सिपाही पर भारी पड़ी यूपी के मंत्री की गवाही, 27 साल बाद मिली सजा

यूपी पुलिस के उस सिपाही को अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसे सजा मिल जाएगी। दरअसल सरकार में मंत्री असीम अरुण की गवाही उस सिपाही पर भारी पड़ी।;

By :  Lalit Rai
Update: 2025-04-05 06:08 GMT
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं असीम अरुण फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

झांसी की 33वीं पीएसी बटालियन में तैनात सिपाही राजेश कुमार उपाध्याय को फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण की गवाही के आधार पर आया है, जिन्होंने अपने आईपीएस कार्यकाल के दौरान इस घोटाले का खुलासा किया था।

क्या था मामला?

वर्ष 1999 में राजेश कुमार उपाध्याय ने झांसी की 33वीं पीएसी वाहिनी में सिपाही पद पर नौकरी पाई थी।कुछ समय बाद उसके खिलाफ एक शिकायत दर्ज हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है।उस समय पीएसी के सेना नायक आईपीएस असीम अरुण ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और दस्तावेजों की गहन जांच के आदेश दिए।

जांच में सामने आया सच

जांच के दौरान राजेश के शैक्षिक और सेवा संबंधी दस्तावेज फर्जी पाए गए।इसके बाद झांसी में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।अदालती कार्यवाही पूरे 26 साल तक चली, जिसमें असीम अरुण प्रमुख गवाह के रूप में पेश हुए।

कोर्ट का फैसला

आखिरकार, राजेश कुमार उपाध्याय दोषी पाया गया।कोर्ट ने उसे 5 साल की कैद की सजा सुनाई।मंत्री असीम अरुण की गवाही इस फैसले में निर्णायक साबित हुई।

कौन हैं असीम अरुण?

असीम अरुण एक तेज़-तर्रार आईपीएस अधिकारी रहे हैं।उन्होंने 2022 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया।उसी साल कन्नौज सदर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।यह सीट लंबे समय तक समाजवादी पार्टी का गढ़ रही थी।

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