UDISE रिपोर्ट का खुलासा,शिक्षक बढ़े लेकिन स्कूलों की चुनौतियां जस की तस

भारत में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ पार, महिला शिक्षकों में तेजी से बढ़ोतरी, छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरा, लेकिन राज्यों में असमानता बरकरार है।;

Update: 2025-08-29 05:13 GMT

भारत में पहली बार किसी शैक्षणिक सत्र में शिक्षकों की संख्या एक करोड़ से अधिक दर्ज की गई है। हालांकि, चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। देशभर में 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं जहाँ केवल एक ही शिक्षक है, जबकि 7,993 स्कूलों में कोई छात्र नामांकित नहीं है। अच्छी बात यह है कि पिछले सत्र की तुलना में इन दोनों आँकड़ों में कमी आई है। ये तथ्य यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) की 2024-25 की रिपोर्ट में सामने आए हैं।

महिला शिक्षकों की संख्या में तेजी से इज़ाफ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो 2024-25 में बढ़कर 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार 420 हो गए। इनमें से 51% यानी 51.47 लाख शिक्षक सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं।

पिछले एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2014-15 में जहां पुरुष शिक्षक 45.46 लाख और महिलाएँ 40.16 लाख थीं, वहीं 2024-25 में पुरुष 46.41 लाख और महिला 54.81 लाख हो गई हैं। इसका बड़ा कारण नई भर्तियाँ हैं—2014 से अब तक हुई 51.36 लाख भर्तियों में 61% महिला शिक्षकों की रही हैं।

छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार

बीते दस वर्षों में छात्र-शिक्षक अनुपात में सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है।

मिडिल स्तर पर: 26 से घटकर 17 छात्र प्रति शिक्षक

सेकंडरी स्तर पर: 31 से घटकर 21 छात्र प्रति शिक्षक

इसका मतलब है कि अब शिक्षकों के पास छात्रों को बेहतर समय और ध्यान देने का अवसर है।

ड्रॉपआउट रेट भी घटा है

सेकंडरी स्तर पर 10.9% से घटकर 8.2%

मिडिल स्तर पर 5.2% से घटकर 3.5%

प्राथमिक स्तर पर 3.7% से घटकर 2.3%

वहीं रिटेंशन रेट में बढ़ोतरी हुई है:

प्राथमिक: 85.4% से 92.4%

मिडिल: 78% से 82.8%

सेकंडरी: 45.6% से 47.2%

सेकंडरी स्तर पर नामांकन दर भी बढ़कर 68.5% तक पहुंच गई है।

राज्यों में असमानता

शिक्षा प्रणाली में राज्यों के बीच असमानताएँ साफ झलकती हैं।झारखंड में हायर सेकंडरी स्तर पर एक शिक्षक के पास औसतन 47 छात्र हैं, जबकि सिक्किम में यह केवल 7 है।चंडीगढ़ में प्रति स्कूल औसतन 1222 छात्र हैं, वहीं लद्दाख में यह संख्या 59 है।प्राथमिक स्कूलों की संख्या सबसे अधिक पश्चिम बंगाल (80%) में है और सबसे कम चंडीगढ़ (3%) में।

नामांकन अनुपात (GER)

ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) में बिहार सभी स्तरों पर सबसे नीचे है। अपर प्राइमरी: 69%,सेकंडरी: 51%,हायर सेकंडरी: 38% वहीं चंडीगढ़ में GER सबसे ऊँचा है। अपर प्राइमरी: 120%,मिडिल: 110%, हायर सेकंडरी: 107%।

जीरो एडमिशन वाले स्कूलों की संख्या आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक है। अगर आंकड़ों को देखें तो आंध्र प्रदेश में 12912, उत्तर प्रदेश में 9508, झारखंड में 9172, महाराष्ट्र में 8152, मध्य प्रदेश में 7217, पश्चिम बंगाल में 6482, राजस्थान में 6117, छत्तीसगढ़ में 5973, हिमाचल प्रदेश में 2964, गुजरात में 2936, पंजाब में 2431, बिहार में 1865 और हरियाणा में 1066 है।

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