क्या सेनगोट्टैयन को AIADMK में मिल रही है बढ़त, बीजेपी से बढ़ी करीबी
सेनगोट्टैयन के दिल्ली दौरे ने AIADMK में राजनीति गरमा दी है। भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है ऐसे में ई पलानीस्वामी और AIADMK के लिए आगे का रास्ता क्या है?;
पूर्व मंत्री और AIADMK के वरिष्ठ नेता के.ए. सेंगोट्टैयन एक बार फिर चर्चा में हैं, खासकर नई दिल्ली में हुई उनकी हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद हाल ही में उनकी मुलाकात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई, जिससे पार्टी में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। इन बैठकों के बाद, सूत्रों ने पुष्टि की कि गृह मंत्रालय ने सेंगोट्टैयन को 'Y' कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान करने को मंजूरी दे दी है, जो उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत है।
वफादार नेता की वापसी
सेंगोट्टैयन तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं। उन्होंने 1980 के दशक से अब तक अपनी गृह विधानसभा सीट गोपी चेट्टिपालयम से आठ बार जीत हासिल की है, केवल 1996 में एक बार हार का सामना किया। वह परिवहन, कृषि और स्कूल शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री रह चुके हैं, और पूर्व मुख्यमंत्रियों जे. जयललिता व ई.के. पलानीस्वामी (EPS) के करीबी सहयोगी रहे हैं।
हालांकि, उनकी अचानक बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से AIADMK के भीतर असहजता बढ़ रही है। खासकर EPS का उनकी दिल्ली यात्रा को लेकर दिया गया बयान चौंकाने वाला था। जब EPS से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे सेंगोट्टैयन की दिल्ली यात्रा की कोई जानकारी नहीं है।" यह टिप्पणी पार्टी के भीतर संवाद की कमी को उजागर करती है।
आंतरिक मतभेद के संकेत
यह पहली बार नहीं है जब सेंगोट्टैयन के कदमों ने पार्टी के भीतर हलचल मचाई है। फरवरी में उन्होंने उस किसान कार्यक्रम में भाग नहीं लिया, जिसे EPS के नेतृत्व में अथी कडवु अविनाशी परियोजना के लिए धन्यवाद देने हेतु आयोजित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, सेंगोट्टैयन इस बात से नाराज थे कि निमंत्रण पत्रों और बैनरों पर AIADMK संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन और पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की तस्वीरें नहीं थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि EPS गुट सेंगोट्टैयन के बढ़ते प्रभाव से खुश नहीं है, खासकर जब यह प्रभाव भाजपा के समर्थन से बढ़ता दिख रहा है। पार्टी के भीतर इस खींचतान से संकेत मिलता है कि AIADMK में अंदरूनी असंतोष गहराता जा रहा है।
भाजपा की रणनीतिक दिलचस्पी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा इस घटनाक्रम को तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK पर अपना प्रभाव बढ़ाने के एक और प्रयास के रूप में देख रही है। एक विश्लेषक के मुताबिक, "भाजपा AIADMK के आंतरिक मामलों में निर्णायक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है और आने वाले चुनावों से पहले पार्टी को नए स्वरूप में ढाल सकती है।"
यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि भाजपा नेतृत्व AIADMK को फिर से NDA में शामिल करने की योजना बना रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु इकाई में नेतृत्व परिवर्तन करने पर भी विचार कर सकती है ताकि यह प्रक्रिया सुगम हो सके। सेंगोट्टैयन का बढ़ता कद और उनकी दिल्ली यात्रा ने इन अटकलों को और बल दिया है।
भविष्य का समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि AIADMK अपनी एकता बनाए रख पाएगी या पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा? भाजपा और सेंगोट्टैयन की नजदीकियां पार्टी के अंदर सत्ता संतुलन को बदल सकती हैं। EPS और सेंगोट्टैयन जैसे प्रमुख नेताओं के अगले कदम राजनीतिक भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह साफ है कि तमिलनाडु की राजनीति अभी स्थिर नहीं है और आने वाले दिनों में बड़े बदलाव हो सकते हैं।