क्या पैरासिटामॉल आपको एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बना रही है? ओवर-द-काउंटर दवाओं के उपयोग पर एक नई स्टडी

OTC दवाएं, सुपरबग्स और एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस अध्ययन: यह अध्ययन हमें याद दिलाता है कि हमें कई दवाओं के इस्तेमाल के जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, खासकर बुजुर्गों की देखभाल में।;

Update: 2025-08-29 13:20 GMT
इस तरह के पहले अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि इबुप्रोफेन और पैरासिटामोल न केवल अलग-अलग इस्तेमाल किए जाने पर एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस (प्रतिरोधक क्षमता) को बढ़ाते हैं, बल्कि साथ में लेने पर इसे और भी अधिक बढ़ा देते हैं। (फाइल फोटो)

दुनिया के पहले ऐसे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि इबुप्रोफेन और पैरासिटामॉल न केवल अलग-अलग लेने पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) को बढ़ावा देते हैं बल्कि दोनों को साथ लेने पर यह प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस

जब भी हमें बुखार या शरीर में दर्द होता है तो हम पैरासिटामॉल (एसिटामिनोफेन) और इबुप्रोफेन जैसी आम OTC दवाओं का सेवन करते हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के नए शोध से पता चलता है कि ये दवाएं चुपचाप एंटीबायोटिक प्रतिरोध को जन्म दे सकती हैं।

शोधकर्ताओं ने इन दवाओं की ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लॉक्सासिन और ई. कोलाई, जो आंत और मूत्र संक्रमण का सामान्य कारण है, के साथ प्रतिक्रिया का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि इबुप्रोफेन और एसिटामिनोफेन ने बैक्टीरिया में बड़े पैमाने पर उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) पैदा किए, जिससे ई. कोलाई अत्यधिक प्रतिरोधी हो गया।

अधिकांश लोग जानते हैं कि एंटीबायोटिक का ज़्यादा उपयोग प्रतिरोध पैदा कर सकता है। लेकिन बहुत कम लोग समझते हैं कि दूसरी दवाएं, खासकर वे जिन्हें हम हानिरहित मानते हैं जैसे इबुप्रोफेन और पैरासिटामॉल भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं।

एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस क्या है?

यह आज की दुनिया की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। यह तब होता है जब बैक्टीरिया ऐसे बदलाव कर लेते हैं जिनसे एंटीबायोटिक कम असरदार या बेअसर हो जाती है।

डॉ. सुरंजनित चटर्जी (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली) कहते हैं, “इसके परिणामस्वरूप सामान्य संक्रमण जैसे मूत्र संक्रमण, निमोनिया या यहां तक कि छोटे घाव और कट भी इलाज में कठिन या असंभव हो सकते हैं।”

अध्ययन में क्या पाया गया?

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया की एसोसिएट प्रोफेसर राइटी वेंटर कहती हैं,“जब बैक्टीरिया को सिप्रोफ्लॉक्सासिन के साथ इबुप्रोफेन और एसिटामिनोफेन के संपर्क में लाया गया, तो उनमें एंटीबायोटिक अकेले की तुलना में ज्यादा जेनेटिक म्यूटेशन हुए। इससे वे तेजी से बढ़े और अत्यधिक प्रतिरोधी हो गए। चिंताजनक बात यह रही कि ये बैक्टीरिया सिर्फ सिप्रोफ्लॉक्सासिन के खिलाफ ही नहीं बल्कि अलग-अलग वर्ग की कई दूसरी एंटीबायोटिक्स के प्रति भी प्रतिरोधी हो गए।”

क्यों OTC दवाएं हानिरहित नहीं हो सकतीं?

इबुप्रोफेन और पैरासिटामॉल दुनिया की सबसे आम OTC दवाओं में से हैं, जिन्हें दर्द, बुखार, सूजन और सिरदर्द के लिए लिया जाता है।

डॉ. चटर्जी बताते हैं, “ये सुरक्षित मानी जाती हैं और लगभग हर घर में मिलती हैं। लेकिन अब लगता है कि इनका हमारे शरीर में मौजूद बैक्टीरिया पर अनचाहा असर हो सकता है। हमारे शरीर में खरबों बैक्टीरिया रहते हैं, कुछ अच्छे और कुछ हानिकारक। ये सब हमारी हर खुराक और दवा से प्रभावित होते हैं।”

ये दवाएं बैक्टीरिया को तनाव (stress) में डाल सकती हैं। यह सुनने में अच्छा लगता है क्योंकि तनाव से बैक्टीरिया मर सकते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।

“कभी-कभी जब बैक्टीरिया तनाव में आते हैं तो वे जीवित रहने के लिए नए तरीके खोज लेते हैं। इसमें वे अपना ढांचा बदल लेते हैं ताकि भविष्य में एंटीबायोटिक का असर उन पर न हो। और भी चिंताजनक बात यह है कि जब इबुप्रोफेन और पैरासिटामॉल को साथ लिया जाता है तो इसका असर और तेज हो जाता है और बैक्टीरिया तेजी से प्रतिरोधी बन जाते हैं।”

अध्ययन की चेतावनी

यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि हमें कई दवाओं को साथ लेने के खतरों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए — खासकर बुजुर्गों की देखभाल में जहां लंबे समय तक कई दवाएं दी जाती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। 2019 में बैक्टीरियल रेज़िस्टेंस के कारण 12.7 लाख वैश्विक मौतें सीधे तौर पर हुई थीं।

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