IMF रिपोर्ट: भारत का GDP डेटा ‘C-ग्रेड’, नई जीडीपी सीरीज की जरूरत महसूस
MoSPI फरवरी 2026 में नई GDP सीरीज लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर माना जाएगा। इस नई सीरीज में डेटा कलेक्शन और कैलकुलेशन के तरीके में बदलाव होंगे।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2025 के लिए भारत की वार्षिक स्टाफ रिपोर्ट में देश के राष्ट्रीय खाते (GDP डेटा) को C-ग्रेड दिया है। इसका मतलब है कि IMF के अनुसार भारत द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों में कुछ कमियां हैं, जो निगरानी (surveillance) में थोड़ी बाधा डालती हैं। इसी बीच भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बताया कि जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर अप्रत्याशित रूप से 8.2% पर पहुंच गई। जबकि अप्रैल-जून में यह 7.8% थी।
IMF का यह आंकलन Article IV के तहत किया जाता है। इसके तहत IMF की टीम भारत में आती है, आर्थिक और वित्तीय आंकड़े इकट्ठा करती है और सरकारी अधिकारियों से नीतियों और आर्थिक विकास पर चर्चा करती है। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। IMF स्टाफ ने 2025 की रिपोर्ट में कहा कि मैक्रोइकॉनॉमिक और वित्तीय आंकड़ों की गुणवत्ता, उपलब्धता और समयबद्धता सुधारने से नीति निर्माण में मदद मिलेगी। हालांकि, उन्होंने भारत को कुछ सुझाव भी दिए। जैसे कि राष्ट्रीय खातों और अन्य मुख्य आंकड़ों का नियमित अद्यतन, जनगणना को प्राथमिकता देना और केंद्र और राज्यों के समेकित वित्तीय खातों की समय पर उपलब्धता। भारत सरकार ने जवाब में कहा कि नए GDP और CPI सीरीज फरवरी 2026 में लॉन्च होंगे।
IMF का रेटिंग सिस्टम
IMF की रेटिंग चार स्तरों में होती है:-
A: आंकड़े निगरानी के लिए पर्याप्त।
B: आंकड़े कुछ कमियों के बावजूद व्यापक रूप से पर्याप्त।
C: आंकड़े कुछ कमियों के कारण निगरानी में थोड़ी बाधा डालते हैं।
D: आंकड़े गंभीर कमियों के कारण निगरानी में गंभीर बाधा डालते हैं।
भारत के राष्ट्रीय खातों को C-ग्रेड मिला, जबकि अन्य पहलुओं (मूल्य, सरकारी वित्त, बाहरी क्षेत्र, मौद्रिक और वित्तीय आंकड़े) में B-ग्रेड दी गई।
पिछले सालों का इतिहास
IMF ने 2024 में भारत के आंकड़ों के लिए B-ग्रेड दिया था। इससे पहले 2016-2023 तक भारत के आंकड़े व्यापक रूप से पर्याप्त माने जाते थे। अंतिम बार MoSPI ने GDP सीरीज को 2015 में अपडेट किया था। IMF ने लंबे समय से भारत के GDP डेटा पर कुछ शिकायतें जताई हैं। जैसे कि 2011-12 बेस ईयर पर आधारित GDP सीरीज पुरानी है और इसे जल्दी अपडेट करना चाहिए। वास्तविक GDP निकालने के लिए WPI का उपयोग, जबकि PPI अधिक उपयुक्त होता।
आगे क्या होगा?
MoSPI फरवरी 2026 में नई GDP सीरीज लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर माना जाएगा। इस नई सीरीज में डेटा संग्रह और गणना के तरीके में बदलाव होंगे। साथ ही CPI, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और RBI द्वारा Balance of Payments डेटा का मासिक प्रकाशन भी शुरू होगा। IMF के अनुसार, ये सुधार भारत के आर्थिक आंकड़ों की विश्वसनीयता और नीति निर्माण में मदद करेंगे।