क्या होते हैं डमी स्कूल क्यों बढ़ रहा इनका चलन, CBSE की भी नजर टेढ़ी

CBSE ने साफ कर दिया है कि जो बच्चे डमी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्हें 2025-26 सेशन में परीक्षा देने की इजाजत नहीं मिलेगी। सवाल है कि डमी स्कूल किसे कहते हैं।;

By :  Lalit Rai
Update: 2025-03-29 09:00 GMT

अगर आप एक या दो दिन स्कूल नहीं जाते हैं तो स्कूल की तरफ से शिकायत आती है कि आपका बच्चा स्कूल नहीं आ रहा है। अगर गैर हाजिरी अधिक हुई तो परीक्षा में नहीं बैठने देंगे। वहीं देश के अलग अलग हिस्सों में ऐसे भी स्कूल हैं जो कहते हैं कि स्कूल आने की जरूरत नहीं। लेकिन ऐसे स्कूलों पर सीबीएसई ने अपना डंडा चला दिया है। सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि ऐसे छात्र जो नियमित स्कूल का हिस्सा नहीं होंगे उन्हें परीक्षा नहीं देने देंगे। इन सबके बीच आप एक नाम डमी स्कूल का सुन रहे होंगे।  खासकर कोटा, जयपुर, दिल्ली, लखनऊ और पटना जैसे शहरों में इस तरह के स्कूलों का चलन बढ़ा है। दरअसल ऐसे स्कूल जिनमें छात्रों का औपचारिक नामांकन तो होता है, लेकिन वे कभी स्कूल नहीं जाते। पूरा समय कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई में व्यतीत होता है। उन्हें डमी स्कूल कहते हैं।  

नियमित स्कूलिंग अनिवार्य

CBSE ने स्पष्ट किया है कि 2025-26 सत्र से वे छात्र जो नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते, बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने भी डमी स्कूलों के बढ़ते चलन को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि इससे छात्र स्कूलिंग से दूर होते जा रहे हैं और मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।

डमी स्कूलों का बढ़ता चलन

यूपी के वीबीएस यूनिवर्सिटी जौनपुर में पूर्व प्रोफेसर वी डी मिश्रा ने द फेडरल देश से खास बातचीत में बताते हैं कि यह कोचिंग सेंटर और स्कूलों की मिलीभगत का नतीजा है।छात्र स्कूल में नामांकित होते हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति केवल कागजों पर दर्ज होती है।असल में, वे पूरा समय कोचिंग सेंटर में बिताते हैं। उन्होंने कहा कि डमी स्कूल में एडमिशन पूर्वांचल और बिहार के अलग अलग हिस्सों में अधिक है। दिल्ली और बड़े शहरों में छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी की वजह से छात्र डमी स्कूल का हिस्सा बन रहे हैं। NEP-2020 और केंद्र सरकार की कोचिंग गाइडलाइंस के बावजूद यह सिलसिला जारी है।

डमी स्कूलों का असली मुद्दा क्या है?

कई कोचिंग संस्थान छात्रों को 7वीं कक्षा से ही NEET या JEE की तैयारी में डाल देते हैं।डमी स्कूल ऐसे छात्रों को रेगुलर कक्षाओं में न आने की सहूलियत देते हैं।बच्चे केवल JEE और NEET की तैयारी पर फोकस करते हैं, जबकि बोर्ड परीक्षा की तैयारी स्वयं या कोचिंग के माध्यम से करते हैं।दिल्ली हाईकोर्ट भी इस पर टिप्पणी कर चुका है कि डमी स्कूलों की बढ़ती संख्या, स्थानीय शिक्षा मानदंडों को पूरा करने वाले छात्रों के करियर पर बुरा असर डाल रही है। प्रोफेसर वी डी मिश्रा कहते हैं कि दरअसल हजारों करोड़ रुपए का कारोबार, कोटिंग संस्थानों का बढ़ता जाल डमी स्कूल या उसकी प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा है। 

CBSE के फैसले का असर

CBSE के इस फैसले से हजारों छात्र और कोचिंग संस्थान प्रभावित होंगे। शिक्षक डॉ मनव्वुर अहमद का कहना है कि  इससे छात्रों की समग्र शिक्षा पर ध्यान केंद्रित होगा। बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए नियमित उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिससे वे छात्र भी स्कूलिंग का लाभ उठा सकेंगे, जो इससे वंचित रह जाते थे। नाम न बताने की शर्त पर कुछ पैरेंट्स कहते हैं कि उनके सामने मुश्किल है कि वो अब क्या करें। जिस तरह से ,सीबीएसई ने अपने रुख को कड़ा किया है वैसी सूरत में बच्चों को स्कूल जाना पड़ेगा। लेकिन उसकी वजह से आईआईटी, जेईई और मेडिकल की तैयारी पर असर पड़ेगा। 

डमी स्कूलों से छात्रों पर मानसिक दबाव

कोटा और अन्य कोचिंग हब में मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कोचिंग हब में आत्महत्या के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह असंतुलित जीवनशैली है।हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जो छात्र केवल कोचिंग पर निर्भर रहते हैं, वे सोशल स्किल्स और एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज से कट जाते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

CBSE की चुनौती

CBSE के इस फैसले को लागू करने की जिम्मेदारी अब स्कूलों पर होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्कूल और कोचिंग सेंटर इस नियम का पालन करेंगे?अब CBSE अधिकारियों को इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि डमी स्कूलों की इस प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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