क्या लालू फैमिली की राजनीति पर ग्रहण! IRCTC स्कैम में कैसे आया नाम

आईआरसीटीसी स्कैम में अब रोजाना सुनवाई होगी। इसमें लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगे। इस केस को बिहार चुनाव के नजरिए से अहम माना जा रहा है।;

By :  Lalit Rai
Update: 2025-02-27 03:49 GMT

IRCTC Scam: सीबीआई की विशेष अदालत ने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में आरोप तय करने पर बहस पूरी करने के लिए छह दिन की समय सीमा निर्धारित की है। इस मामले में मुख्य आरोपी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित अन्य लोग शामिल हैं।

28 फरवरी से 7 मार्च तक हर रोज सुनवाई

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में कई पक्षकार हैं और रिकॉर्ड का विशाल संग्रह है। इसके अलावा, सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, यह मामला 28 फरवरी से 7 मार्च तक रोजाना सुना जाएगा।

क्या है आरोप?

सीबीआई के मुताबिक, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब उन्होंने आईआरसीटीसी होटलों के आवंटन में अनियमितताएं कीं। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया और बदले में अपने परिवार के नाम पर जमीन लिखवाई। इस मामले में सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।

बचाव पक्ष को दलीलों के लिए निर्देश

अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी प्रतिवाद दलीलें तैयार रखें। आदेश में कहा गया है कि आरोपी व्यक्तियों के वकील आपस में समन्वय कर बहस के क्रम को तय कर सकते हैं, लेकिन किसी भी वकील की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी।

बहस का क्रम और संभावित फैसला

इससे पहले, सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक दलीलें पूरी कर ली थीं, जबकि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के वकीलों ने कानूनी मुद्दों पर अपनी दलीलें रखी थीं। जानकारों के मुताबिक, सीबीआई जल्द ही अन्य आरोपियों के खिलाफ बहस पूरी कर लेगी, जिसके बाद बचाव पक्ष अपनी दलीलें पेश करेगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि आरोप तय किए जाएं या नहीं। यदि आरोप तय होते हैं, तो मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

विनोद अस्थाना की याचिका और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इस मामले में सह-अभियुक्त, पूर्व सरकारी अधिकारी विनोद अस्थाना ने अपने खिलाफ आरोप तय करने पर सुप्रीम कोर्ट से रोक प्राप्त कर ली थी, जिससे सुनवाई लंबित थी। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। 11 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि सभी मुद्दे आरोप तय करते समय उठाए जा सकते हैं। इसके बाद, 20 फरवरी को सीबीआई अदालत ने कहा कि वह आरोपों पर सुनवाई आगे बढ़ाएगी।

बिहार की राजनीति पर असर

यह मामला बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लालू यादव राज्य के बड़े नेता हैं और उनके परिवार का व्यापक राजनीतिक प्रभाव है। इस मामले का फैसला उनके और उनके परिवार के राजनीतिक भविष्य पर असर डाल सकता है। इसलिए, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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