POEM-4 मिशन: इसरो की अंतरिक्ष में नई उपलब्धि, स्पेस मलबे को कम करने की अहम भूमिका

ISRO: इस मिशन ने साबित किया कि इसरो अंतरिक्ष मलबे को कम करने और अंतरिक्ष की सुरक्षा बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभा रहा है.;

Update: 2025-04-05 04:54 GMT

POEM-4 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार रात को पुष्टि की कि PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-4) ने 4 अप्रैल 2025 को पृथ्वी के वातावरण में सफलतापूर्वक दोबारा प्रवेश कर लिया है. यह घटना रात 2:33 UTC (8:03 IST) पर हुई और POEM-4 भारतीय महासागर में गिरा. यह प्रक्रिया इसरो की अंतरिक्ष मलबे को कम करने और स्थिर अंतरिक्ष संचालन की दिशा में एक और सफलता है. इसको लेकर इसरो का कहना है कि यह सफलता इसरो की बाहरी अंतरिक्ष की सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM) के उद्देश्य को पूरा करती है.

POEM-4 मिशन

POEM-4, जो PSLV-C60 रॉकेट का खास ऊपरी चरण था, 30 दिसंबर 2024 को स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SpaDeX) मिशन के तहत लॉन्च किया गया था. इसने 475 किलोमीटर की ऊंचाई पर सैटेलाइट को सफलतापूर्वक छोड़ा और फिर उसी कक्षा में रहा. इसरो के इंजीनियरों ने POEM-4 को एक नई कक्षा में लाने के लिए इंजन रिस्टार्ट किया, जिससे वह लगभग 350 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में पहुंच गया. इसके बाद, PS4 चरण को निष्क्रिय किया गया, ताकि दुर्घटनाओं के खतरे को कम किया जा सके.

24 पेलोड्स और वैज्ञानिक डेटा

POEM-4 ने पूरे मिशन के दौरान कुल 24 पेलोड्स (साइंटिफिक उपकरण) का संचालन किया. इनमें से 14 पेलोड्स इसरो के थे और 10 अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं के. इन पेलोड्स ने वैज्ञानिक डेटा एकत्र किया, जो बहुत ही उपयोगी साबित हुआ.

रोबोटिक आर्म और नए प्रयोग

POEM-4 में कई नई चीजें की गईं. पहली बार इसरो ने एक रोबोटिक आर्म भेजा, जो अंतरिक्ष मलबे को इकट्ठा करने के प्रयोग में था. इसके साथ ही भारत के पहले एस्ट्रोबायोलॉजी पेलोड्स भी इस मिशन का हिस्सा थे, जो छात्रों द्वारा विकसित किए गए थे. ये पेलोड्स बैंगलोर के RV कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और मुंबई के एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए थे.

पूरे मिशन के दौरान POEM-4 को इसरो और संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतरिक्ष कमान (USSPACECOM) द्वारा लगातार ट्रैक किया गया. इन आंकड़ों का उपयोग इस बात का अनुमान लगाने के लिए किया गया कि POEM-4 कब और कहां पृथ्वी के वातावरण में पुनः प्रवेश करेगा. अंतिम चरण में इसरो के IS4OM (सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशंस मैनेजमेंट) ने POEM-4 की कक्षा को बारीकी से देखा, जब वह 174 किलोमीटर × 165 किलोमीटर की कक्षा में आया. जैसे ही POEM-4 का पुनः प्रवेश हुआ, इसरो ने नियमित रूप से अपडेट जारी किए.

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