2018 में उर्जित पटेल ने RBI गवर्नर के पद से दिया इस्तीफा, अब सरकार ने बनाया IMF का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
उर्जित पटेल, के.वी. सुब्रमणियन की जगह लेंगे, जिन्हें इसी वर्ष 3 मई 2025 को केंद्र सरकार ने आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को हटाने का फैसला लिया था.;
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का नया एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने उर्जित पटेल की नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी है. DOPT के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक उनका कार्यकाल पदभार संभालने की तारीख से तीन साल का होगा. उर्जित पटेल, के.वी. सुब्रमणियन की जगह लेंगे, जिन्हें इसी वर्ष 3 मई 2025 को केंद्र सरकार ने आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को हटाने का फैसला लिया था.
20 अगस्त 2016 को उर्जित पटेल को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का गवर्नर नियुक्त किया गया था. उनके कार्यकाल के दौरान, 8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने नोटबंदी का एलान करते हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद की घोषणा की थी. सरकार ने इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार, काला धन, नकली नोट और आतंकवाद पर रोक लगाना बताया था.
10 दिसंबर 2018 को पटेल ने तुरंत प्रभाव से RBI गवर्नर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. पटेल ने इस्तीफ़े की वजह व्यक्तिगत कारण बताए, लेकिन तब ये कह जा रहा था सरकार के साथ मतभेद के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया था। सरकार चाहती थी कि RBI से अधिक पैसा लेकर राजकोषीय घाटे को पूरा किया जाए, लेकिन पटेल ने इसे वित्तीय स्थिरता के लिए हानिकारक मानकर विरोध किया था. सरकार का यह भी मानना था कि RBI की कड़ी नीतियों से कर्ज़ (क्रेडिट) की वृद्धि रुक रही है, जिससे भविष्य में देश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है.
पटेल भारतीय रिजर्व बैंक के 24वें गवर्नर रहे थे. इससे पहले वे डिप्टी गवर्नर थे और मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की ज़िम्मेदारी संभालते थे. वे जी-20 और ब्रिक्स (BRICS) देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के समूह में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं. उर्जित पटेल ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूशन में नॉन-रेज़िडेंट सीनियर फैलो रह चुके हैं और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में कंसल्टेंट भी रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत IMF में बतौर अर्थशास्त्री की थी और बाद में IDFC और रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ भी काम किया.