'अदालतें दबाव में?' मदनी बोले—SC को 'सुप्रीम' कहने का हक नहीं

मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी तक ‘सुप्रीम’ है, जब तक वहां संविधान सुरक्षित है। अगर संविधान की रक्षा नहीं होगी तो यह नाम का हकदार नहीं रहेगा।

Update: 2025-11-29 10:15 GMT
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भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने हाल के कुछ न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद और तीन तलाक जैसे मामलों में आए फैसलों से ऐसा लगता है कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। मदनी के अनुसार, कई फैसलों में संविधान द्वारा दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुला उल्लंघन दिखाई देता है।

उपासना स्थल अधिनियम 1991 का जिक्र

उन्होंने कहा कि Places of Worship Act, 1991 के बावजूद कुछ मामलों में जिस तरह की कार्रवाई हुई है, वह चिंता की बात है। मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी तक ‘सुप्रीम’ है, जब तक वहां संविधान सुरक्षित है। अगर संविधान की रक्षा नहीं होगी तो यह नाम का हकदार नहीं रहेगा।

60 प्रतिशत लोग खामोश

मौलाना मदनी ने देश में लोगों की सोच को तीन हिस्सों में बांटते हुए कहा कि 10% लोग मुसलमानों के पक्ष में हैं। 30% लोग मुसलमानों के खिलाफ हैं और 60% लोग खामोश हैं। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इन 60 प्रतिशत शांत लोगों से बातचीत करें और अपनी बात तकलीफ और डर के बजाय समझदारी से उनके सामने रखें। मदनी ने चेतावनी दी कि अगर ये 60 प्रतिशत लोग भी मुसलमानों के खिलाफ हो गए तो देश में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

जिहाद पर बयान

मदनी ने ‘जिहाद’ शब्द के गलत इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार और मीडिया एक पवित्र शब्द को गलत तरीके से लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “लव जिहाद”, “थूक जिहाद”, “जमीन जिहाद” जैसे शब्द बनाकर जिहाद को बदनाम किया जा रहा है, जबकि जिहाद हमेशा अच्छाई, भलाई और इंसाफ के लिए होता है।

उन्होंने दोहराया कि जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है, जहां मुसलमान संविधान के प्रति वफादार हैं। यहां जिहाद की कोई लड़ाई नहीं है, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे।

वंदे मातरम पर बयान

‘वंदे मातरम’ मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा कि मुर्दा कौमें डरकर सरेंडर कर देती हैं। उन्हें कहा जाएगा वंदे मातरम बोलो तो वे बोलना शुरू कर देंगी। यह एक मुर्दा कौम की पहचान है। अगर कौम जिंदा है तो हालात का मुकाबला करना पड़ेगा।

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