सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ने बढ़ाई सरकार की सिरदर्दी, जानें क्यों बंद हो गई स्कीम!
सरकार ने संसद को बताया कि 130 टन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्प्शन होना बाकी है जिसका इश्यू प्राइस 67,322 करोड़ रुपये है.;
Sovereign Gold Bond Scheme: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेशित निवेशकों की तो बल्ले-बल्ले हो गई है. लेकिन केंद्र सरकार के खजाने में इन बॉन्ड के चलते बड़ा सेंध लगने जा रहा है. सरकार ने संसद को बताया कि 130 टन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्प्शन होना बाकी है जिसका इश्यू प्राइस 67,322 करोड़ रुपये है. लेकिन सोने के दामों में तेज उछाल के बाद मौजूदा मार्केट प्राइस के हिसाब से आज की तारीख में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का पूरी तरह रिडेम्प्शन हुआ तो सरकार को करीब 1.2 ट्रिलियन करोड़ रुपये का भुगतान सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को करना होगा.
SGB की देनदारी पर सरकार से सवाल
राज्यसभा में प्रश्नकाल में सांसद नारायण दास गुप्ता ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को लेकर सरकार से सवाल किया. उन्होंने सरकार से पूछा कि 2015 के बाद जारी किए गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कुल संख्या, वैल्यू और बकाया लायबिलिटी यानी देनदारी कितनी है.
130 टन गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्प्शम होना बाकी
इस सवाल का लिखित में जवाब देते हुए वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 67 चरणों में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए 146.97 टन के वैल्यू के बराबर गोल्ड जारी किया है. उन्होंने बताया कि 20 मार्च 2025 तक 130 टन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्प्शन किया जाना बाकी है जो 67,322 करोड़ रुपये इश्यू प्राइस पर जारी किया गया था. वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्प्शन जो तब सोने की कीमत रहेगी उसके आधार पर किया जाएगा. वित्त राज्यमंत्री ने सदन को बताया कि, पब्लिक अकाउंट में गोल्ड रिजर्व फंड तैयार किया है जिसमें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर दिया जाने वाला ब्याज और इश्यू प्राइस और मौजूदा प्राइस के बीच के फर्क के रकम को रखा जाता है. उन्होंने बताया कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, सेविंग और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के तौर पर निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड के विकल्प के तौर पर उभरकर सामने आया है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्यों हुआ बंद!
सरकार ने बताया कि, हाल के दिनों में सोने के दामों में भारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के चलते सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए उधार लेना महंगा हो गया है. इसलिए वित्त वर्ष 2024-25 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए सरकार ने पैसे नहीं जुटाये हैं. आपको बता दें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर निवेशकों सोने के दामों में तेज उछाल के चलते 3 गुना तक रिटर्न मिला है. वित्त वर्ष 2016-17 के लिए जारी किए गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के सीरीज IV में निवेश करने वाले निवेशकों ने 2943 रुपये प्रति ग्राम पर बॉन्ड खरीदा था, उस बॉन्ड की मैच्योरिटी प्राइस 8624 रुपये प्रति ग्राम तय की गई है. इससे साफ है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार के लिए मुसीबत साबित हुआ है.