अमेरिका से व्यापारिक टकराव गहराया, भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती
टैरिफ पर भारत-अमेरिका में टकराव चरम पर है। ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाया, रूस से तेल खरीद पर हमले तेज कर दिए हैं।असली खेल ऊर्जा सुरक्षा और दुर्लभ खनिजों पर केंद्रित है।;
अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने हाल के दिनों में गंभीर मोड़ ले लिया है। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर तीखे हमले तेज हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी सलाहकार लगातार भारत को निशाना बना रहे हैं, जबकि चीन जो रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है या यूरोपीय संघ (EU) जो रूसी गैस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है उनके हमलों के दायरे में नहीं हैं।
दरअसल, 2025 की पहली छमाही में यूरोपीय संघ ने रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का आयात बढ़ाकर €4.4 अरब कर दिया, जो पिछले साल इसी अवधि में €3.47 अरब था। हालांकि EU ने घोषणा की है कि वह 2027 के अंत तक LNG पर प्रतिबंध लगाएगा।
भारत पर केंद्रित हमले
ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने 28 अगस्त को फिर हमला बोला। एक दिन पहले ही भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ लागू हुआ था। नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को “मोदी का युद्ध” बताते हुए कहा:
“भारत कल ही 25% टैरिफ छूट पा सकता है, अगर वह रूसी तेल खरीदना बंद कर दे। भारत सरकार ने इस झटके से निपटने के लिए तीन-स्तरीय रणनीति बनाई है:
व्यापार का विविधीकरण,
श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों को वित्तीय सहायता,
GST कटौती के ज़रिए घरेलू खपत बढ़ाना।
नवारो ने भारत पर चीन और रूस से नज़दीकी बढ़ाने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं बल्कि पुतिन के युद्ध तंत्र को वित्तीय मदद रोकने की कवायद है।इसी दिन ट्रंप के दूसरे सलाहकार केविन हैसेट ने भी चेतावनी दी “अगर भारत झुकेगा नहीं, तो राष्ट्रपति ट्रंप भी नहीं झुकेंगे। वहीं अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत पर वार्ता लंबा खींचने और रूसी तेल से फायदा उठाने का आरोप लगाया।
रूसी तेल और टैरिफ की राजनीति
भारत ने 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूसी तेल का बड़ा आयात शुरू किया। उस समय अमेरिका ने ही इसे हरी झंडी दी थी ताकि वैश्विक तेल बाज़ार स्थिर रह सके। पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने मई 2024 में इस बात का खुलासा किया।लेकिन जून 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने चीन और भारत पर 500% टैरिफ लगाने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक, “भारत पुतिन का समर्थन करने की कीमत चुका रहा है।
ट्रंप ने भी जुलाई से अगस्त 2025 के बीच कई बार भारत को सीधे चेताया—पहले 50 दिन की डेडलाइन दी, फिर भारत और रूस को “मरी हुई अर्थव्यवस्थाएं” कहा, और अंततः 6 अगस्त को 50% टैरिफ लागू कर दिया।
अमेरिका की असली चिंता: दुर्लभ खनिज
ट्रंप की टैरिफ नीति सिर्फ रूसी तेल तक सीमित नहीं है। अमेरिका की हाई-टेक और रक्षा उद्योग चीन पर निर्भर दुर्लभ खनिजों (Rare Earths) को लेकर बेहद चिंतित है। ये खनिज ग्रेफाइट, टाइटेनियम और लिथियम जैसे संसाधनों में शामिल हैं। राहुल सिंह, पूर्व रक्षा मंत्रालय अधिकारी, लिखते हैं कि भारत पर 50% टैरिफ का मुख्य कारण उसका रूसी तेल आयात है, जो रूस को मज़बूत करता है और ट्रंप के वार्ता हथियार को कमजोर। इससे अमेरिका को यूक्रेन के दुर्लभ खनिज संसाधनों तक पहुंचने में मुश्किल आती है।
भारत की रणनीति और चुनौतियां
भारत ने इस संकट से निपटने के लिए तीसरी लॉबिंग कंपनी मरकरी पब्लिक अफेयर्स को नियुक्त किया है। जर्मन अखबार FAZ ने रिपोर्ट दी कि ट्रंप ने हाल ही में पीएम मोदी से चार बार बात करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने कॉल नहीं उठाया। इससे दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत में दरार की आशंका गहरी हो गई है।
सरकार की रणनीति में व्यापार विविधीकरण (लेकिन नए बाजार खोजने में एक साल से अधिक लग सकता है), MSME क्षेत्र को राहत पैकेज (25,000 करोड़ रुपये का ऐलान), GST कटौती (3-4 सितंबर की GST परिषद बैठक में फैसला) शामिल है।हालांकि निर्यातकों का कहना है कि अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजना लगभग असंभव है, क्योंकि यूरोप और विकसित देशों में सख्त मानक और नियम हैं।
कूटनीतिक पहल: जापान, चीन और कनाडा
पीएम मोदी जापान और फिर चीन जाकर SCO शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात करेंगे। भारत-चीन-रूस ने अमेरिका के टैरिफ के खिलाफ भारत का समर्थन किया है। साथ ही, कनाडा के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
असली सवाल
क्या राहत पैकेज और तात्कालिक कदम भारत की मूल आर्थिक कमजोरियों को दूर कर पाएंगे?क्या घरेलू कंपनियां, जो अब तक संरक्षणवाद पर निर्भर रही हैं, वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बन पाएंगी? सरकारी प्रयास अभी “Knee-jerk reactions” यानी तात्कालिक प्रतिक्रिया लगते हैं, न कि दीर्घकालिक रणनीति। असली चुनौती यही है कि क्या भारत इस संकट को अवसर में बदलकर खुद को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग-निर्यातक केंद्र बना पाएगा?यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिकी टैरिफ जंग सिर्फ रूस-यूक्रेन युद्ध का नतीजा नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों और वैश्विक शक्ति संतुलन का खेल है, जिसमें भारत अब सीधा निशाने पर है।