टीएमसी-भाजपा की खींचतान से अलग, कांग्रेस पर टिकीं मतुआ समाज की उम्मीदें
मतुआ समुदाय टीएमसी-भाजपा खींचतान से निराश होकर तीसरे विकल्प की तलाश में है। बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के बाद राहुल गांधी से उम्मीदें बढ़ीं हैं।;
राजनीतिक संघर्ष की चपेट में आए पश्चिम बंगाल के दूसरे सबसे बड़े अनुसूचित जाति (SC) समुदाय मतुआ अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच की खींचतान से निकलकर तीसरे विकल्प की तलाश करते दिख रहे हैं। इस सप्ताह मतुआ समुदाय का एक प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने का अनुरोध किया, जिसकी जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता चंदन घोष चौधरी ने द फेडरल को दी। अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार (29 अगस्त) को बताया कि मतुआ प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी की चल रही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ (बिहार) में शामिल होने की इच्छा जताई है।
कांग्रेस से जुड़ने की इच्छा
चौधरी ने कहा, “वे बड़ी संख्या में यात्रा में भाग लेना चाहते हैं और राहुल गांधी को ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है। मैंने उनका संदेश केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दिया है और बैठक बिहार या नई दिल्ली में तय की जाएगी। आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के दोनों प्रमुख धड़ों सहित विभिन्न मतुआ संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। महासंघ, जो मतुआ संप्रदाय का सर्वोच्च निकाय माना जाता है, फिलहाल राजनीतिक आधार पर बंटा हुआ है एक धड़ा टीएमसी के साथ और दूसरा भाजपा के साथ। भाजपा-समर्थित गुट पर केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और उनके बड़े भाई व विधायक सुभ्रत ठाकुर का नियंत्रण है, जबकि इनकी चाची व टीएमसी सांसद ममता बाला ठाकुर दूसरे गुट का नेतृत्व करती हैं।
ठाकुर परिवार की खींचतान से नाराज़गी
समुदाय के भीतर ठाकुर परिवार की लगातार खींचतान से असंतोष बढ़ रहा है। ठाकुर परिवार की जड़ें मतुआ संप्रदाय के संस्थापक और 19वीं सदी के समाज सुधारक हरिचंद ठाकुर से जुड़ी हैं। चौधरी से मिलने वाले नेताओं ने भाजपा और टीएमसी दोनों पर नाराज़गी जताई और कहा कि किसी ने भी उनकी पुरानी नागरिकता समस्या को सुलझाने में ईमानदार पहल नहीं की।
नागरिकता और पहचान का संकट
चंदन घोष चौधरी के अनुसार, नागरिकता के वादों में देरी, पहचान संकट और राज्यों में बढ़ती कार्रवाइयों से परेशान मटुआ अब राहुल गांधी से निर्णायक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं। भाजपा 2019 से ही मतुआ समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रही है और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को समाधान बताती रही है। लेकिन 2024 में CAA लागू होने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-सा दस्तावेज़ मान्य होगा और किन्हें नागरिकता मिलेगी। दूसरी ओर, टीएमसी कहती रही है कि मतुआ समुदाय पहले से ही मतदाता सूची में है, इसलिए CAA लेने की जरूरत नहीं, मगर उसने भी कोई ठोस विकल्प नहीं दिया।
चुनावी समीकरण में अहम भूमिका
मतुआ समुदाय बंगाल की करीब 30 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है और 50 अन्य सीटों पर भी असर रखता है। राज्य की SC आबादी का 17.4% हिस्सा होने के कारण यह समुदाय राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। हाल ही में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई के दौरान महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मटुआ लोगों को हिरासत में लेने या घुसपैठिया कहे जाने की घटनाओं से असुरक्षा और बढ़ गई है।
भाजपा लगातार कह रही है कि मतुआ लोगों को भविष्य में परेशानियों से बचने के लिए CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए, और इसके लिए कैम्प भी आयोजित कर रही है। लेकिन ठाकुर परिवार के झगड़े ने इन कैंपों की विश्वसनीयता पर असर डाला है।
ठाकुर परिवार में गहराता विवाद
24 अगस्त को ठाकुरनगर में धार्मिक प्रमाणपत्र वितरण कैंप को लेकर शांतनु और सुभ्रत ठाकुर आमने-सामने आ गए। सुभ्रत ने भाई शांतनु पर “दलाल राज” चलाने और फंड में गड़बड़ी का आरोप लगाया, तो शांतनु ने सुभ्रत पर टीएमसी में जाने की साज़िश का। मां छबीरानी ठाकुर सुभ्रत के पक्ष में रहीं, जबकि पिता मंजुल कृष्णा ठाकुर ने शांतनु का साथ दिया। इनकी चाची ममता बाला ठाकुर (टीएमसी) ने बीच-बचाव की भूमिका निभाई।यह पारिवारिक विवाद समुदाय को परिवार और दलों से दूर कर तीसरे विकल्प की ओर झुकने को मजबूर कर रहा है।
कांग्रेस की ओर झुकाव
24 अगस्त को हाबड़ा (उत्तर 24 परगना) में SC फेडरेशन की रैली में प्रदेश कांग्रेस नेता रंजन मुखर्जी की मौजूदगी ने इस झुकाव को स्पष्ट किया। रैली मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को आसान बनाने की मांग को लेकर थी।मुखर्जी का दावा है कि राहुल गांधी का दलित अधिकारों पर लगातार जोर मतुआ समुदाय को आकर्षित कर रहा है।
जब 28 अगस्त को उत्तर 24 परगना जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्राणी दत्ता चटर्जी ने ठाकुरनगर मंदिर में भाषण देने की कोशिश की, तो सुभ्रत ठाकुर ने इसका विरोध किया। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अब मटुआ बेल्ट में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दे रही है। दत्ता चटर्जी ने लोगों से कहा, राहुल गांधी पर भरोसा रखिए। जैसे उन्होंने देश के नागरिकों की लड़ाई लड़ी है, वैसे ही यह लड़ाई मटुआ समुदाय के लिए भी है। हम यहां चुनावी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि मंदिर के भीतर की राजनीति का विरोध करने आए हैं।