Heart Attack:दिल की सेहत पर ऐसा असर डालते हैं इमोशन, इतना गुस्सा है ठीक

कभी-कभार गुस्सा करना ठीक होता है। क्योंकि ये भी मन का एक भाव है, जिसे व्यक्त हो जाना चाहिए। लेकिन गुस्सा यदि आपकी आदत बन गया है तो ये हार्ट अटैक की वजह बन सकता है;

Update: 2025-04-02 18:20 GMT

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, गुस्सा आने पर शरीर कैटेकोलामाइन नामक तनाव हार्मोन छोड़ता है, जिसमें कॉर्टिसोल, एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन शामिल हैं। इन हार्मोनों की अधिकता से हृदय गति तेज हो जाती है और रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। गुस्सा या ऐसी दूसरी भावनाएं सायकाइट्री का पार्ट हैं। इसलिए हमने इस बारे में पटपड़गंज दिल्ली के सीनियर सायकाइट्रिस्ट डॉक्टर राजेश कुमार से इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने गुस्से और हार्ट हेल्थ के संबंध को समझाया साथ ही यह भी बताया कि गुस्से के अलावा खुशी और संतुष्टि जैसे इमोशन हमारी हार्ट हेल्थ पर कैसा असर डालते हैं...

 

गुस्सा और हार्ट हेल्थ के बीच कनेक्शन

डॉक्टर कुमार बताते हैं कि 'जब हमें गुस्सा आता है तब शरीर में हॉर्मोन बायोकेमिकल बढ़ जाता है। एड्रिनैलिन (Adrenaline), कॉर्टिसोल जैसे हॉर्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर्स बढ़ जाते हैं। ये स्ट्रेस हॉर्मोन हैं। जब कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता है तो ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है। ये स्थिति कभी-कभार होने पर तो समस्या नहीं है लेकिन अगर लगातार यही कंडीशन बनी रहे तो इससे ब्लड शुगर बढ़ा रहता है। इसलिए ये कंडीशन डायबिटीज जैसी बीमारी को जन्म दे सकती है या जिन्हें पहले से डायबिटीज है उनका शुगर लेवल बढ़ा सकती है। एड्रिनैलिन का स्तर बढ़ा रहने से हार्ट बीट्स बढ़ी रहती हैं और आर्टरीज लगातार हाई प्रेशर में रहती हैं, जिससे बीपी बढ़ा रहता है,जो हाइपरटेंशन की बीमारी को जन्म दे सकता है।'


गुस्से का हार्ट हेल्थ पर असर

डॉक्टर कुमार के अनुसार, गुस्सा हमें किसी ना किसी तरह की एंग्जाइटी के कारण आता है और एंग्जाइटी दूसरे मेडिकल इलनेस को जन्म देती है। यह एक साइकिल है कि एंग्जाइटी दूसरे इलनेस को जन्म देती है और दूसरे इलनेस एंग्जाइटी को जन्म देते हैं। जब आप गुस्सा महसूस करते हैं तो शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं। बॉडी 'फाइट-या-फ्लाइट' मोड में आ जाती है, जिससे हृदय गति यानी हार्ट बीट्स बढ़ जाती हैं, रक्तचाप बढ़ता है और एड्रेनालिन व कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन निकलते हैं। ये परिवर्तन अल्पकालिक सुरक्षा के लिए आवश्यक हो सकते हैं। लेकिन अगर बार-बार गुस्सा आता है तो यह लंबे समय में हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। यानी हार्ट अटैक की संभावनाएं सीधे तौर पर तो गुस्से या एंग्जाइटी से रिलेटेड नहीं हैं। लेकिन इनडायरेक्टली ये ऐसी कंडीशन्स को बढ़ावा दे सकती हैं, जो हार्ट अटैक की वजह बन सकती हैं। इसी तरह एंग्जाइटी और डिप्रेशन में होने वाला पैनिक अटैक डायरेक्टली कभी भी हार्ट अटैक नहीं कराता है लेकिन डायबिटीज या बीपी के माध्यम से हार्ट अटैक को बढ़ावा दे सकता है।

दिल की सेहत को ऐसे खा जाता है गुस्सा

गुस्से के कारण रक्तचाप अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। यदि यह बार-बार होता है तो रक्तवाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त और संकुचित होना) जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

गुस्से के दौरान हृदय की धड़कन तेज हो जाती है। यदि यह बार-बार होता है तो यह हृदय पर दबाव डाल सकता है और अनियमित हृदयगति (अरिदमिया) जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।

लगातार गुस्सा आने से शरीर में तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में सूजन और क्षति हो सकती है। यह हृदय रोगों के लिए एक प्रमुख कारक बन सकता है।

गुस्से कंट्रोल करने के तरीके

रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं- गहरी सांस लेना, ध्यान (मेडिटेशन) और मांसपेशियों को आराम देने वाली तकनीकों का अभ्यास करें। ये विधियां हृदय पर शांत प्रभाव डालती हैं और तनाव को कम करने में मदद करती हैं।

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं- संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। ये आदतें न केवल हृदय को स्वस्थ रखती हैं, बल्कि गुस्से और तनाव को प्रबंधित करने में भी मदद करती हैं।

एक्सपर्ट्स की सहायता लें: यदि गुस्से को नियंत्रित करना कठिन हो रहा हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (सायकाइट्रिस्ट) की सहायता लेना लाभदायक हो सकता है। थेरेपी और काउंसलिंग से गुस्से की तीव्रता और आवृत्ति को कम करने की ट्रिक्स सीखी जा सकती हैं।

भावनात्मक संतुलन और हृदय स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। यदि आप गुस्से को नियंत्रित करने की रणनीतियां अपनाते हैं तो न केवल हृदय रोगों की आशंका कम होगी बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। डॉक्टर कुमार कहते हैं 'जब हम खुश रहते हैं तो हमारा सेरेटोनिन और डोपामिन का संतुलन और प्रोलैक्टिन का संतुलन बना रहता है। हमारी बॉडी होम्योस्टैसिस (Homeostatis) में रहती है। होम्योस्टैसिस बॉडी की ऐसी अवस्था है, जिसमें शरीर प्राकृतिक रूप से सही काम करता है और अपनी बेस्ट स्टेट में रहता है।'


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। कोई भी स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य करें।

Tags:    

Similar News