाने" का विरोध किया. उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह अनुचित तुलना है. पीयूष गोयल को यह पूछना चाहिए कि उन्होंने मंत्री के रूप में भारत में डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए क्या किया? उंगली उठाना आसान है." मोहनदास पई ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि स्टार्टअप्स को वर्षों तक "एंजल टैक्स" और निवेश प्रतिबंधों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है. एंडोमेंट्स को निवेश करने से रोका और बीमा कंपनियों को भाग लेने से मना किया, जबकि वैश्विक बाजारों में ऐसा नहीं होता है. आरबीआई भी अभी तक विदेशी निवेशकों को रेमिटेंस पर परेशान कर रहा है.

पीयूष गोयल से बयान से बढ़ा विवाद 

जानें क्यों फूड डिलिवरी स्टार्टअप्स पर भड़के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, क्या बोले चीन परबहरहाल पीयूष गोयल के भारतीय स्टार्टअप्स को लेकर दिया गया बयान अब इन कंपनियों को रास नहीं आ रहा है.

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