वक्फ प्रॉपर्टी बेहिसाब लेकिन जनकल्याण में पीछे, सरकार ने रखी तस्वीर

वक्फ संशोधन बिल पर मतदान होने से पहले कल रात को लोकसभा में सरकार ने वो वजहें विस्तार से बताईं कि ये बिल लाया क्यों गया है। उसने कुछ चौंकाने वाला डेटा भी रखा।;

Update: 2025-04-03 05:52 GMT
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कल रात लोकसभा में वक्फ की संपत्तियों का ब्यौरा भी रखा

वक्फ संशोधन बिल पर चली बहस के दौरान सरकार ने लोकसभा में ये स्पष्ट कर दिया कि उसके पास इस बिल को लाने की पर्याप्त वजहें हैं। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस के दौरान आधी रात को वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा रखा और बताया कि इनका इस्तेमाल जन कल्याण के कामों के लिए नहीं किया जा रहा है।

किरेन रिजिजू ने वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाली चैरिटेबल प्रॉपर्टी और कमर्शियल प्रॉपर्टीज का अलग-अलग ब्यौरा रखा। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कैसे वक्फ बोर्ड जनहित के कामों में पीछे हैं।

किसके वेलफेयर के लिए वक्फ?

रिजिजू ने बताया कि स्कूलों के नाम पर वक्फ के पास देशभर में करीब 1389 एकड़ जमीन है लेकिन जनकल्याण के लिए उसका केवल .037 % ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह मदरसे के नाम पर वक्फ के पास 1,85,756 एकड़ जमीन है लेकिन वेलफेयर यानी जनकल्याण में उसका केवल 4.9 % ही उपयोग किया जा सका है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजिजू ने बताया कि देशभर में 4710 एकड़ जमीन वक्फ के पास मुसाफिरखाना के नाम पर है लेकिन जनहित में केवल 0.12% जमीन का ही इस्तेमाल किया गया है।

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व्यावसायिक संपत्ति बनाम जनकल्याण

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने लोकसभा में कहा, "वक्फ के पास देशभर में 6,27,692 एकड़ कृषि भूमि है लेकिन जनकल्याण के लिए केवल 16.7% भूमि का ही उपयोग किया जा सका है।"

रिजिजू ने आगे बताया, "इसी तरह वक्फ के पास जो कमर्शियल बिल्डिंगें हैं वो कुल 5994 एकड़ एरिया में हैं लेकिन उनका सिर्फ 0.1% ही वेलफेयर के लिए इस्तेमाल होता है।"

कितने काम की ईदगाह?

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए ये भी बताया कि वक्फ के पास ईदगाह के नाम पर कितनी जमीन है। उन्होंने बताया कि वक्फ के पास देशभर में 2,85,256 एकड़ जमीन पर ईदगाह हैं लेकिन महज 7.6% का ही जनकल्याण के कामों में इस्तेमाल हो पा रहा है।

रिजिजू ने ये भी बताया कि देशभर में इमामबाड़ा, कब्रिस्तान, मजार या दरगाह का वेलफेयर के लिए 1% से भी कम उपयोग हो रहा है।

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