दिल्ली भाजपा : आम आदमी के वेष में आलीशान जीवनशैली जीने वाले हैं केजरीवाल

दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि ''केजरीवाल का सादगी का दावा, लेकिन आलीशान ठाठ! केजरीवाल के सरकारी बंगले पर हर साल 3.69 करोड़ हुए खर्च.";

Update: 2025-04-05 13:14 GMT

Delhi BJP On Arvind Kejriwal : भाजपा ने एक बार फिर से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। खुद को आम आदमी की श्रेणी में रखने और सादगी व पारदर्शिता की राजनीति का दावा करने वाले अरविन्द केजरीवाल को भाजपा ने VIP कल्चर और आलिशान जीवन शैली जीने का आदि बताया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में ये दावा किया कि अरविन्द केजरीवाल आलिशान जीवन जीते आये हैं और अपने इस दावे की एवज में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने एक आरटीआई का हवाला दिया है।

सचदेवा ने आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र के एक निवासी द्वारा दाखिल आरटीआई के जवाब में खुद केजरीवाल सरकार ने स्वीकार किया कि 2015 से 2022 के बीच, यानी आठ वर्षों में, मुख्यमंत्री के पुराने सरकारी आवास (6, फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइन्स) पर कुल ₹29 करोड़ 56 लाख 35 हजार 74 रुपये का खर्च सिर्फ सामान्य रखरखाव पर हुआ।

हर साल ₹3.69 करोड़, हर महीने ₹31 लाख का खर्च!

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर और दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि इन आँकड़ों से यह साफ है कि औसतन हर वर्ष ₹3.69 करोड़, यानी हर महीने करीब ₹31 लाख खर्च किए गए। ये खर्च किसी नई इमारत के निर्माण या किसी बड़े नवीनीकरण पर नहीं, बल्कि साधारण कार्यों—जैसे कि टूट-फूट की मरम्मत, सीवर की सफाई, बिजली मरम्मत और बढ़ईगिरी के काम—पर किए गए।

सचदेवा ने सवाल उठाते हुए कहा कि "क्या एक सामान्य सरकारी बंगले पर इतने खर्च को जायज़ ठहराया जा सकता है? जिस दिल्ली में ₹3 से 4 करोड़ में एक आलीशान 250-300 गज का बंगला बन जाता है, वहां सिर्फ मरम्मत पर ही इतने करोड़ों खर्च कर देना, आम आदमी की सरकार के नाम पर एक मज़ाक नहीं तो और क्या है?"

'शीशमहल' के बाद अब 'रखरखाव महल'?

भाजपा ने आरोप लगाया कि यह खुलासा उस "शीशमहल" विवाद की कड़ी है, जिसमें केजरीवाल सरकार पर गुपचुप तरीक़े से ₹52 करोड़ की लागत से नया सरकारी आवास बनाने के आरोप लगे थे। अब पुराने सरकारी आवास पर भी करोड़ों की मरम्मत की कहानी सामने आने के बाद भाजपा ने इसे केजरीवाल की "फाइव स्टार जीवनशैली" का ताज़ा प्रमाण बताया है।

सचदेवा ने तंज कसते हुए कहा, "केजरीवाल ने राजनीति में सादगी का जो मुखौटा पहन रखा था, वह अब पूरी तरह उतर चुका है। जिनके भाषणों में झाड़ू और झुग्गी की बात होती थी, असल में उनके बंगले का रखरखाव ही करोड़ों में होता है।"

भ्रष्टाचार की आंच या सरकारी फिजूलखर्ची?

भाजपा का कहना है कि यह केवल फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार का मामला भी हो सकता है। वे चाहते हैं कि इस पूरे खर्च की निष्पक्ष जांच हो और जनता को बताया जाए कि आखिर किन-किन मदों में इतना खर्च हुआ।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि “इतना खर्च तो कई प्राइवेट मल्टीप्लेक्स या कॉर्पोरेट ऑफिस के सालाना मेंटेनेंस में भी नहीं होता होगा। सवाल ये है कि क्या ये 'रखरखाव' के नाम पर घोटाले की स्क्रिप्ट है?”

केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल

दिल्ली भाजपा का कहना है कि केजरीवाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं और पिछले कुछ समय से मीडिया से भी दूरी बनाए हुए हैं। भाजपा अध्यक्ष ने चुनौती देते हुए कहा, अगर उनके पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो वे सामने आकर जवाब दें कि उनके पुराने सरकारी बंगले में ऐसी कौन-सी दिक्कतें थीं, जिसके चलते हर महीने ₹31 लाख खर्च करना पड़ा?”

एक तरफ आम आदमी पार्टी खुद को ईमानदार और सादगी पसंद बताती है, वहीं दूसरी ओर सामने आ रहे आंकड़े एक भिन्न ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या "आम आदमी" की राजनीति के नाम पर जनता को सिर्फ शब्दों का झुनझुना थमाया गया?

अब जनता इंतज़ार कर रही है कि क्या अरविंद केजरीवाल इन गंभीर आरोपों पर कोई जवाब देंगे, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


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