दिल्ली में आपात स्थिति में बिना टेंडर 10 लाख तक खर्च कर सकेंगे इंजीनियर, सरकार ने नियम किए लागू

अक्सर दिल्लीवासियों को पानी की लाइन फटने, सीवर ब्लॉकेज या अन्य अचानक आने वाली दिक्कतों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। पहले टेंडर प्रक्रिया की वजह से मरम्मत में देरी हो जाती थी, लेकिन अब इंजीनियर बिना देर किए काम शुरू करा सकेंगे।

Update: 2025-11-29 11:13 GMT
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दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इंजीनियरों को यह अधिकार दे दिया है कि आपात स्थिति में वे बिना टेंडर जारी किए 10 लाख रुपये तक मरम्मत के काम तुरंत शुरू कर सकते हैं। इससे पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं को जल्दी ठीक कराया जा सकेगा और लोगों को राहत मिलेगी।

पानी–सीवर की दिक्कतें

अक्सर दिल्लीवासियों को पानी की लाइन फटने, सीवर ब्लॉकेज या अन्य अचानक आने वाली दिक्कतों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। पहले टेंडर प्रक्रिया की वजह से मरम्मत में देरी हो जाती थी, लेकिन अब इंजीनियर बिना देर किए काम शुरू करा सकेंगे। नागरिकों की समस्याएं जल्दी सुलझेंगी। अधिकारी अब बहाने नहीं बना पाएंगे। सरकार की मंजूरी के बाद दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने इस नियम को लागू कर दिया है। डीजेबी के वित्त और लेखा निदेशक के प्रस्ताव पर बोर्ड ने भी मुहर लगा दी।

अब टेंडर या कोटेशन की जरूरत नहीं

नए नियम के तहत अधीक्षण अभियंता बिना स्पॉट कोटेशन और बिना टेंडर मंगाए 10 लाख रुपये तक के आपातकालीन काम की मंजूरी दे सकते हैं। लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं।

मुख्य शर्तें

किसी भी काम की मंजूरी से पहले संबंधित अधिकारियों/सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। इंजीनियरों को जनरल फाइनेंशियल रूल्स, CPWD मैनुअल, प्रोक्योरमेंट मैनुअल और विभागीय गाइडलाइन का पूरा पालन करना होगा। हर ऐसे काम की पूरी रिपोर्ट तैयार होगी और हर माह की 7 तारीख तक डीजेबी के CEO को भेजी जाएगी। भ्रष्टाचार रोकने के लिए इन मामलों पर खास निगरानी रखी जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जन समस्याओं को दूर करने में जरा भी देरी नहीं होनी चाहिए। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से मरम्मत के काम तेज़ी से होंगे और लोगों को इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।

अन्य विभाग भी अपना सकते हैं यह मॉडल

डीजेबी के सभी अधिकारियों को इस नए नियम की सूचना दे दी गई है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल प्रभावी साबित होगा। अन्य विभाग भी जल्द ही आपात स्थितियों में इसी तरह के अधिकार देने पर विचार कर सकते हैं। इससे दिल्ली में कई सेवाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

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