ट्रंप-जेलेंस्की बहस: इतिहास की अभूतपूर्व घटना! कुटनीतिक इतिहास में नहीं देखा गया पहले ऐसा

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मतभेद की जड़ यह है कि ट्रंप ने फरवरी 2022 में रूस के द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.;

Update: 2025-03-01 09:26 GMT

व्हाइट हाउस में 28 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच ओवल ऑफिस में हुई सार्वजनिक बहस कूटनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी. व्हाइट हाउस में कभी भी शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह की तीव्र सार्वजनिक बहस नहीं हुई थी.

हालांकि, पर्दे के पीछे ऐसी कड़ी वार्ताएं पहले भी हुई हैं. साल 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के बीच हुई बातचीत याद आती है. इस बातचीत में पाकिस्तान द्वारा पूर्व पाकिस्तान (जो बाद में बांग्लादेश बना) में किए गए नरसंहार को लेकर मतभेद थे. निक्सन ने पाकिस्तान का समर्थन किया और भारत को सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए कहा. क्योंकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने उन्हें चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने में मदद की थी.

यह पुरानी बातचीत इसलिए प्रासंगिक है. क्योंकि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह परवाह नहीं की थी कि आक्रमणकारी कौन है और पीड़ित कौन, उनका ध्यान केवल अमेरिकी हितों पर था. इंदिरा गांधी ने इस वास्तविकता को निक्सन के सामने रखा. लेकिन उन्होंने इसे नकार दिया. इस कड़ी वार्ता का मुख्य पहलू यह था कि यह सब पर्दे के पीछे हुआ और मीडिया के सामने नहीं आया. लेकिन व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच जो हुआ, वह न केवल सार्वजनिक था, बल्कि बहुत तीव्र और नाटकीय था.

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मतभेद की जड़ यह है कि ट्रंप ने फरवरी 2022 में रूस के द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. भले ही यूरोप और अमेरिका ने रूस को उत्तेजित किया हो. लेकिन यह आक्रमण किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता. ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडन, यूरोपीय नेताओं और दुनिया के अधिकांश देशों ने इस हमले को स्वीकार किया है. लेकिन ट्रंप ने इसका विरोध किया. ओवल ऑफिस में ट्रंप ने कहा कि उनका ध्यान दोनों पक्षों के बीच एक समझौते पर था और इसलिए उन्हें पुतिन की आलोचना नहीं करनी चाहिए थी. लेकिन उन्होंने आगे यह भी कहा कि पुतिन को उनके राजनीतिक विरोधियों ने निशाना बनाया. इस बयान से ट्रंप ने पुतिन के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की.

असल में, इस पूरे मामले की जड़ यह थी कि जेलेंस्की चाहते थे कि अमेरिकी और यूरोपीय देश सुरक्षा गारंटी दें, यानी अपने सैनिकों को यूक्रेन में तैनात करें. उनका कहना था कि पुतिन ने कई संघर्ष विराम समझौतों का उल्लंघन किया है और बिना सुरक्षा गारंटी के, कोई समझौता बेकार होगा. जेलेंस्की की प्राथमिकता सुरक्षा गारंटी थी. जबकि ट्रंप के लिए यह मिनरल्स डील अधिक महत्वपूर्ण थी. इस डील के माध्यम से अमेरिका को यूक्रेन के दुर्लभ खनिज संसाधनों का उपयोग मिल सकता है, जो अमेरिकी उद्योग के लिए बेहद आवश्यक हैं. ट्रंप ने यह डील इस उद्देश्य से की थी कि वह अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दिए गए वित्तीय और सैन्य समर्थन को पूरा कर सकें.

एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका ने अब तक यूक्रेन को 67 अरब डॉलर के हथियार और 41.5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है. ट्रंप इस बात से नाराज हो गए जब ज़ेलेन्स्की ने यह दावा किया कि अमेरिका और यूरोप ने यूक्रेन की समान मदद की है. ट्रंप का कहना था कि अमेरिका ने कहीं अधिक सहायता की है.

ओवल ऑफिस में इस तनावपूर्ण बैठक के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि वह "एक व्यापारी हैं" और यूरोपीय सहायता लोन के रूप में थी, जबकि अमेरिकी सहायता अनुदान के रूप में थी. यह वाक्यांश यह दर्शाता है कि ट्रंप के लिए इस समझौते की प्राथमिकता व्यापारिक लाभ था. जबकि जेलेंस्की के लिए यह सुरक्षा का सवाल था. ट्रंप ने यह भी कहा कि सुरक्षा गारंटी केवल "2% समस्या" थी, जो कि जेलेंस्की के लिए बिलकुल अस्वीकार्य था. क्योंकि उनकी सेना युद्ध में शामिल थी.

बैठक तब और भी विवादित हो गई जब जेलेंस्की ने पुतिन के खिलाफ की गई आलोचना को नकारा. ट्रंप के पुतिन के साथ अच्छे रिश्ते हैं और वह जेलेंस्की को यह बताना चाहते थे कि उनकी सरकार ने पुतिन के खिलाफ बहुत कठोर रुख अपनाया था. जेलेंस्की ने पुतिन के खिलाफ जो बयान दिए थे, वह ट्रंप के दावों से मेल नहीं खाते थे, जिनके अनुसार रूस यूक्रेन पर आक्रमण नहीं करता अगर वह राष्ट्रपति होते.

ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी कि यूक्रेन के पास कोई ताकत नहीं है और वह एक मुश्किल स्थिति में हैं, जहां हजारों सैनिक हर हफ्ते मर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकती है. ट्रंप ने शांति के मध्यस्थ के रूप में अपने आप को पेश किया और कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य शांति स्थापित करना है. मेरा पूरा जीवन सौदे करने में बीता है.

जब वेंस ने जेलेंस्की को ट्रंप की कूटनीति का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया तो बैठक और भी तनावपूर्ण हो गई. उन्होंने ज़ेलेन्स्की पर ट्रंप के प्रयासों का धन्यवाद न करने और ओवल ऑफिस में उनका अपमान करने का आरोप लगाया. जेलेंस्की ने इसका विरोध किया और ट्रंप ने वेंस का समर्थन करते हुए जेलेंस्की पर प्रहार किया. यही वह बिंदु था जब बैठक पूरी तरह से टूट गई.

जेलेंस्की से व्हाइट हाउस छोड़ने को कहा गया. हालांकि, मीडिया के सामने नहीं. मिनरल्स डील पर हस्ताक्षर रद्द कर दिए गए और ट्रंप अपने फ्लोरिडा स्थित घर लौट गए. जेलेंस्की ने फॉक्स न्यूज के इंटरव्यू में कुछ क्षति को सुधारने की कोशिश की और कहा कि वह और उनका देश अमेरिकी लोगों के आभारी हैं. लेकिन यह संभावना नहीं है कि ट्रंप और उनके सहयोगी इससे संतुष्ट होंगे. वे चाहते थे कि जेलेंस्की पद छोड़ दें, ताकि वे किसी और यूक्रेनी नेता से बातचीत कर सकें.

यह कहना गलत नहीं होगा कि यूक्रेन युद्ध में शांति की संभावना अब और भी कठिन हो गई है. ओवल ऑफिस में हुई इस घटनाक्रम के बाद यूरोपीय नेता और यूक्रेन के सुरक्षा मामले को लेकर और भी चिंतित होंगे. रूस इस स्थिति से खुश होगा और स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब व्हाइट हाउस की इस घटना के बाद क्या रुख अपनाएगा.

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